Articles by: Anupama Sarkar

Is Love Enough Sir, Movie Review

Is Love Enough/ Sir एक और मूवी जो हटकर है, बॉलीवुड की मसाला भीड़ से, अंधाधुंध दौड़ से, चींखते शोर से! पर देखते हुए सोचती रही, सचमुच अलग है क्या? मुझे तो नेपथ्य में उत्पल दत्त की आवाज़ गूंजती सी महसूस हुई “अवनीश बेटा! हम ने रत्ना को तुम्हारे लिए […]

by May 31, 2021 Review
वो वक़्त कुछ और था

वो वक़्त कुछ और था

वो वक़्त कुछ और था ज़मीं के बाशिंदें नहीं थे ये बालिश्त भर ऊंची सब्ज़ शाखों पे सुर्ख फूलों के बीच सरसराते थेे नशीली हवा की चुहलबाज़ी परिंदों की दिलकश हंसी और ओस की बूंदों में नहाई नई नवेली सुबह आह ! वो वक़्त ही कुछ और था माहौल में […]

by May 25, 2021 Hindi Poetry
महामारी या मारामारी

महामारी या मारामारी

सोचा था, जब तक तन और मन दुरुस्त न हो जाए, लिखना avoid करूंगी। पर पिछले कुछ दिन इतना अवसाद, निराशा और चिंता में गुज़रे हैं कि बिना लिखे, मेरा बीपी कंट्रोल होगा नहीं, आखिर इतनी कड़वाहट और गुस्सा लिए, कोई जिए भी तो कैसे? बीमारी को महामारी और महामारी […]

by May 25, 2021 Articles
Ayurved Allopathy and Corona

Ayurved Allopathy and Corona

कल बहुत वक्त बाद आज तक का वीडियो देखा, बहस चल रही थी बाबा रामदेव और आईएमए के डॉक्टर राजन और डॉक्टर लेले के बीच… स्वस्थ और अच्छी डिबेट होती, आयुर्वेद और एलोपैथी के बीच, तो शायद पूरा देखती! पर अफसोस योग और आयुर्वेद के जिस रूप को रामदेव प्रमोट […]

by May 25, 2021 Articles
Sons and Lovers, D H Lawrence

Sons and Lovers, D H Lawrence

Sons and Lovers, I read this book almost two years ago. But didn’t write anything about it, a rarity with me, as the book had left me with mixed emotions. I wondered how could I like and dislike something in equal proportions? The Morel family, completely dysfunctional, with a dominant […]

by January 14, 2021 Review
Prem ki Biradari, Parsai

Prem ki Biradari, Parsai

It’s heartwarming to listen to stories. Bed time stories, moral stories, dramatic, fiction, fantasy, memoirs, travels and satires. Wherever you look, there is a story. Even poetry is a form of story and so are the captions and headlines. As we are bombarded by stories all around. At times, it’s […]

by January 5, 2021 Fiction
नवजीवन

नवजीवन

मेरे शब्द मेरे साथ पर अनुपमा सरकार की कविता “नवजीवन” At advent of 2021, Anupama Sarkar welcomes the New Year with an ode to humanity and new life in her poem Navjeevan नन्हीं सी बारिश की बूँद में उफनता समन्दर देखा है कभी ? मिट्टी सने बीज की कोख में […]

by January 3, 2021 Hindi Poetry, Recital

Chhalaang, Movie

कुछ फिल्में अपने डायलॉग से जानी जाती हैं तो कुछ के डायलॉग ही मूवी की कहानी बयां कर देते हैं… “चौड़ भी न औकात देखकर रखनी चाहिए… 70 का बन्दा, 150 किलो की रखेगा तो बोझ से दबेगा ही” 🙄🙄 अजब सी है न लाइन और अब इसे इमेजिन कीजिए […]

by November 22, 2020 Review