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ओलावृष्टि

ओलावृष्टि

1 घंटे तक बारिश और बीच बीच में ओले गिरे… धरती को सफ़ेद होते देखने का रोमांच ही अलग है… पर इस बेमौसम की बारिश पर मन झूमता नहीं… नाज़ुक पितुनिया खिले थे… सब टूट गए… अभी मेड अफ़सोस जता रही थी, “दीदी इत्ते सारे गमले के पीछे से उठा […]

by March 15, 2020 Articles
रंग

रंग

आज ऑफिस से पैदल ही घर आयी… बहुत सालों में शायद पहली बार छोटी होली पर भी अकेले निकलने और पैदल चलने की हिम्मत जुटाई थी… हालांकि आधे रास्ते आते आते, अपना फैसला गलत लगने लगा… एक कॉलेज आता है रास्ते में और पार्क भी… दोनों ही जगह लड़कों के […]

by March 9, 2020 Articles
हिंदी मूवीज़

हिंदी मूवीज़

पिछले दो दिन में चार मूवीज़ देखीं… पति पत्नी और वो (कार्तिक आर्यन के खातिर 🙃 हालांकि काफ़ी बोर किया मूवी ने, पर पूरी देख ही ली) … मोतीचूर चकनाचूर, नवाज़ुद्दीन के कारण देखनी शुरु की थी, पर इतना हमाए तुमाए, हमारे से पचाया नहीं गया, सो छोड़ दी… स्टूडेंट […]

by February 22, 2020 Articles
उजड़ा चमन

उजड़ा चमन

“ज़माना दिलों की बात करता है, पर मुहब्बत आज भी चेहरों से शुरु होती है” “उजड़ा चमन” का ये डायलॉग सुनने में शायद घिसा पिटा लगे पर सच्चा है… गंजे हीरो और मोटी हीरोइन को लेकर बनी ये फिल्म शायद सिर्फ cliche लगे… पर ये कहानी सच्ची लगती है, कहीं […]

by December 28, 2019 Articles, Review
दुख का नमक, कविता

दुख का नमक, कविता

प्रेम अविरल धारा है… ऐसा कोमल अहसास, जो कठोर हृदय को मोम सा पिघला दे… जब प्रेम भाव उमड़े तो स्त्री गुण ही हावी होते हैं मन में… पुरुष भी प्रेम में उतना ही संवेदनशील और कोमल हो उठता है,जितनी कि नारी… तो फिर स्त्री मन तो पहले ही इतना […]

by November 20, 2019 Articles
स्त्री शक्ति, समालोचना, संतोष पटेल

स्त्री शक्ति, समालोचना, संतोष पटेल

कुछ समय पहले यूट्यूब पर एक कविता पढ़ी थी “स्त्री शक्ति”… संतोष पटेल जी ने इस कविता को न केवल सुना और पढ़ा, बल्कि उसकी विवेचना और समीक्षा करते हुए, कविता ही नहीं, काव्य कर्म से जुड़े कई पहलुओं पर भी बहुत ही सूक्ष्मता से अपने विचार प्रकट किए हैं… […]

by November 9, 2019 Articles
अबोध

अबोध

यूट्यूब पर अपनी एक कविता पढ़ी थी ‘अबोध’… अभी देखा तो संतोष पटेल जी ने उस रचना की समालोचना अपनी वॉल पर शेयर की है… अच्छा लगा और आप सबके साथ बांटने का मन हुआ 🙂 “अनुपमा सरकार की कविता ‘अबोध‘ -संतोष पटेल अनुपमा सरकार की ‘अबोध’ कविता केवल भाव […]

by November 9, 2019 Articles
मेरी दिल्ली

समाजवाद, ज़रा हटके

जाते हुए बैट्री रिक्शा गलत लेन में था, कार वाले ने डांट पिलाई, गाड़ी क्यों बीच में अटका रखी है… रिक्शे वाला खुद में सिमट गया… आते हुए एक कार वाले ने फोन पर बात करने के चक्कर में गाड़ी गलत जगह खड़ी करके रास्ता रोक रखा था, अबकि बैटरी […]

by November 9, 2019 Articles, Fiction