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Solar eclipse of 1919

काल: समय या मृत्यु

किसी वक़्त में एस्ट्रोलॉजी में बहुत इंटरस्ट था… इंटरनेट भी नया नया ही आया था उन दिनों… घंटों के हिसाब से पैकेज मिला करते थे, शायद मंत्रा सर्विस प्रोवाइडर हुआ करता था… मैं डेस्कटॉप पर बैठती तो इसी धुन के साथ कि जितनी जल्दी हो सके, relevant material ढूंढूं और […]

by August 8, 2020 Articles
हाथी दांत पर उकेरे बुद्ध के जीवन दृश्य

Shakuntala Devi, Movie Review

ज़िन्दगी में अक्सर हम बिल्कुल वैसे ही बन जाते हैं, जैसे हम नहीं होना चाहते। जिन बातों से हमें चिढ़ होती है, जाने अनजाने उन्हीं में उलझते हैं। जैसे लोग हमें नहीं भाते, वही हमसे बार बार टकराते हैं। और याद कीजिएगा वो चेहरा, वो व्यक्तित्व, वो अवगुण, जिनसे आप […]

by August 1, 2020 Review
अम्मा, कृष्ण कांत अरोरा

अम्मा, कृष्ण कांत अरोरा

कहानियों की एक विशेषता है कि वो अपने पाठक खुद ढूंढ लिया करती हैं। हमेशा से मानती अाई हूं कि हम किताबों तक नहीं, बल्कि किताबें हम तक पहुंचा करती हैं। किसी न किसी माध्यम, किसी न किसी रूप में, आहिस्ता से हमारे जीवन में प्रवेश करती हुईं। सो, कल […]

by July 24, 2020 Review
पाताल लोक

पाताल लोक

अपने सबसे करीबी रिश्ते से क्या चाहते हैं आप? प्यार, अपनापन, आपसी समझ, बिना शर्त आप जैसे हैं, वैसा स्वीकार कर लिया जाना? शायद, इतनी सी ही आशा है सम्बन्धों से क्योंकि समाज से आप को ये सब मिलना असम्भव है। वहां तो मान मर्यादा के नाम पर बेड़ियां, ऊंच […]

by July 22, 2020 Review

प्रेम परिभाषा

प्रेम इस छोटे से शब्द को परिभाषित करना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है आप कह भर दें कि मुझे “तुमसे” प्रेम है कि बस “तुम” का होना, उसका होना रह ही नहीं जाता क्षण भर में परिवर्तित हो जाता है “मैं” और “तुम” एक “हम” में केवल व्याकरण की […]

by July 18, 2020 Hindi Poetry

पुल

अजब है ज़िन्दगी किसी के लिए हम पुल तो कोई हमारे लिए पुल कितने पुल पार हुए कितनी बार पुल बनकर बदहाल हुए किसी को याद भी नहीं वैसे भी याद रह जाए तो चुभन होती है ख़ुद पर से गुज़रते बूटों की ठक ठक कहीं अंदर तक भेद जाती […]

by July 18, 2020 Hindi Poetry
मेरी दिल्ली

परिंदे, निर्मल वर्मा

कहानियों का जादू सर चढ़कर कैसे बोलता है, जानना हो तो निर्मल वर्मा की “परिंदे” से बेहतर कुछ नहीं… मैं तो चीड़ के पत्तों की चरमराहट और बिंदी से जलते सिगार की आँच में बर्फीली हवाओं सी मिस लतिका और बेफिक्र डॉक्टर मुकर्जी के सूखे ठहाकों में ऐसी खोयी कि […]

by July 16, 2020 Review
आश्रम, धर्मवीर भारती

आश्रम, धर्मवीर भारती

सुख दुख, पूर्ण अपूर्ण, खाली भरा… क्या हैं ये शब्द, विलोम? न, शायद तस्वीर का दूसरा रुख, जो उतना ही अलग जितना एक सा… कभी कभी किसी कहानी में यूं ही डूब जाती हूं, मानो बस मेरे ही लिए लिखी थी लेखक ने… और शायद इसका ठीक उल्टा भी एकदम […]

by June 23, 2020 Review