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मेरी दिल्ली

समाजवाद, ज़रा हटके

जाते हुए बैट्री रिक्शा गलत लेन में था, कार वाले ने डांट पिलाई, गाड़ी क्यों बीच में अटका रखी है… रिक्शे वाला खुद में सिमट गया… आते हुए एक कार वाले ने फोन पर बात करने के चक्कर में गाड़ी गलत जगह खड़ी करके रास्ता रोक रखा था, अबकि बैटरी […]

by November 9, 2019 Articles, Fiction
Destiny and Destination

Destiny and Destination

At times I feel I am fighting a lost battle. Anything I do, say or attempt, makes no difference. I am stuck in a rut, the more I try the more I get trapped. And yet, there is a small voice inside that keeps rearing its Head, goading me to […]

by October 28, 2019 Articles
आर्टिकल 15

आर्टिकल 15

बहुत कम होता है कि मूवी देखूं और कुछ कहने लिखने को मन न मचले.. क्या अच्छा लगा क्या बेकार, किसकी एक्टिंग अच्छी थी, स्क्रिप्ट कैसी थी, सेटिंग और किरदारों की जुगलबंदी काम की थी या नहीं, वगैरह वगैरह.. पर आज एक ऐसी फिल्म देखी, जिसके बाद मैं चुप हूं, […]

by August 26, 2019 Articles

इंसान या मशीन

हम सब अपनी अपनी परिधि में सिमटे हुए ज़िंदगी को देखा समझा करते हैं.. कभी हालात ज़रा सा बदलें तो हालत ख़राब होने लगती है.. बड़ा मुश्किल हो जाता है, किसी और के नज़रिए से देख पाना, समझ पाना हालांकि हमें मौके भरपूर मिला करते हैं.. इतवार को 12 घंटे […]

by August 19, 2019 Articles
Love is Hell

Love is Hell

हमारी कंट्री में दो लोगों के साथ होने के फैसले से इतने लोग व्यथित, पतित, ग्रसित हो जाते हैं, कि नो वंडर, तीन चौथाई आबादी, चुपचाप परिवार की मर्ज़ी से शादी करके, ताउम्र, दूसरों की ज़िंदगी में एक्साइटमेंट तलाशती फिरती है.. किसका किस से चक्कर, किसका किस से झगड़ा, किसने […]

by July 13, 2019 Articles
किंडल बुक्स

किंडल बुक्स

बचपन से ही चाव रहा पढ़ने का.. मम्मी की लाई कॉमिक्स हों, नन्दन, चंपक, सुमन सौरभ हो या कादम्बिनी और सोवियत नारी.. हर बार कुछ नया ढूंढ लेता था मन और मैं भाव विभोर हो उन कहानियों को अपने दोस्तों को जस का तस सुनाने बैठ जाती.. तब किसने लिखी, […]

by July 11, 2019 Articles
तलाक़

तलाक़

हमारे समाज में पिछले कुछ समय में तलाक़ की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। पर क्या इस बढ़ोतरी का ठीकरा हमें पाश्चात्य संस्कृति पर थोप देना चाहिए या फिर अपने ही समाज में कहीं कुछ ऐसा है, जिस पर ध्यान देने की ज़रूरत है? आजकल तलाक़ होते हैं […]

by June 22, 2019 Articles
गिरीश कर्नाड, श्रद्धांजलि

गिरीश कर्नाड, श्रद्धांजलि

लगभग 18 साल पहले एक नाटक पढ़ा था “तुगलक”.. एम ए इंग्लिश कोर्स का हिस्सा था.. पोस्ट ग्रेजुएशन कर ही इसलिए रही थी ताकि इस विज्ञान के विद्यार्थी रहे दिमाग का साहित्य से परिचय हो पाए.. कमला दास, nissim ezekiel, मुल्क राज आंनद और गिरीश कर्नाड.. मेरे लिए ये सब […]

by June 10, 2019 Articles