Hindi Poetry

सूरज कुछ आधा सा

चांद तो सबने देखा होगा
आज मैंने सूरज देखा कुछ आधा सा
काले बादलों के आगोश में समाता सा।

अपनी लालिमा को समेटता
मेघ की कालिमा बटोरता
नये आशिक की तरह
कभी ऐंठता कभी शर्माता सा।

sunset सहसा ख्याल आया
ये कैसा मिलन?
प्रकृति के प्रतिकूल
नियमों का उल्लंघन!

भिन्न भिन्न है प्रवृति इनकी
जुदा जुदा नियति इनकी
सूरज जलता आग का गोला
बादल धुंआ धुंआ अल्हड़ भगोड़ा।

विचार आया ये कभी एक न हो पाएंगे
मिलकर भी साथ न रह पाएंगे।
एक अग्नि है दूजा जल है
इनका मिलन तो क्षण भर का भ्रम है।

सूर्य का तेज छुपा के
उसका अस्तित्व भुला के
मेघ की आंखें भी नम है
पर शायद यही जीवन का मर्म है
अग्नि को जल, जल को पृथ्वी चाहिए
खुद से उलट एक नई कशिश चाहिए।

मैं कायम थी अपनी बात पर
प्यार को तौलती दुनियादारी की बिसात पर।

पर मेरे इन विचारों से परे
प्रकृति की आंख मिचौली चलती रही
सूर्य की लालिमा मेघ की कालिमा से
अठखेलियां करती रही
और मैं मूक दर्शक बने ये
अद्भुत दृश्य देखती रही।

और फिर सहसा ख्याल आया
चांद तो सबने देखा होगा
आज मैंने सूरज देखा कुछ आधा सा
काले बादलों के आगोश में समाता सा।

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