Fursat ke Pal

गुरु

गुरु

पहले गुरु का केवल सम्मान करती थी.. उन की प्रतिभा को नमन कर.. एक निश्चित दूरी बनाए रखने की भरसक कोशिश होती थी.. कई पूर्वाग्रह थे मन में.. कुछ नियम.. सलीके.. जो मुझे उनके समकक्ष खड़े होने की अनुमति प्रदान नहीं करते थे.. अब थोडा बदल गई हूँ… ज़िंदगी को […]

by July 19, 2018 Articles, Fursat ke Pal
जंगल बैबलर्स

जंगल बैबलर्स

“दो कानों में एक सर कर देना है तेरा” वो आंखें दिखाकर कहतीं और मैं फ्राक का सिरा मुंह में डाल चुपचाप बैठ जाती, टुकुर टुकुर दीदी को देखती और उनके होंठों पर मुस्कान की झलक देख जोर से खिलखिला उठती। मामीजी भी उस हंसी में हमारे साथ शामिल हो […]

by May 2, 2018 Fursat ke Pal
गर्मियां

गर्मियां

कहने को तो अभी मार्च ही चल रहा है, पर दिल्ली की गरम सनसनाती हवा और चौंधियाता सूरज, मुझे बचपन की मई जून वाली छुट्टियां याद दिला रहे हैं…लू के थपेड़े, स्कूल से निजात दिलाते और नंदन, चंपक के सुनहरे दिन बरबस चले आते… होमवर्क करने का ख्याल तो मुझे […]

by March 30, 2018 Articles, Fiction, Fursat ke Pal
बगूला

बगूला

यादों का बगूला अक्सर मन को बहा ले जाता है… स्मृतियों की संकरी गलियों में सूरज कभी डूबता भी तो नहीं… हर मोड़ पर इक लम्हा ठहरा मिलता है, उसी जगमग, उसी कश्मकश, उसी उदासी, उसी खुशी में सराबोर… जैसे जीवन वहीं थमा है अब भी, वहीं उसी मोड़ पर.. […]

by March 3, 2018 Fursat ke Pal
सफर

सफर

सड़क पर अपनी धुन में खोए, पत्तियां तोड़ते हुए चलने वाले, अजब दुनिया के लगते मुझे.. कई बार गुस्से में देखती उन्हें, अपनी बस में कोने की सीट पर बैठे… उस स्टॉप पर बस देर तक रुकती थी, उन दिनों प्राइवेट जो हुआ करतीं थीं… ठसाठस भरे बिना, जगह से […]

by January 23, 2018 Fursat ke Pal
प्यार या परवाह

प्यार या परवाह

कुछ समय पहले Forrest Gump देखी थी, टॉम हैंक्स जो भी किरदार निभाते हैं, इतनी शिद्दत से उसे स्क्रीन पर उतारते हैं कि आप कहानी को सच समझ बैठें, और उस किरदार के साथ आने वाली परेशानियों और खुशियों में शामिल हो जाएं.. बस यही हाल मेरा था, जब जब […]

by January 16, 2018 Fursat ke Pal, Kuch Panne
सितारों की पालकी

सितारों की पालकी

काश किसी रोज़ बादलों की मखमली चादर ओढे़ देर तक सोती रहती। सूरज अपनी चिलमिलाती धूप को बरगद की छांव में छिपा कर, दबे पांव किरणों का इंद्रधनुष अपनी हथेलियों में समेटे, मेरे करीब आता। गुलाब की पंखुडियां नशीली हवा में झूमती, हौले से पांवों में गुदगुदी करतीं। ओस की […]

by December 10, 2017 Fursat ke Pal, Kuch Panne
सर्दियों की इक सुबह

सर्दियों की इक सुबह

सर्दियों की सुबह, धुंध का घूंघट औढ़े, शर्माती नवयौवना सी, धीमे धीमे मेरे आंगन में उतर आती है.. हवा में हल्की ठंडक है.. शाल को कसकर लपेट लेती हूं.. मुंह से धुआं छोड़ने का प्रयास अभी कामयाब होता नहीं दिखता.. पर बाहों पर उभरते रोंगटे अहसास दिलाते हैं कि गुलाबी […]

by November 21, 2017 Fursat ke Pal