Hindi Poetry

सूफियाना चाँद

सूफियाना चाँद

ज़मीं से आस्मां तक होकर मद में चूर अमावस से पूनम तक बदले कितने रूप और एक है वो सूफियाना चाँद मेरा सोलह कलाएं खुद में समेटे चुपचाप है बैठा 🙂 Anupama

by November 24, 2015 Hindi Poetry
बेचैनी

बेचैनी

जहां भी रहूँ इक नज़र दरीचे से उलझी रहती है उसके आने की आहट अक्सर सुनाई देती है उचककर दहलीज़ तक जाती हूँ और हवा के मासूम मज़ाक से तड़प जाती हूँ सूरज के सीढ़ियां उतरते उतरते उम्मीद भी उनींदी होने लगती है चाँद को तकिया बना तारों से बतियाने […]

by November 24, 2015 Hindi Poetry
सामाजिक न्याय

सामाजिक न्याय

निश्छल आँखें खारे आंसू भोली मुस्कान बिखरे बाल शरारती भवें पसरे हाथ सड़क किनारे पलते उस बचपन को देखकर सीने में हूक सी उठती है कर्मों का लेखा जोखा ईश्वरीय चमत्कार सामाजिक न्याय खोखले से शब्द कलेजे में पिघले शीशे से उतर आते हैं और सोचने लगती हूँ कुछ आरम्भ […]

by November 24, 2015 Hindi Poetry
निराशा के घटक

निराशा के घटक

नन्हीं सी बारिश की बूँद में उफनता समन्दर देखा है कभी ? मिट्टी से सने बीज की कोख में पनपता विशाल पेड़ देखा है कभी ? शहतूत की पत्तियों पर लाचार रेंगता रेशमी कीड़ा देखा है कभी ? साबुन के पानी में निढाल पड़ा रंगीन बुलबुला देखा है कभी ? […]

by November 24, 2015 Hindi Poetry
सर्दियों की शामें

सर्दियों की शामें

सर्दियों की शामें कितनी शर्मीली होती हैं न नरम सूरज के ताप से गुलाबी हुए गाल घने केसुओं की ओट में छिपाए कितनी ख़ामोशी से चाँद के आगोश में पिघल जाती हैं चमकते दमकते सितारों को दामन में काढ़ नई नवेली दुल्हन सी बदलियों की पायल छनकाती रात की दहलीज़ […]

by November 24, 2015 Hindi Poetry
चांदी के फूल

चांदी के फूल

चांदी के फूल देखे हैं कभी सब्ज़ शाखों पे रोएंदार लफ्ज़ों में लिपटे नगमा गा रहे थे मेरी झलक पे शरमा गए दूर जा छिपे हैं डूबते सूरज के आगोश में सर्दियों में शामें कुछ शर्मीली होती हैं न ! Anupama

by November 24, 2015 Hindi Poetry
शीत की प्रेयसी

शीत की प्रेयसी

ओढ़ चुनर तारों की बांध पैंजनी पत्तों की हौले हौले निशा चली चाँद का साया गहरा सा बादलोँ का जत्था ठहरा सा शिवली महकी महकी सी गुलबिया बहकी बहकी सी चमेलिया करती कानाफूसी गेंदे की भी कली खिली मद्धम मद्धम हवा चली शीत की प्रेयसी हौले से मेरे आँगन ठुमक […]

by November 24, 2015 Hindi Poetry
कोरा कागज़

कोरा कागज़

मेरी किस्मत तो तूने बड़े चाव से लिखी थी पर अफसोस तेरी कलम में स्याही नहीं थी तू लिखता गया यूं ही मिटता गया जीवन का कागज़ तो कोरा गया ये बिखरे से सपने वो अनलिखे पन्ने ये बेरंग तस्वीरें वो रूठी तकदीरें मुझको तो बस यही हासिल रहा रूई […]

by October 30, 2014 Hindi Poetry