Articles by: Anupama Sarkar

हिंदी मूवीज़

हिंदी मूवीज़

पिछले दो दिन में चार मूवीज़ देखीं… पति पत्नी और वो (कार्तिक आर्यन के खातिर 🙃 हालांकि काफ़ी बोर किया मूवी ने, पर पूरी देख ही ली) … मोतीचूर चकनाचूर, नवाज़ुद्दीन के कारण देखनी शुरु की थी, पर इतना हमाए तुमाए, हमारे से पचाया नहीं गया, सो छोड़ दी… स्टूडेंट […]

by February 22, 2020 Articles

जवाब

कितना कुछ है कहने को पर शब्द नहीं कितना कुछ है करने को पर मन नहीं कितना कुछ अनकहा अबूझा सुख दुख से परे जीवन के फेर में सब सब अटका उलझा कुछ जवाब सवालों से ज़्यादा हैरां जो करते हैं… अनुपमा सरकार

by February 22, 2020 Hindi Poetry
उजड़ा चमन

उजड़ा चमन

“ज़माना दिलों की बात करता है, पर मुहब्बत आज भी चेहरों से शुरु होती है” “उजड़ा चमन” का ये डायलॉग सुनने में शायद घिसा पिटा लगे पर सच्चा है… गंजे हीरो और मोटी हीरोइन को लेकर बनी ये फिल्म शायद सिर्फ cliche लगे… पर ये कहानी सच्ची लगती है, कहीं […]

by December 28, 2019 Articles, Review
दुख का नमक, कविता

दुख का नमक, कविता

प्रेम अविरल धारा है… ऐसा कोमल अहसास, जो कठोर हृदय को मोम सा पिघला दे… जब प्रेम भाव उमड़े तो स्त्री गुण ही हावी होते हैं मन में… पुरुष भी प्रेम में उतना ही संवेदनशील और कोमल हो उठता है,जितनी कि नारी… तो फिर स्त्री मन तो पहले ही इतना […]

by November 20, 2019 Articles
तोड़ दो, कविता पाठ

तोड़ दो, कविता पाठ

स्त्री को देवी मानने वाले हमारे देश में आए दिन हत्या और बलात्कार की खबरें सुनने को मिलती हैं… बात भ्रूण हत्या की हो, दहेज के नाम पर ज़ुर्म ढाने की हो, परम्पराओं के नाम पर बेड़ियां पहनाने की हो या बलात्कार जैसे जघन्य अपराध की… लंबी चौड़ी फ़ेहरिस्त है […]

by November 15, 2019 Recital
स्त्री शक्ति, समालोचना, संतोष पटेल

स्त्री शक्ति, समालोचना, संतोष पटेल

कुछ समय पहले यूट्यूब पर एक कविता पढ़ी थी “स्त्री शक्ति”… संतोष पटेल जी ने इस कविता को न केवल सुना और पढ़ा, बल्कि उसकी विवेचना और समीक्षा करते हुए, कविता ही नहीं, काव्य कर्म से जुड़े कई पहलुओं पर भी बहुत ही सूक्ष्मता से अपने विचार प्रकट किए हैं… […]

by November 9, 2019 Articles
अबोध

अबोध

यूट्यूब पर अपनी एक कविता पढ़ी थी ‘अबोध’… अभी देखा तो संतोष पटेल जी ने उस रचना की समालोचना अपनी वॉल पर शेयर की है… अच्छा लगा और आप सबके साथ बांटने का मन हुआ 🙂 “अनुपमा सरकार की कविता ‘अबोध‘ -संतोष पटेल अनुपमा सरकार की ‘अबोध’ कविता केवल भाव […]

by November 9, 2019 Articles
मेरी दिल्ली

समाजवाद, ज़रा हटके

जाते हुए बैट्री रिक्शा गलत लेन में था, कार वाले ने डांट पिलाई, गाड़ी क्यों बीच में अटका रखी है… रिक्शे वाला खुद में सिमट गया… आते हुए एक कार वाले ने फोन पर बात करने के चक्कर में गाड़ी गलत जगह खड़ी करके रास्ता रोक रखा था, अबकि बैटरी […]

by November 9, 2019 Articles, Fiction