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दुख का नमक, कविता

दुख का नमक, कविता

प्रेम अविरल धारा है… ऐसा कोमल अहसास, जो कठोर हृदय को मोम सा पिघला दे… जब प्रेम भाव उमड़े तो स्त्री गुण ही हावी होते हैं मन में… पुरुष भी प्रेम में उतना ही संवेदनशील और कोमल हो उठता है,जितनी कि नारी… तो फिर स्त्री मन तो पहले ही इतना […]

by November 20, 2019 Articles
तोड़ दो, कविता पाठ

तोड़ दो, कविता पाठ

स्त्री को देवी मानने वाले हमारे देश में आए दिन हत्या और बलात्कार की खबरें सुनने को मिलती हैं… बात भ्रूण हत्या की हो, दहेज के नाम पर ज़ुर्म ढाने की हो, परम्पराओं के नाम पर बेड़ियां पहनाने की हो या बलात्कार जैसे जघन्य अपराध की… लंबी चौड़ी फ़ेहरिस्त है […]

by November 15, 2019 Recital
स्त्री शक्ति, समालोचना, संतोष पटेल

स्त्री शक्ति, समालोचना, संतोष पटेल

कुछ समय पहले यूट्यूब पर एक कविता पढ़ी थी “स्त्री शक्ति”… संतोष पटेल जी ने इस कविता को न केवल सुना और पढ़ा, बल्कि उसकी विवेचना और समीक्षा करते हुए, कविता ही नहीं, काव्य कर्म से जुड़े कई पहलुओं पर भी बहुत ही सूक्ष्मता से अपने विचार प्रकट किए हैं… […]

by November 9, 2019 Articles
अबोध

अबोध

यूट्यूब पर अपनी एक कविता पढ़ी थी ‘अबोध’… अभी देखा तो संतोष पटेल जी ने उस रचना की समालोचना अपनी वॉल पर शेयर की है… अच्छा लगा और आप सबके साथ बांटने का मन हुआ 🙂 “अनुपमा सरकार की कविता ‘अबोध‘ -संतोष पटेल अनुपमा सरकार की ‘अबोध’ कविता केवल भाव […]

by November 9, 2019 Articles
मेरी दिल्ली

समाजवाद, ज़रा हटके

जाते हुए बैट्री रिक्शा गलत लेन में था, कार वाले ने डांट पिलाई, गाड़ी क्यों बीच में अटका रखी है… रिक्शे वाला खुद में सिमट गया… आते हुए एक कार वाले ने फोन पर बात करने के चक्कर में गाड़ी गलत जगह खड़ी करके रास्ता रोक रखा था, अबकि बैटरी […]

by November 9, 2019 Articles, Fiction
जुस्तजू

जुस्तजू

उफक छूने की अब हसरत न रही टूटते तारों में वजूद ढूंढता है कोई? फलक पर चांद की जुस्तजू न रही नाज़ुक जुगनुओं से खेलता है कोई? हाथों से फिसलती रेत सा वक्त चाहकर भी रोक पाया है कोई?अनुपमा सरकार

by October 30, 2019 Hindi Poetry
G. K. Chesterton

G. K. Chesterton

G. K. Chesterton, a prolific writer, a self-confessed social and literary critic and a rare genius with golden tongue and silver dipped words. Well, a man who can wield his pen in such myriad ways as a journalist, as a religious preacher, as a moral upholder and yet cook up […]

by October 29, 2019 Pearls of Wisdom
Destiny and Destination

Destiny and Destination

At times I feel I am fighting a lost battle. Anything I do, say or attempt, makes no difference. I am stuck in a rut, the more I try the more I get trapped. And yet, there is a small voice inside that keeps rearing its Head, goading me to […]

by October 28, 2019 Articles