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Bhumika Movie Review

Bhumika Movie Review

जब भी लाइब्रेरी में किताबें लेने जाती, शेल्फ पर सरसरी निगाह डालती और यक ब यक किसी एक पर मन अटक जाता और फिर महसूस होता कि मैंने नहीं किताब ने मुझे ढूंढ़ लिया है… आजकल कुछ यही हाल फिल्मों का हो चला है… एक दोस्त के परामर्श पर “किनारा” […]

by February 20, 2018 Review
गुलज़ार की रावी पार

गुलज़ार की रावी पार

कल किंडल पर यूं ही टकरा गई थी “रावी पार” से.. गुलज़ार की किताब है, नज़्में होंगी, ये सोच, बिना पन्ने पलटे ही झट डाउनलोड कर ली.. पर जैसे ही पढ़ने बैठी, समझ में आया कि अरे, ये तो कहानियां हैं, गुलज़ार की कहानियां… पहले पढ़ी नहीं कभी.. फिर मन […]

by February 18, 2018 Review
Binode Behari Mukherjee

Binode Behari Mukherjee

While visiting National Gallery of Modern Art, I was riveted by the sunflowers created by Benode Bihari Mukherjee He was a prominent artist of Shantiniketan, who despite being blind in one eye and weak sighted in another, became famous as a painter and was appointed as a Curator for Nepal […]

by February 17, 2018 Articles
Mausam Movie (1975)

Mausam Movie (1975)

वादा, छोटा सा शब्द, पलक झपकाते ज़ुबां से फिसल जाता है, पर न निभाने का ख़ामियाज़ा कितना संगीन हो सकता है, शायद ही कभी किसी ने सोचा हो.. शायद इसलिए, क्योंकि वादा खिलाफी का असर अक्सर सालों बाद जो दिखता है, वो भी परोक्ष रूप से… कुछ ऐसे ही भूले […]

by February 16, 2018 Review
My Poems on YQ

My Poems on YQ

by February 16, 2018 Hindi Poetry
भेड़ें

भेड़ें

मिमियाती भेड़ें लीक पर चलती इक दूजे से टकराती भेड़ें बाड़े की सुरक्षा घास पानी को ललचाती भेड़ें सालों की दहशत यादों की गर्त में खौफज़दा गिड़गिड़ाती भेड़ें सालों पहले हवा में डंडा लहराया था मेमने का दिल घबराया था बाड़ा टूटने न पाए लकीर छूटने न पाए गडरिए ने […]

by February 12, 2018 Hindi Poetry

क्या लिखें कैसे लिखें

क्या लिखें और कैसे लिखें, ऐसे दो सवाल हैं, जिनका सामना हर लेखक को करना पड़ता है.. ये सृजनात्मक लेखन के दो मूलभूत प्रश्न हैं.. आप अपनी कविता और कहानी को कैसे लिखें, किन विषयों का चुनाव करें और.. आपका लेखन आपके नज़र और नज़रिए से कैसे प्रभावित होता है, […]

by February 10, 2018 Recital
Divide and Rule

Divide and Rule

मुझे कुछ समझ नहीं आता.. समर्थन या विरोध.. दोनों ही समझ से परे.. जौहर गर्व या शर्म नहीं, किसी खास वक़्त में, चन्द लोगों द्वारा, अपनी समझ व परिस्थिति अनुसार, “करो या मरो” के तहत लिया निर्णय मात्र था.. भंसाली का इस विषय पर फिल्म बनाना, उनकी प्रकृति अनुसार ही […]

by February 6, 2018 Articles