Hindi Poetry

धोबन

धोबन

बरसों से वो धोबन मेरे घर आती है गठरी में बंधे कपडे़ इस्त्री को ले जाती है नाम नहीं जानती मैं उसका शायद लाडो हो बचपन में या कोई देवी पर मुझे हमेशा से बेटा कहकर ही बुलाती है आज वो कुछ झुकी सी लगी बाल भी कम थे सिर […]

by October 28, 2014 Hindi Poetry
तबाही

तबाही

यूं ही बैठे-बैठे ख्याल आया क्या हो गर बर्फ की चादर बिछ जाए उस तारकोल की सड़क पर क्या हो गर वो सूरज भूल जाए रोज़ पूरब से खिलखिलाना चांद न चमके पूनम पर तारों का खो जाए फसाना शिवली झरना छोड़ दे बरगद की दाढ़ी बढ़ना बंद हो जाए […]

by October 28, 2014 Hindi Poetry
डायरी

डायरी

खोले बैठी हूँ आज वो पुरानी डायरी जिसके कोरे सफहों पर कुछ नज़्में लिखी थीं खो गई थी कुछ रोज़ से पूरा बुकरैक छान मारा था मैंने मिल ही नहीं रही थी आज अचानक टेबल की ड्रॉर में मिली शायद कभी वहाँ रख भूल गई थी मैं भी न चीज़ों […]

by October 28, 2014 Hindi Poetry
रावण

रावण

धू-धू करके रावण के पुतले जलने लगे बुद्धिमान इस पर भी सवाल खड़े करने लगे कहते हैं पुतलों से क्या होगा भीतर का रावण मारो कुंभकर्ण तो भाई सगा था विभीषण को गोली मारो सीता ही नहीं थी पतिव्रता मंदोदरी का गुनगान करो राम ने ऐसा क्या किया आज जो […]

by October 3, 2014 Hindi Poetry, Recital
A Poem inspired by a Novel

A Poem inspired by a Novel

Inspiration strikes me in strangest of places. I have just finished an emotionally rocking novel “Out of the Dark” written by Linda Caine and Robin Royston. Though written as a gripping suspense book, it is autobiography of a strong woman Linda Caine, who suffers through severe bouts of depression and […]

by September 1, 2014 Hindi Poetry, Recital
थक गए बादल भी

थक गए बादल भी

थक गए शायद बादल भी उड़ते उड़ते पिघल पिघल धरती पर आ रहे हैं पानी के झीने से परदे की ओट में शर्म से अपना मुंह छुपा रहे हैं। धरा तो है ही स्नेहिल प्रेम भरी नटखट बुलबुलियों को अंक में भर नयी सरगम गा रही है और प्रकृति की […]

by July 13, 2014 Hindi Poetry
पागल चिड़िया

पागल चिड़िया

हल्का नीला आसमां तेज़ी से बढ़ती सुफेद स्याह बदलियाँ कबूतरों की उड़ती पंक्तियाँ पतंगों की उलझती डोरियाँ वेग से झपटती चीलें चलीं छूने ऊंचाईयाँ। शायद बारिश आने वाली है खंभे पर बैठी वो पागल चिड़िया पंख फुला चोंच कटकटा यही चिल्ला रही है या उसे किसी की याद सता रही […]

by July 6, 2014 Hindi Poetry
भीगा

भीगा

भीगा भीगा सा दिन, भागा भागा सा मन ढका ढका आसमां, चले महकी पवन! वो दौड़ा गिल्लू, दिल करे छू लूँ छुपी छुपी मैना, तरसे मेरे नैना भीगा भीगा सा दिन, भागा भागा सा मन! छाए काले मेघा, बिखरे स्वर्णिम छटा छिपा सूरज उनमें, बरसे ये घटा उड़े उड़े बादल, […]

by June 26, 2014 Hindi Poetry