Hindi Poetry

प्रमाद

प्रमाद

पक्ष विपक्ष तर्क वितर्क के तराजू में भाव हल्के पड़ते जाते हैं जर्जर होते तन और क्षीण पड़ते मन के उद्गार कंठ में सिमटे रह जाते हैं मंथर बुद्धि क्षिथिल धड़कन कांपते हाथ फिसलते पांव बढ़ती आयु के ही परिचायक नहीं कहीं भीतर, गहरे, बहुत गहरे रिसते घावों की टीस […]

by March 4, 2018 Hindi Poetry
Batashe sa Chaand

Batashe sa Chaand

by February 23, 2018 Hindi Poetry
My Poems on YQ

My Poems on YQ

by February 16, 2018 Hindi Poetry
भेड़ें

भेड़ें

मिमियाती भेड़ें लीक पर चलती इक दूजे से टकराती भेड़ें बाड़े की सुरक्षा घास पानी को ललचाती भेड़ें सालों की दहशत यादों की गर्त में खौफज़दा गिड़गिड़ाती भेड़ें सालों पहले हवा में डंडा लहराया था मेमने का दिल घबराया था बाड़ा टूटने न पाए लकीर छूटने न पाए गडरिए ने […]

by February 12, 2018 Hindi Poetry
काफ्का और मैं

काफ्का और मैं

हवा में हल्की सी ठंडक, उनींदी अंखियां और खिड़की से छनकर आती धूपिली गोलियां अंगड़ाई लेते हुए बिस्तर से उठने की कोशिश में यकायक धरती डोलती महसूस हुई भूकम्प! सोचते ही नस नस झनझना उठी पर नहीं, आसपास नज़र दौड़ाई मैं बिस्तर पर नहीं, ट्रेन में थी शीशे के पार, […]

by February 6, 2018 Hindi Poetry
प्रेमी

प्रेमी

तुम शिद्दत से ढूंढ़ते रहे वो इंसान जो मेरे होंठों पर मुस्कान और आंखों में चमक ले आता है तुमने मेरे आसपास के लोगों को टटोला जानना चाहा कि कौन, कब, किस तरह मेरी छोटी सी ज़िन्दगी में घुसपैठ बनाए है कहां से छलकता है वो अमृत जिसके घूंट भर […]

by February 5, 2018 Hindi Poetry
प्रेम

प्रेम

पुरुष का दंभ उसके प्रेम पर हावी रहता है आकर्षण, निवेदन, स्वीकृति, मिलन सहज सोपान से दिखते हैं एक के बाद दूसरा अवश्यंभावी और पूर्ण होते ही विचलन.. स्त्री की कोमलता उसके प्रेम पर हावी रहती है लज्जा, संकुचन, स्वीकृति, मिलन पर्वतारोहण से दिखते हैं एक के बाद दूसरा कठिन […]

by February 3, 2018 Hindi Poetry
आवाज़

आवाज़

आधा जीवन बीत जाने के बाद अचानक एक कुलबुलाहट व्यक्ति, परिस्थिति, कारण स्पष्ट याद नहीं पर धीमे धीमे उभरती ये आवाज़ अंतर्मन की कोठरियों से टकरा जिह्वा के दंश से हो घायल होने और न होने के बीच मृत्यु के द्वार तक लकीर खींच सरपट भागती देह को जकड़ लेती […]

by January 28, 2018 Hindi Poetry