Articles by: Anupama Sarkar

Mimi, Hindi Movie

Mimi, Hindi Movie

नेटफ्लिक्स पर अभी अभी रिलीज़ हुई मूवी, जिसका नाम अपीलिंग था, Mimi (मिमी) कल देखने बैठी। शुरुआत हुई, उत्तर प्रदेश के किसी शहर से, जहां गर्भवती औरतें, उदास और गमगीन माहौल में नज़र आ रही थीं, कुछ बच्चे, आधे कपड़ों और पूरे जोश में खेलते और एक आदमी, उटपटांग अंग्रेज़ी […]

by July 29, 2021 Review
Queen of Spades, Pushkin

Queen of Spades, Pushkin

The Queen of Spades by Pushkin, a short story that I chanced upon while surfing aimlessly. Misguided concentration is one of the perils of continuous easy access to net. One tends to forget what he set out to do and ends up discovering what is recommended by Google 😰 But […]

by July 16, 2021 Review
Ray, Netflix

Ray, Netflix

Ray: सत्यजीत रे की कुछ कहानियां पढ़ी थीं, फिर छोड़ दीं। कुछ बहुत अच्छी लगीं कुछ एकदम असंभव, पर एक बात जो कॉमन थी, वो ये कि हटकर थीं, सामान्य सोच समझ से परे, कल्पना के चरखे पर तिलिस्म कातते हुए! सो जब मालूम हुआ कि नेटफ्लिस पर Ray सिरीज़ […]

by July 10, 2021 Review
मेरी दिल्ली

Music Teacher, Movie Review

Music Teacher, मैंने न देखी होती अगर Ajeeb Daastaans न देखती! नेटफ्लिक्स अक्सर आपको बांधने के चक्कर में एक ही जॉनर और एक्टर की मूवी रिकमेंड करता चलता है और इसी क्रम में मैं फिर से टकरा गई मानव कौल से! जी, यह मूवी पूरी तरह उन्हीं की है, उनके […]

by June 15, 2021 Review

कस्बे का आदमी, कमलेश्वर

कमलेश्वर की कहानी “कस्बे का आदमी” अभी अभी पढ़ी। छोटे महराज और उनके तोते संतू की कहानी… एक छोटे से कस्बे में रहने वाले, बचपन में ही अनाथ हो, घर द्वार लुटा देने वाले की कहानी! दो पात्र, शिवराज और छोटे महराज, एक ही गली के दो बाशिंदे,और इनके जरिए […]

by June 12, 2021 Articles
कविता की खोज

कविता की खोज

व्यग्र हो ढूंढते हैं वे कविता शब्दों को छांटते हुए बिंबों को छानते हुए सधे परिमाणों बंधे प्रमाणों तंग खांचों में भावों को ढालते हुए… शब्द शब्द की विवेचना अर्थ अनर्थ की विभेदना तुष्ट कर नहीं पाती भावना की आलोचना हो भी क्योंकर पाती! उलटते पलटते पृष्ठों को वे ढूंढ […]

by June 11, 2021 Hindi Poetry
तमाशबीन

तमाशबीन

किताबों में पढ़ती थी कि भारत को सपेरों का देश कहा जाता था। हैरानी होती कि क्यों भला, लगता कि खिल्ली उड़ाई जाती रही हमारी, नीचा दिखाने की साज़िश, शायद कहने वालों की मंशा थी भी यही। पर सवाल उठता है कि उन्हें यह कहने का हौंसला हुआ क्यूंकर? कुछ […]

by June 5, 2021 Articles
Ajeeb Daastaans, Hindi Movie

Ajeeb Daastaans, Hindi Movie

बिना एक शब्द बोले, आंखों से सब कह देना, ऐसी एक्टिंग देखे अरसा बीता… Ajeeb Daastaans नाम के अनुरूप ही है, एकदम अजीब, पर फिर भी कुछ था जिसने बांधे रखा… वरना सबसे अच्छी कहानी मिस कर बैठती ‘अनकही ‘ मानव और शेफाली की कहानी, बातों को आंखों से, चेहरे […]

by June 4, 2021 Review