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अबोध

यूट्यूब पर अपनी एक कविता पढ़ी थी ‘अबोध’… अभी देखा तो संतोष पटेल जी ने उस रचना की समालोचना अपनी वॉल पर शेयर की है… अच्छा लगा और आप सबके साथ बांटने का मन हुआ 🙂

अनुपमा सरकार की कविता ‘अबोध
-संतोष पटेल

अनुपमा सरकार की ‘अबोध’ कविता केवल भाव नहीं विचार की भी कविता है। इसमें उपदेश की महक और सोद्देश्यता की गंध नहीं है । एक नैतिकता है। इलियट के शब्दों में कहें तो इसमें इमोशनल इक्किवेलेंट ऑफ थॉट (emotional equivalent of thought) है।
मनोविज्ञान कहता है कि विश्व में जितने भी विचार हैं, वे आरम्भ में, भावों के रूप में ही पैदा होते हैं और धीरे धीरे, स्वच्छ होकर विचारों के स्तर पर पहुँचते हैं।

‘अबोध बालक’ और उसकी जिजीविषा का जिस ढंग से अनुपमा सरकार इस कविता में प्रयोग करती हैं उससे मेटॉफेजिकल एरा के महान कवि Henry Vaughan की कविता The Retreate की याद ताजा हो जाती है जिसमें एक अबोध बालक को angel infancay कहा।गया।

जैसे एक बालक माँ के गर्भ में जिस तरह से नौ महीने रहता है और जीने की लालसा में सब दुःख सहता है यह पंक्ति बेहद दिलचस्प है। साधरणतया दूसरे कवि माँ की दुःख को अभिव्यक्त करते हैं, प्रसव पीड़ा को अभिव्यक्त करते हैं और साथ ही माँ के त्याग का बखान भी करते है परन्तु अनुपमा ने बिल्कुल लीक से हटकर कविता में शिशु के द्वारा हर परेशानी को झेलता हुआ दिखाया गया है उसका मुख्य कारण उसकी जिजीविषा है। यहाँ अचानक रोला बार्थ हमारे समक्ष अपने ‘प्लेज़र ऑफ द टैक्सट’ लेकर जाते हैं और इस कविता में पाठात्मकता( टैक्सचुअलिटी) के सिद्धान्त को खोल देते हैं। बार्थ हर उस चीज का पक्षधर है जो केन्द्रपसारी (cetrifugal) है यही उसके लेखन की अंतरंग बहुलार्थता है जो अनुपमा की इस कविता में देखने को मिलती तब जब वे शैशव को शिशु तक ही सीमित नहीं रखा है नहीं वरन जीवन के प्रारम्भ होने से लेकर अंतिम अवस्था के बीच में आने वाले अनेक अवस्थाओं में मनुष्य का शिशु बन अपने भीतर जीने की उत्कट आकांक्षा रखता है।

अबोध कविता में अनुपमा सरकार ने सौंदर्य तत्व का जो सूक्ष्म मौलिक चिंतन किया है वह उन्हें छायावादी काव्य के मूल चेतना से जोड़ता है।

परम्परा को नकारते हुए अनुपमा के काव्य विषयक चिंतन में मौलिकता है। शब्द और अर्थ के तनाव को दूर कर उन्हें मिला देने की आकांक्षा में शिल्प और वस्तु को समन्वित कर देने की आकांक्षा निहित है।
लीजिये आप भी इस कविता का रसास्वादन करें”

ये कविता मेरे शब्द मेरे साथ पर मौजूद है

अनुपमा सरकार की कविता अबोध

One Comment

  1. SANTOSH PATEL says:

    वाह, धन्यवाद

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