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कस्बे का आदमी, कमलेश्वर

कमलेश्वर की कहानी “कस्बे का आदमी” अभी अभी पढ़ी। छोटे महराज और उनके तोते संतू की कहानी… एक छोटे से कस्बे में रहने वाले, बचपन में ही अनाथ हो, घर द्वार लुटा देने वाले की कहानी! दो पात्र, शिवराज और छोटे महराज, एक ही गली के दो बाशिंदे,और इनके जरिए […]

by June 12, 2021 Articles
तमाशबीन

तमाशबीन

किताबों में पढ़ती थी कि भारत को सपेरों का देश कहा जाता था। हैरानी होती कि क्यों भला, लगता कि खिल्ली उड़ाई जाती रही हमारी, नीचा दिखाने की साज़िश, शायद कहने वालों की मंशा थी भी यही। पर सवाल उठता है कि उन्हें यह कहने का हौंसला हुआ क्यूंकर? कुछ […]

by June 5, 2021 Articles
महामारी या मारामारी

महामारी या मारामारी

सोचा था, जब तक तन और मन दुरुस्त न हो जाए, लिखना avoid करूंगी। पर पिछले कुछ दिन इतना अवसाद, निराशा और चिंता में गुज़रे हैं कि बिना लिखे, मेरा बीपी कंट्रोल होगा नहीं, आखिर इतनी कड़वाहट और गुस्सा लिए, कोई जिए भी तो कैसे? बीमारी को महामारी और महामारी […]

by May 25, 2021 Articles
Ayurved Allopathy and Corona

Ayurved Allopathy and Corona

कल बहुत वक्त बाद आज तक का वीडियो देखा, बहस चल रही थी बाबा रामदेव और आईएमए के डॉक्टर राजन और डॉक्टर लेले के बीच… स्वस्थ और अच्छी डिबेट होती, आयुर्वेद और एलोपैथी के बीच, तो शायद पूरा देखती! पर अफसोस योग और आयुर्वेद के जिस रूप को रामदेव प्रमोट […]

by May 25, 2021 Articles
मीनमेख निकालना

मीनमेख निकालना

कभी कभी कुछ ऐसे शब्द/ मुहावरे टकरा जाते हैं कि आप विस्मित हो उठते हैं कि कितनी ही बार उपयोग करने के बावजूद हम उनका अर्थ नहीं समझ पाए। आज मुझे भी ऐसा ही एक झटका लगा, हरिवंशराय बच्चन की “क्या भूलूं क्या याद करूं” पढ़ते हुए। ज़रा नीचे के […]

by September 19, 2020 Articles
हिंदी या हिन्दी

हिंदी या हिन्दी

भाषा तरल है, भाव और समय के साथ रूपांतरित हो जाना इसकी विशेषता है। पर नियम जानना, व्याकरण और वर्तनी का सही प्रयोग समझना, किसी भी भाषा में अगर आप दक्षता प्राप्त करना चाहते हैं तो अति आवश्यक। मेरी फ्रैंड लिस्ट में बहुत से हिन्दी के ज्ञाता हैं, लेखक, कवि, […]

by September 14, 2020 Articles
Solar eclipse of 1919

काल: समय या मृत्यु

किसी वक़्त में एस्ट्रोलॉजी में बहुत इंटरस्ट था… इंटरनेट भी नया नया ही आया था उन दिनों… घंटों के हिसाब से पैकेज मिला करते थे, शायद मंत्रा सर्विस प्रोवाइडर हुआ करता था… मैं डेस्कटॉप पर बैठती तो इसी धुन के साथ कि जितनी जल्दी हो सके, relevant material ढूंढूं और […]

by August 8, 2020 Articles
3550 Subscribers on Mere Shabd Mere Saath

3550 Subscribers on Mere Shabd Mere Saath

कहते हैं, नियति से भागा नहीं जा सकता… 17 साल पहले बी एड बीच में छोड़कर भाग अाई थी… Lesson Plan बनाना और फिर उन्हें बच्चों पर थोपने की कोशिश करना ताकि यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर को इंप्रेस कर पाऊं, बहुत बोरिंग और गैर ज़रूरी लगा था… मेरा बस चलता तो […]

by May 31, 2020 Articles