Hindi Poetry

जुस्तजू

जुस्तजू

उफक छूने की अब हसरत न रही टूटते तारों में वजूद ढूंढता है कोई? फलक पर चांद की जुस्तजू न रही नाज़ुक जुगनुओं से खेलता है कोई? हाथों से फिसलती रेत सा वक्त चाहकर भी रोक पाया है कोई?अनुपमा सरकार

by October 30, 2019 Hindi Poetry
सनम

सनम

हौले से मैना मुस्काई कोयल भी ज़रा सी शर्माई तितली भंवरे फूलों से कहें आ फागुन के गीत हम मिलके बुनें आमों की कच्ची कलियां चुनें सेमल की पत्तियों को हम गिनें वो उड़ती चीलें अलबेली वो डरती सहमी गिलहरी हाथों में हाथ जो थाम लें हम छोड़ें न साथ […]

by October 28, 2019 Hindi Poetry
My Hindi Poems on Mirakee

My Hindi Poems on Mirakee

     

by May 7, 2019 Hindi Poetry
मेरी पहली कविता

मेरी पहली कविता

शब्द और रंग, कविता और चित्र.. पूरक हैं इक दूजे के.. भाव उमड़े, कैनवस पर बहे और सज चले.. लगभग साढ़े चार साल पहले हिंदी में पहली कविता लिखी थी.. जाने कैसे ये पंक्तियां मन में अटक गईं थीं, ध्यान हटता ही न था इनसे “यहां की ज़मीं, यहां का […]

by July 31, 2018 Hindi Poetry
इंसानियत

इंसानियत

अखबार नहीं पढ़ती अब पोर जलते हैं मेरे समाचार नहीं देखती मन हुलसता है पर चली आती हैं गर्म हवाएं दिल जलाती, आत्मा कचोटती पक्ष प्रतिपक्ष निर्धारित करती इंसानियत अपने ही पांव पर कुल्हाडा मार दूसरों के ज़ख्म पर नमक मलती चुप हो गई हूं, नहीं जानती मैं गलत हूं […]

by April 14, 2018 Hindi Poetry
देह

देह

प्रकृति बन पौरुष सहर्ष स्वीकारती तुम सभ्यता के उत्थान में योगदान देती तुम स्वयं से पहले, परिवार, समाज को पूजती तुम सदियों से बर्बरता झेल, कोमल ह्रदय सहेजती तुम कुछ न समझा तुमने जानते बूझते आंखें मूंदे रही तुम्हें आभास भी न हुआ हर जगह, हर समय तुम केवल देह […]

by April 12, 2018 Hindi Poetry
नाटक

नाटक

भूलना हो तो इतना याद करो कि वो अहसास नहीं अभ्यास बन जाए वास्तविक अनुभव नहीं आभास बन जाए पल पल रटा गया नाम अस्तित्व खो बैठता है क्षण क्षण झलकता प्रतिबिंब निर्जीव हो उठता है मूर्तियां गढ़ दो, आदर्श खो जायेंगे सूक्तियां रच दो, सूत्र मिट जाएंगे बांधो काल्पनिक […]

by March 29, 2018 Hindi Poetry
तहें

तहें

by March 16, 2018 Hindi Poetry