Hindi Poetry

मेट्रो

मेट्रो

बिजली की रफ्तार से भागती मेट्रो में बैठी थी मैं चुपचाप भीड़ का हिस्सा फिर भी अकेली कुछ कुछ उदास। नज़र घुमाइ मैंने इक बार जानने को औरों का हाल हर चेहरे पर पाई वही शून्यता खालीपन का अहसास। यूं तो हर पल सूकुन ढूंढते हैं हम तथाकथित भोगी दास […]

by March 22, 2014 Hindi Poetry
एक नया दौर

एक नया दौर

यूं ही बेवजह चलती मेरी जिंदगी में कुछ दिन पहले इक नया मोड़ आया खुशियों की बरसात औ सफलता की नयी सीढ़ी भी साथ लाया। जिस पे बस मुझे आंखें बंद कर इक कदम रखना था बिना सोचे समझे छोटा सा संकलप लेना था। आश्वासन थे कि ये इक नया […]

by March 1, 2014 Hindi Poetry