Fursat ke Pal

फुर्सत के पल : 11

फुर्सत के पल : 11

फागुन का चांद धीमे-धीमे गहराती शाम। थका-मांदा सूरज दिन भर की चमक-दमक के बाद अपनी आभा खुद में समेटे,अपनी प्रेयसी संध्या के कांधे पर हाथ डाले आकाश रथ से क्षितिज की ओर अग्रसर हो चला है। होली का दिन था न आज, मस्ती भरा। इंद्रधनुषी थी उसकी सुबह, लाल-पीले-नीले-जामुनी रंगों […]

by May 14, 2016 Fiction, Fursat ke Pal
फुर्सत के पल : 10

फुर्सत के पल : 10

यूँ ही चली जा रही थी, गरम तारकोल की सड़क पर। चिलचिलाती धूप, हील की खटखट, आसपास गाडि़यों का शोर और इन सबके बीच खुद को सजीव घोषित करती मैं, अपनी सुनियंत्रित भावभंगिमा को चेहरे पर चिपकाए। शायद उतनी ही पाषाण जितना मील का पत्थर, और उतनी ही सजग जितना […]

by May 11, 2016 Fiction, Fursat ke Pal
शुभ प्रभात ज़िन्दगी

शुभ प्रभात ज़िन्दगी

चंचल रात उनींदी अँखियों से काजल पोंछते धीमे धीमे विदा हो रही है …. आसमान के आगोश में दूज का चाँद उबासियां ले रहा है …. हवाओं संग अठखेलियां करते थके मांदे हरसिंगार …. नारंगी पांवों को हौले से ज़मीं पे टिका नींद के हिंडोले में ऊंघ रहे हैं … […]

by May 11, 2016 Fiction, Fursat ke Pal
कराह

कराह

अगर नदी बोल पाती तो शायद कराह उठती, अपने बंटते किनारों की किस्मत पर। आंसू बहाती उन शैतानों के अलगाववादी इरादों पर, जो इस पार और उस पार में इंसानियत भूल जाते हैं। कोसती उस पल को जब राम नदी पार वन चले जाते हैं, मानवता को मझधार में छोड […]

by May 10, 2016 Fiction, Fursat ke Pal
नीरवता

नीरवता

मायूसियों का धुँआ चाँद को छिपा सकता है.. बुझा नहीं सकता… रेतीली आंधियां पल भर को दिशा भ्रमित कर सकती हैं.. जीवन भर के लिये भटका नहीं सकतीं… नीरसता उदास काँटों सी कचोट भले ले… गुलाबों की महक छीन नहीं सकती… मानव मन की जिजीविषा अमर है और रहेगी… क्षणभंगुर […]

मनपंछी

मनपंछी

मनपंछी प्रातःकाल के सूर्य को देखकर जगता है… कड़ी धूप में अपनी परछाईं में शीतलता खोजता है… साँझ ढले घड़ी भर सांस ले.. अटारी से उतरते सूरज को देख मायूस होने लगता है… कि शर्मीला सा चाँद आँगन में खिल आता है… और मनचकोर चांदनी की अठखेलियों में फिर से […]

उमस

उमस

सुनहला सूरज अपने सातों घोड़ों संग सुबह से ड्योढ़ी पे आस लगाये बैठा है …. चीलों की सीटियां …. गिलहरी की टिकटिक … मैना की कैं कैं सुनके भी अनसुना करता शांत भाव से मुस्कुराता हुआ हामी की इंतज़ार करता … कि कब बदलियों का इशारा हो और .. ओस […]

by May 8, 2016 Fiction, Fursat ke Pal
ये मन

ये मन

कभी-कभी अनजाने ही आप कुछ लोगों के बेहद करीब आ जाते हैं। खास जगह बन जाती है उनकी आपकी ज़िंदगी में। और कभी बस यूं ही किसी से इतने परेशान कि सामने आना दूर की बात, समय-असमय हुआ टकराव भी चुभने लगता है। किस पर मढ़ें दोष? उन अदृश्य तरंगों […]

by May 8, 2016 Fursat ke Pal