Fiction

काश

काश

आज, बहुत दिनों बाद सूरत देखी आईने में। निस्तेज चेहरा, आंखों के नीचे काले घेरे, फटे होंठ, रूखे बाल ! हैरां हूँ मैं उस अक्स को देखकर। क्या सचमुच ये हूँ मैं? वो हंसती-खिलखिलाती प्रीत कहां खो गई। याद है न तुम्हें, मेरा नाम ! तुम्हीं ने बिगाड़ा था या […]

by November 5, 2017 Fiction
जाते जाते

जाते जाते

मन जब बहुत विचलित हो जाता है तो दूर तक देखने का प्रयास करती हूँ… इतनी दूर जहां तारों का जमघट, कंक्रीट के जंगल खत्म हो जाएं.. नज़र आएं तो केवल पेड़ों की फुगनियाँ… बित्ते भर की दूरी पर टहनियाँ टकराकर, मानो एक दूजे को आलिंगन में भरती हों… रूई […]

by July 12, 2017 Articles, Fiction, Kuch Panne
तुम

तुम

by July 10, 2017 Fiction
दो दीवाने

दो दीवाने

by June 6, 2017 Fiction
सुमन

सुमन

अभेद्य प्रपंच है जीवन.. बेहद धीमी गति से रेंगता एक दुःस्वप्न.. वो हुलसकर बाहर आना चाहती है.. पर सघन तिमिर उसकी बांह खींच, वापिस ले जाता है… छोटे छोटे जुगनू, आशा की किरण से टिमटिमाते हैं और वो फिर फिर उन्हीं राहों पर लौट आती है.. चांदनी का ललचाता भ्रम […]

by April 15, 2017 Fiction
कील

कील

आज एक नयी कहानी सुनायी उन्होंने.. किसी मंदिर की मान्यता के बारे में… कि कैसे एक औरत शादी के 30 साल बाद मां बनने का सुख पा सकी… और अपनी मुराद पूरी होने पर घुटनों पर बच्चों सी रिढ़ते हुये मन्दिर के द्वार पर माता का धन्यवाद देने गयी… मैं […]

by March 9, 2017 Fiction, Kuch Panne
जूते : लघुकथा

जूते : लघुकथा

जूतों की दुकान खुली पड़ी थी और जीजा, चाचा, फूफा अपनी पसंद और नाप के अनुसार चुन रहे थे। मुफ़्त का माल ही सही, क्वालिटी चैक कर लेने में जाता ही क्या है। जब से गोपाल ने ये दुकान खोली थी, रिश्तेदारों की पांचों ऊंगलियाँ घी में थीं। भोला-भाला आदमी, […]

by March 5, 2017 Fiction, My Published Work
Once Upon A Time in February

Once Upon A Time in February

In February, the weather does a somersault. Old leaves are shed; most of the trees adorn a bare look, while small plants bear seasonal flowers. The wind blows dust and pollens, and the entire atmosphere acquires a mysterious look, covering the green lands with a subtle layer of amber dust. […]

by February 27, 2017 Articles, Fiction