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Poems by Anupama

Poems by Anupama

चांद नदारद है तारे भी हड़ताल पर उदास आसमां गहरी सांस ले पेड़ से झूलते चमगादड़ के कान में हौले से बुदबुदा रहा “मैं भी कभी ज़मीं हुआ करता था जाने कब कैसे उल्टा लटक गया” Anupama उसका वक़्त बहुत मामूली था बिन सोचे पलों को खर्च कर दिया उसका […]

by August 27, 2017 Hindi Poetry
Mona Lisa

Mona Lisa

How do you make something popular.. Simple.. embroil it in a controversy… Just saw another episode of Museum Secrets.. apparently Mona Lisa wasn’t too popular till a repairman (slightly soft in head, as discovered later) decided to take it from Louvre Museum and simply walk away ! The theft was […]

by August 26, 2017 Articles
Michelangelo in Sistine Chapel

Michelangelo in Sistine Chapel

Just watched a documentary on Michelangelo’s Frescoes in Sistine Chapel.. and I am amazed at the sheer brilliance and magnitude of work done by the phenomenal artist. Despite not being a painter but a sculpture artist, commissioned on a whim by Warrior Pope Julius, Angelo painted over 300 figures on […]

by August 23, 2017 Articles
Lipstick under my Burkha

Lipstick under my Burkha

कल Lipstick under my Burkha देखी… कई बार कुछ चीज़ें इतनी हाइप कर दी जाती हैं कि आपके मन में उन्हें लेकर बहुत से पूर्वाग्रह बन जाते हैं.. पर अच्छा ये हुआ कि मैंने लगभग बराबर मात्रा में इस फिल्म के पॉज़िटिव और नेगेटिव रिव्यू सुने.. लगा कि शायद ये […]

by August 21, 2017 Review
संभावना

संभावना

समंदर किनारे बैठ लहरें गिनते रहना हाड़-मांस का बालू हो जाना है तूफान के डर से बादलों से अचकचाना पृथ्वी का सृजन से दूर चले जाना है शब्दों की भीड़ में संवेदनाएं ढूंढना मेरा मुझको खुद से ही छले जाना है बहाव, खिलाव, भाव का प्रतीक्षारत रह जाना उनके होने […]

by August 17, 2017 Hindi Poetry
विद्युत

विद्युत

तारों का जाल ज़मीं छूता विद्युत प्रवाह निसंग निर्बाध संभल संभल कदम कदम फूंक कर चल कहे ज़िन्दगी पल पल…. Anupama (बिजली की तारों को खंबे से नीचे सड़क पर झूलते देखा, अजब दहशत होती है ये लापरवाही देखकर)

by August 16, 2017 Hindi Poetry
आज़ादी

आज़ादी

सभी मित्रों को 71वें स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें इंसानी फितरत है, जितना मिल जाए, उससे ज़्यादा पाने की उम्मीद करने की.. हमने गुलामी का ज़हर नहीं पिया, इसलिए शायद आज़ादी का अमृत उतना मीठा नहीं लगता.. पर कम से कम एक दिन देशभक्ति का जज़्बा उमड़ता देख, अच्छा लगता […]

by August 15, 2017 Hindi Poetry
सुरेश चंद्रा : कवि

सुरेश चंद्रा : कवि

कहते हैं शब्दों में बहुत ताकत है.. हौले से गुनगुनाये जाएं तो दिल में उतर आते हैं.. जोश से गुने जाएं तो क्रांतिकारी बना देते हैं.. और जब एक एक शब्द चुन, मन की सलाईयों पर बुन कवि के अपने अलहदा अंदाज़ में पेश किए जाएं, तो अमिट छाप छोड़ […]

by August 15, 2017 Articles