Recital

रावण

रावण

धू-धू करके रावण के पुतले जलने लगे बुद्धिमान इस पर भी सवाल खड़े करने लगे कहते हैं पुतलों से क्या होगा भीतर का रावण मारो कुंभकर्ण तो भाई सगा था विभीषण को गोली मारो सीता ही नहीं थी पतिव्रता मंदोदरी का गुनगान करो राम ने ऐसा क्या किया आज जो […]

by October 3, 2014 Hindi Poetry, Recital