Articles by: Anupama Sarkar

आपका बंटी, मन्नू भंडारी

आपका बंटी, मन्नू भंडारी

एक छोटा सा बच्चा बंटी, शायद 9 साल का.. माता पिता एक दूजे से अलग रहते हैं.. वह ममी के साथ रहता है, उन्हीं के लिए जीता है, आखिर उसके मन में ठूंस ठूंस कर भर जो दिया गया है कि राजा बेटा वही जो मां के लिए कुछ भी […]

by August 11, 2019 Review
A Game of Thrones, George RR Martin, Book 1

A Game of Thrones, George RR Martin, Book 1

A Game of Thrones by George R. R. Martin is the first book in the Song of Ice and Fire Series, I read recently. However, before I purchased the books, I watched the entire HBO Original Series of the same name i.e. Game of Thrones. It is one of the […]

by August 7, 2019 Review
यह कहानी नहीं, अमृता प्रीतम

यह कहानी नहीं, अमृता प्रीतम

कभी अचानक आप कुछ ऐसा पढ़ बैठते हैं कि मन के किसी कोने से आवाज़ आती है कि कैसे लिखा होगा उसने ये सब.. क्या सिर्फ मलाल, क्या सिर्फ याद, क्या सिर्फ पछतावा या फिर बस ज़िंदगी! बात कर रही हूं अमृता प्रीतम की लिखी “यह कहानी नहीं” की.. जी, […]

by August 6, 2019 Review
Love is Hell

Love is Hell

हमारी कंट्री में दो लोगों के साथ होने के फैसले से इतने लोग व्यथित, पतित, ग्रसित हो जाते हैं, कि नो वंडर, तीन चौथाई आबादी, चुपचाप परिवार की मर्ज़ी से शादी करके, ताउम्र, दूसरों की ज़िंदगी में एक्साइटमेंट तलाशती फिरती है.. किसका किस से चक्कर, किसका किस से झगड़ा, किसने […]

by July 13, 2019 Articles
किंडल बुक्स

किंडल बुक्स

बचपन से ही चाव रहा पढ़ने का.. मम्मी की लाई कॉमिक्स हों, नन्दन, चंपक, सुमन सौरभ हो या कादम्बिनी और सोवियत नारी.. हर बार कुछ नया ढूंढ लेता था मन और मैं भाव विभोर हो उन कहानियों को अपने दोस्तों को जस का तस सुनाने बैठ जाती.. तब किसने लिखी, […]

by July 11, 2019 Articles
फ़ुर्सत के पल, अनुपमा सरकार

फ़ुर्सत के पल, अनुपमा सरकार

एक दिन, जिसकी शुरुआत भागदौड़ और ऊहापोह से हो, वो जब ढलते ढलते, इतना मधुर हो जाए तो मन अनायास कह उठता है कि “ओ सूरज, तेरी अगन से परे एक दुनिया और है, जहां बादलों के कारवां, शीतल छांह लिए आते हैं” ज़िंदगी के छोटे मोटे मसले, और उनसे […]

by July 10, 2019 Review
मेरा चांद

मेरा चांद

“आज तारे नहीं आसमां में!” “हैं तो” “कहां, मुझे तो नहीं दिख रहे” “बादलों के आगोश में छिपे हैं” वो पलटकर देखती तो उसकी आंखों की चमक के सामने सितारों का जहां फीका नज़र आता.. पर लड़की की नज़र तो स्याह आसमां में उलझी थी.. कुछ पल ठहर बोली “चांद […]

by July 2, 2019 Fiction
तलाक़

तलाक़

हमारे समाज में पिछले कुछ समय में तलाक़ की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। पर क्या इस बढ़ोतरी का ठीकरा हमें पाश्चात्य संस्कृति पर थोप देना चाहिए या फिर अपने ही समाज में कहीं कुछ ऐसा है, जिस पर ध्यान देने की ज़रूरत है? आजकल तलाक़ होते हैं […]

by June 22, 2019 Articles