Fursat ke Pal

गीत

गीत

कुछ दिन पहले रेडियो पर मधुबाला जी के गीत सुन रही थी। बीच बीच में रेडियो जॉकी उनके जीवन की कुछ खट्टी मीठी सच्चाइयों से भी वाकिफ़ करवा रहे थे। सुनकर बेहद आश्चर्य हुआ कि इतनी मनमोहक मुस्कान, खूबसूरत चेहरे और बेहतरीन कला की मालकिन दरअसल अपने जीवन में एक […]

by June 12, 2016 Fursat ke Pal
भाषा का भाव

भाषा का भाव

अक्सर भावों को भाषा में ढालने का प्रयास करती हूँ पर आज भाषा का भाव समझने का मन हुआ। वैसे बचपन से ही भाषाओं की रंगबिरंगी दुनिया मुझे गणित और भूगोल की तिरछी गलियों से कहीं ज़्यादा भाती थी। बेहद सजग होती थी शब्दों के सही इस्तेमाल को लेकर। शायद […]

by June 11, 2016 Fursat ke Pal
ये सुबह प्यारी है

ये सुबह प्यारी है

सुबह के पांच बजते बजते, 10 बाय 10 के कमरे की कृत्रिम हवा बासी लगने लगी है… पलकें भारी हैं.. नींद अपना आधिपत्य त्यागने को तैयार नहीं.. पर मन भर चुका…सोच की दो बूँद और.. और बस छलक जाएगा.. मैं करवटें बदलती हूँ… पंछियों के चहचहाने की आवाज़ें सुनाई दे […]

by May 29, 2016 Fiction, Fursat ke Pal
व्यस्त हूँ

व्यस्त हूँ

व्यस्त हूँ, रहना चाहती हूँ…हर पल, हर घड़ी….फाइलों के ढेर में सिर झुकाए बैठी हूँ …..कंप्यूटर पर, बिन आवाज़ दौड़ती उँगलियाँ, शब्दों के आढ़े तिरछे रेखाचित्र उभार रहीं हैं…गर्म चाय का घूँट भरती हूँ…बेख्याली में बिस्किट का छोटा सा टुकड़ा देर तक कप में डूबा रहता है….वो कब ठोस से […]

by May 25, 2016 Fiction, Fursat ke Pal
सागर किनारे

सागर किनारे

सागर किनारे पाँव पाँव चलने का मन है आज… चांदनी रात में नहीँ बल्कि सिखर दुपहरे…. जब हर कोना सूरज की गर्मी से तप रहा हो… दूर दूर तक केवल सुनहली धूप हो…आँखों में चमचमाती किरणें….चेहरे पे पसीने की बूँदें…और मन में नव दिवस की उमंगें… भरपूर जीना है ये […]

by May 23, 2016 Fiction, Fursat ke Pal
वक्र चाल

वक्र चाल

दोपहर के दो बजे, थके मांदे परिंदे पेड़ों की ऊंची डालियाँ छोड़, नन्ही झाड़ियों में छाँव तलाश रहे हैं… आम के पेड़ पर कच्चे फल अनमने से हैं… गर्मी से उनकी खट्टास का आदान प्रदान जारी है… बोझिल पत्ते हौले हौले मंत्रजाप कर रहे हैं… घरों के दरवाज़े खिड़कियां असहनीय […]

by May 18, 2016 Fiction, Fursat ke Pal, Nano fiction
दिल दहल गया आज

दिल दहल गया आज

दिल दहल गया आज बुदबुदाते होंठों से जाने कौन से शब्द उकेरता, वो लगातार उसे घूरे जा रहा था। हाथ में पत्थर लिए आक्रामक मुद्रा में उसका सिर फोड़ने को बिल्कुल तैयार। निरीह जानवर टकटकी बांधे उसे देखता, इस बात से बिल्कुल अनजान कि वो इंसान विश्वास पात्र नहीं। उस […]

by May 17, 2016 Fiction, Fursat ke Pal
तुलसी-गुलाब

तुलसी-गुलाब

मेरे आंगन में गुलाब और तुलसी का पौधा बिल्कुल सटे से हैं। बीते बरस साथ ही खरीदा था उन्हें, बित्ते भर की तुलसी, हाथ भर का गुलाब। दोनों में खूब छनती थी। हवाएँ एक सा असर करतीं। जब देखो, साथ में गुनगुनाते से दिखते थे। खाद-पानी पाकर तुलसी खूब फलने […]

by May 16, 2016 Fiction, Fursat ke Pal