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सितारे

सितारे

आज हवा में हल्की सी नमी है। बादलों की टुकड़ियां हौले-हौले गश्त लगा रही हैं। नन्हे तारे शर्मीले बच्चों से आसमां में दुबके जा रहे हैं। छदमी चांद बदलियों के बीच हंसता-मुस्काता अंगड़ाईयां ले रहा है। धूसर सा है समां, होली से पहले अक्सर आंधियां चला ही करती हैं। पर […]

by March 5, 2017 Kuch Panne
सनम

सनम

हौले से मैना मुस्काई कोयल भी ज़रा सी शर्माई तितली भंवरे फूलों से कहें आ फागुन के गीत हम मिलके बुनें आमों की कच्ची कलियां चुनें सेमल की पत्तियों को हम गिनें वो उड़ती चीलें अलबेली वो डरती सहमी गिलहरी हाथों में हाथ जो थाम लें हम छोड़ें न साथ […]

by March 5, 2017 Hindi Poetry
Is Chaos Always Bad?

Is Chaos Always Bad?

Life is a journey and there are many pit stops. Often we get lost mid way, considering the momentary stop as the end. The red flag often appears at the wrong intersection and is able to bring the entire train to a screeching halt. As and when it happens, life […]

by March 1, 2017 Articles
Once Upon A Time in February

Once Upon A Time in February

In February, the weather does a somersault. Old leaves are shed; most of the trees adorn a bare look, while small plants bear seasonal flowers. The wind blows dust and pollens, and the entire atmosphere acquires a mysterious look, covering the green lands with a subtle layer of amber dust. […]

by February 27, 2017 Articles, Fiction
स्मृति चिन्ह

स्मृति चिन्ह

स्मृति चिन्ह हमेशा मीठे होते हैं कड़वी यादों के पल भी हल्की सी चीनी तो घोल ही जाते हैं रिश्तों में। याद कराते हैं न कि कैसे उन पलों को जिया था जब ज़िंदगी रूठी सी लगती थी अंधेरा छंटने का नाम ही न लेता था वो गुफा खाई की […]

by February 25, 2017 Hindi Poetry
विचार

विचार

विचार कच्चे चावल हैं कल्पना के जल व मेधा की अग्नि में मद्धम मद्धम पक जीवन-ऊर्जा देते हैं… Anupama

by February 25, 2017 Pearls of Wisdom
Mashaal : Anthology

Mashaal : Anthology

by February 22, 2017 My Published Work
जल

जल

बहता दरिया घुमड़ते बादल पिघलते ग्लेशियर नभ से भूतल तक तैरता, उड़ता, फिसलता केवल जल ! पथरीली राहों में काली घटाओं में संकरी गुफाओं में आंखों से सांसों तक सहता, रिसता, चिहुंकता केवल जल ! तरसती निगाहों में बहकती सांसों में, दहकती आहों में कोरों से होंठों तक टपकता, महकता, […]

by February 21, 2017 Hindi Poetry