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3550 Subscribers on Mere Shabd Mere Saath

3550 Subscribers on Mere Shabd Mere Saath

कहते हैं, नियति से भागा नहीं जा सकता… 17 साल पहले बी एड बीच में छोड़कर भाग अाई थी… Lesson Plan बनाना और फिर उन्हें बच्चों पर थोपने की कोशिश करना ताकि यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर को इंप्रेस कर पाऊं, बहुत बोरिंग और गैर ज़रूरी लगा था… मेरा बस चलता तो […]

by May 31, 2020 Articles
फिल्में और लेखन

फिल्में और लेखन

जानते हैं दोस्तों! मूवीज़ और लेखन का बहुत बहुत गहरा रिश्ता है। दिखने में ज़रूर लगता है कि फिल्में, हीरो हीरोइन के बलबूते चल जाती होंगी। पर दरअसल कसी हुई कहानी, सशक्त स्क्रिप्ट, और मंजे हुए डायरेक्शन के बिना, अच्छी फिल्म बनाना ही असम्भव है। उपन्यास, कहानी में कुछ पन्ने […]

by May 3, 2020 Articles
14 Videos in a Month

14 Videos in a Month

As the Lockdown began, Mere Shabd Mere Saath decided to up its ante and to post more videos regularly. Today, we have successfully posted 14 videos in a month! April 2020 has been a roller coaster month in many aspects, and at least the achievement of Mere Shabd Mere Saath, […]

by May 1, 2020 Articles
दिल्ली और कोरोना

दिल्ली और कोरोना

गाज़ियाबाद के बाद आज नोएडा ने भी दिल्ली के साथ अपने बॉर्डर सील कर दिए, इस आशंका के साथ कि दिल्ली में कोरोना तेज़ी से फैल रहा है और वहां से आने जाने वाले इसे नोएडा गाज़ियाबाद में भी पहुंचा देंगें… सच कहूं, खबर सुनकर झटका लगा… केंद्र में होना, […]

by April 22, 2020 Articles
लघुकथा

लघुकथा

लघुकथा एक ऐसी साहित्यिक विधा जिसमें कम से कम शब्दों में पाठक को हतप्रभ कर देना होता है। मंटो की दो पंक्तियों की ये लघुकथा पढ़कर देखिए उलाहना: “देखो यार। तुमने ब्लैक मार्केट के दाम भी लिए और ऐसा रद्दी पेट्रोल दिया कि एक दुकान भी न जली” अब ऐसी […]

by April 8, 2020 Articles
ज़रूरी है

ज़रूरी है

कभी पुरजोर आवाज़ में कहती थी कि ख़बरें देखने सुनने से परहेज़ है मुझे… नकारात्मकता फैलाती हैं… पर अब इस वक़्त, जब नेगेटिविटी, बीमारी और उस से कहीं ज़्यादा मनुष्य की ढकी छुपी स्वार्थी बर्बरता, मुखर हो चली है… मुझे लगता है कि ख़बरें पढ़ना और वर्तमान स्थिति का संज्ञान […]

by April 8, 2020 Articles
यह कदंब का पेड़

यह कदंब का पेड़

यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे। मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे॥ ले देतीं यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली। किसी तरह नीची हो जाती यह कदंब की डाली॥ तुम्हें नहीं कुछ कहता पर मैं चुपके-चुपके आता। उस नीची डाली से अम्मा ऊँचे पर […]

by April 8, 2020 Articles, Poetry
मेरी दिल्ली

कोरोना, जनता कर्फ़्यू

कुछ भी कहिए, मास्टर स्ट्रोक तो रहा ये जनता कर्फ्यू… हमारे देश में, जहां लोग हर रूल की धज्जियां उड़ाना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं… करोड़ों को उनके ही घर की सीमा में बांध देना, आसान नहीं… एक दिन का कहकर घर में बिठाकर, बड़े प्यार से रिहर्सल करवा दिया… […]

by March 23, 2020 Articles