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Mukti Bhawan Movie

Mukti Bhawan Movie

“मुझे अजीब सपने आते हैं, यकीनन मेरा अंत समय नज़दीक आ गया है, मैं कल बनारस चला जाऊँगा, मोक्ष तो वहीं मिलेगा” ये कहकर, रिटायर्ड टीचर/लेखक/कवि दया कुमार (ललित बहल), अपने जन्मदिन पर केक काट कर और गौ दान करके, मुक्ति भवन जाने की ज़िद पकड़ लेते हैं… बेटे राजीव […]

by April 17, 2018 Review
इंसानियत

इंसानियत

अखबार नहीं पढ़ती अब पोर जलते हैं मेरे समाचार नहीं देखती मन हुलसता है पर चली आती हैं गर्म हवाएं दिल जलाती, आत्मा कचोटती पक्ष प्रतिपक्ष निर्धारित करती इंसानियत अपने ही पांव पर कुल्हाडा मार दूसरों के ज़ख्म पर नमक मलती चुप हो गई हूं, नहीं जानती मैं गलत हूं […]

by April 14, 2018 Hindi Poetry
देह

देह

प्रकृति बन पौरुष सहर्ष स्वीकारती तुम सभ्यता के उत्थान में योगदान देती तुम स्वयं से पहले, परिवार, समाज को पूजती तुम सदियों से बर्बरता झेल, कोमल ह्रदय सहेजती तुम कुछ न समझा तुमने जानते बूझते आंखें मूंदे रही तुम्हें आभास भी न हुआ हर जगह, हर समय तुम केवल देह […]

by April 12, 2018 Hindi Poetry
आंनदी गोपालराव जोशी, पहली महिला डॉक्टर

आंनदी गोपालराव जोशी, पहली महिला डॉक्टर

आज की भागदौड़ भरी दुनिया में शायद ही कोई हो, जो बिना दवा या डॉक्टर के गुज़ारा कर सके… या यूं कहें कि अगर आज हम में से ज़्यादातर लोग, एक लम्बी उम्र तक जीने के काबिल हुए हैं, तो ये मेडिकल साइंस में हुई आश्चर्यजनक प्रगति का ही नतीजा […]

by March 31, 2018 Articles
गर्मियां

गर्मियां

कहने को तो अभी मार्च ही चल रहा है, पर दिल्ली की गरम सनसनाती हवा और चौंधियाता सूरज, मुझे बचपन की मई जून वाली छुट्टियां याद दिला रहे हैं…लू के थपेड़े, स्कूल से निजात दिलाते और नंदन, चंपक के सुनहरे दिन बरबस चले आते… होमवर्क करने का ख्याल तो मुझे […]

by March 30, 2018 Articles, Fiction, Fursat ke Pal
नाटक

नाटक

भूलना हो तो इतना याद करो कि वो अहसास नहीं अभ्यास बन जाए वास्तविक अनुभव नहीं आभास बन जाए पल पल रटा गया नाम अस्तित्व खो बैठता है क्षण क्षण झलकता प्रतिबिंब निर्जीव हो उठता है मूर्तियां गढ़ दो, आदर्श खो जायेंगे सूक्तियां रच दो, सूत्र मिट जाएंगे बांधो काल्पनिक […]

by March 29, 2018 Hindi Poetry
Masaan Movie

Masaan Movie

“कपाल पर ज़ोर से पांच बार मारिए, आत्मा को मुक्ति मिलेगी” कलेजा कैसे कांपता है न ये सुनकर.. पर वो क्या करे, जिसके घर का चूल्हा ही श्मशान की आग से जलता हो.. जो रोज़ जिस्मों को राख में बदलते देखता हो.. जिसे मालूम हो कि ये चमड़ी कितनी कच्ची […]

by March 25, 2018 Review
My Prose in Ink Drift Magazine

My Prose in Ink Drift Magazine

My prose piece “Once Upon a Time in February” was published in Ink Drift Magazine in January 2018 Issue, aptly called Sprinkle.

by March 24, 2018 My Published Work