Hindi Poetry

आवाज़

आवाज़

आधा जीवन बीत जाने के बाद अचानक एक कुलबुलाहट व्यक्ति, परिस्थिति, कारण स्पष्ट याद नहीं पर धीमे धीमे उभरती ये आवाज़ अंतर्मन की कोठरियों से टकरा जिह्वा के दंश से हो घायल होने और न होने के बीच मृत्यु के द्वार तक लकीर खींच सरपट भागती देह को जकड़ लेती […]

by January 28, 2018 Hindi Poetry
ज्ञानी

ज्ञानी

ज्ञानी, ध्यानी, अभिमानी कितने स्वरूप हैं इस मन के कभी आध्यात्म पक्ष मुखर हो उठता हर बात में कारण टटोलता कभी डूब जाता अथाह सागर में गोते लगा नित नये मोती खोजता अवलोकन की सतर्क क्रिया से अनजाने ही मूल्यांकन की प्रक्रिया में विलीन हो जाता ज्ञान, ध्यान खो जाते […]

by December 26, 2017 Hindi Poetry
कोहरा

कोहरा

कोहरे का झीना दुपट्टा धूपीली किनारी और बाहों में खुद को समेटती वो मतवाली ये सुबह सरदी का पैग़ाम लाई है अलाव की ज़ीनत लौट आई है, लौट आई है…. Anupama

by December 25, 2017 Hindi Poetry
धूर्त

धूर्त

कर्म, मर्यादा, कर्त्तव्य खोखले शब्द समाज का एकमात्र हथियार “अधिकार” स्नेह, करुणा, सहृदयता “अवगुण” व्यक्ति का सर्वोत्तम स्वरूप शठ, चंट, धूर्त….

by November 20, 2017 Hindi Poetry
स्टापू

स्टापू

by November 3, 2017 Hindi Poetry

कविता पाठ: रंग, यादें

Hindi Kavita: Rang, Yaadein, Anupama Sarkar हिंदी कविता: रंग, यादें, अनुपमा सरकार जीवन में अच्छा और बुरा वक़्त हाथ थामे चलता है.. अक्सर परिस्थितियों के अनुसार ही खट्टे मीठे अनुभव भी मिलते हैं.. और यादों में बस जाते हैं.. इन्हीं पलों को पिरोया है अनुपमा सरकार ने अपनी कविताओं “जीवन […]

by November 2, 2017 Hindi Poetry, Recital
धोबन

धोबन

बरसों से वो धोबन मेरे घर आती है गठरी में बंधे कपडे़ इस्त्री को ले जाती है नाम नहीं जानती मैं उसका शायद लाडो हो बचपन में या कोई देवी पर मुझे हमेशा से बेटा कहकर ही बुलाती है आज वो कुछ झुकी सी लगी, आंखें मीची सी पेशानी पर […]

by October 30, 2017 Hindi Poetry

आत्मकथ्य: जयशंकर प्रसाद

जयशंकर प्रसाद जी, छायावाद युग के स्तम्भ कवि माने जाते हैं.. उनकी कामायनी विशुद्ध एहसासों की वैतरणी है.. वे जितना मधुर लिखते थे, उतना ही सारगर्भित भी प्रेमचन्द जी ने जब हंस के आत्मकथा विशेषांक के लिए उनसे कृति भेजने को कहा, तो प्रसाद जी अपने जीवन के सुख दुख, […]

by October 29, 2017 Hindi Poetry, Recital