Editors Desk

कहानियां

कहानियां

टैगोर की कहानियां जब भी पढ़ीं, लगा वे कहानी नहीं, एक पूरी दुनिया रचते हैं.. किरदार, आसपास का वातावरण, उसके संस्कार और क्रियाकलाप, सबका एक विस्तृत फलक.. शायद इसीलिए मुझे उनकी कहानियां अक्सर छोटे छोटे नाटक लगे, जिन्हें स्क्रीनप्ले में बखूबी ढाला जा सकता है… शरतचन्द्र की कहानियां, अलग ही […]

by December 12, 2017 Articles, Editors Desk
Books I Read in 2017

Books I Read in 2017

Time has an uncanny ability to adjust according to your mood. When you are feeling elated, it flies; and when you are feeling pensive, it gets stuck! Well, Time is personal. It mirrors your mood. And I think same goes for books. The ones you want to read desperately because […]

by December 10, 2017 Articles, Editors Desk
निराला: संध्या सुंदरी

निराला: संध्या सुंदरी

हिंदी काव्य प्रेमियों के लिए सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, किसी परिचय के मोहताज नहीं…. छायावाद के स्तम्भ कवि, अपनी श्रेष्ठ प्रकृति कविताओं और अनूठी उपमाओं के लिए जाने जाते हैं.. उन्हें पढ़ना सुखद अनुभूति है… अनायास ही प्रेम हो जाता है उनके लयमय छंदों से.. हृदय वीणा सुमधुर बज उठती है […]

by October 23, 2017 Articles, Editors Desk, Hindi Poetry
2017 : The Beginning

2017 : The Beginning

One more leaf is turned, with the stroke of twelve at midnight, 2017 rolled out on a happy note. Re-connecting and reconciliation may be theme of the year, as it began in a slow yet content tone. May be it is time to put the past behind, forgive and forget […]

by January 1, 2017 Articles, Editors Desk
2016 जाते जाते

2016 जाते जाते

ऊबड़खाबड़ राहों पर बेतहाशा भागते-दौड़ते.. अतिसंवेदनशीलता और संवेदनहीनता के बीच गिरते-संभलते.. स्वयं से प्रेम और घृणा के सोपान तोड़ते-मरोड़ते बीता ये 2016… 2016 ने कुछ इस तरह पटका कि बिखरने, पिघलने, सिमटने के सारे अंतर फ़ना हो गये… अपने सबसे अच्छे और बुरे रूपों का साक्ष्य, एक साथ होना, आपकी […]

by December 31, 2016 Editors Desk
2016 : The Beginning

2016 : The Beginning

I have never bothered about time, date or specific events. In fact, I always considered myself a drifter, who believes in living lazily, taking things in stride, letting them unfold on their own. Though, I dream a lot, plan even more but when it comes to execution, I would just […]

by January 1, 2016 Editors Desk

Poems by Gopal Singh Nepali

आज गोपाल सिंह नेपाली जी की कुछ कविताएँ पढ़ीं। कुछ देशभक्ति से ओत प्रोत मन में नया उत्साह भरने वाली थीं तो कुछ कोमलता से बेटियों के पराया होने की व्यथा सुनातीं। हिमालय के प्रति गर्व भी दिखा उनकी कविताओं में तो राजनीति के झूठे समीकरणों में न उलझने का […]

by August 15, 2014 Editors Desk, Review
Hindi Poetry

Hindi Poetry

आजकल हमारे Emotions की भाषा कुछ बदल गई। अब तो English वाले Thoughts भी हिंदी में आने लगे। यूं तो हिंदी हमारी मातृभाषा है पर English से भी पुराना नाता है। तो सोचा एक से भले दो, क्यों न दोनों का ही Use करें कभी हिंदी में कविता कभी English […]

by March 21, 2014 Editors Desk