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सुरेश चंद्रा : कवि

कहते हैं शब्दों में बहुत ताकत है.. हौले से गुनगुनाये जाएं तो दिल में उतर आते हैं.. जोश से गुने जाएं तो क्रांतिकारी बना देते हैं.. और जब एक एक शब्द चुन, मन की सलाईयों पर बुन कवि के अपने अलहदा अंदाज़ में पेश किए जाएं, तो अमिट छाप छोड़ जाते हैं..

सुरेश चंद्रा जी एक ऐसी शख्सियत हैं, जिनका लिखा, सीधे दिल में उतर जाता है… कम से कम शब्दों में बड़ी बात कह देना, इनके बाएं हाथ का काम है.. ज़रा आप भी पढ़िए इनकी एक ताज़ा कविता

“सच, सही, ईमान रहने दीजिये …
अच्छे भले को इंसान रहने दीजिये …

जटिल है कुटिलता निर्दोष निस्वार्थ भावों पर …
अपने अंदर बच्चों सी मुस्कान रहने दीजिये …

नये अर्थ मे न बाँटिये मूल ग्रन्थों को …
पवित्र, बाइबल, गीता, कुरान रहने दीजिये …

जो अच्छा कर सकते हैं, अच्छा करने दीजिये उन्हे …
कठिन समय मे अच्छे हाथों मे कमान रहने दीजिये …

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः
सर्वे भवन्तु सुखिनः
और
वसुधैव कुटुम्बकम् …
… इन संस्कारों वाले देश को हिंदुस्तान रहने दीजिये … … …. !!
– SC”
Suresh Chandra

और सोने पर सुहागा ये कि अब हम इनकी कविताओं को इन्हीं की आवाज़ में सुन सकते हैं… सुरेश जी की इस गहन रचना को सुनिए उन्हीं के अंदाज़ में youtube पर Suresh Chandra के नाम से

आप ऊपर दिए लिंक पर कविताएं सुन सकते हैं और उनकी नई रचनाओं के लिए उन्हें subscribe भी कर सकते हैं …

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