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परिवर्तन

परिवर्तन

ये जो हवाएं चलती हैं फरवरी में, बहुत भाती हैं इस मन को। और क्यों न भाएं, बसंत ऋतुराज यूँ ही तो नहीं। प्रकृति में परिवर्तन, ऊर्जा संचार का सबसे मौलिक रूप ठहरा और मौलिकता प्रभावित करती है मुझे। गर्वीली सरदी अपना कसैलापन लिए विदा होने को है और पतझड़ […]

by February 18, 2017 Kuch Panne
बेड़ियां

बेड़ियां

कितनी बेड़ियों में जकड़े हैं किससे कब कितना कहना कहाँ कब कैसे सिमट लेना कितनी हदें, कितनी बंदिशें अनगिनत ख़्वाब, बेहिसाब ख्याल और एक अजानी सी चुप जाने ये बुलबुले टूटते कैसे नहीं Anupama

by February 18, 2017 Hindi Poetry
बाकी

बाकी

न जीने की जुस्तजू न मरने का इरादा बाकी है रक़्स ओ अक़्स हुए फना रस्म ए कफ़न बाकी है ख्यालोंं के अलाव में, मासूम हर्फ़ राख हुए टुकड़ों का होश नहीं, मुठ्ठी भर रूह बाकी है ज़लज़ले के खेल में, ख्वाब सारे गर्त हुए ज़ख्मों का मालूम नहीं, चोटों […]

by February 12, 2017 Hindi Poetry
कजली

कजली

कजली आँखें, गाल गुलाबी पायल छनके जाए गुपचुप देखे अपना कान्हा बावरी भटकी जाए ठुमक ठुमक चले जो प्यारी बगिया महकी जाए बंसी, गोपी, गाँव की गोरी सारी छोड़ के आए नन्हे कान्हा बेरी समेटे पीछे भागे अाए जैसे ही दिखे सांवरा भृकुटि तनी दिखाए खट्टी इमली भाती मुझको काहे […]

by February 10, 2017 Hindi Poetry

रोटियां

आजकल रोटियां गोल नहीं बनती मुझसे… किनारे टेढ़े मेढ़े हो जाते हैं… कहीं मोटी कहीं पतली… जाने क्यों कुछ हिस्से अधपके रह जाते हैं…. सब्ज़ी में नमक कम, मिर्ची ज़्यादा डाल देती हूँ… दूध उबल-उबल गाढ़ा हुए जाता है… दाल मैं कच्ची ही उतार लेती हूँ… कढ़ाही में कड़छी चलाते […]

by February 10, 2017 Kuch Panne
तन्हाई

तन्हाई

One of my very first poems n A personal favorite यूं ही चहलकदमी करते-करते अहसास हुआ कितनी करीब हो तुम मेरे, इसका आभास हुआ। हर सुख में, हर दुख में, हर दर्द में, हर गर्त में तुम्हीं तो थी साथ मेरे, मज़बूती से थामे हाथ मेरे। बचपन में जब सखियां […]

by February 9, 2017 Hindi Poetry
ये मन

ये मन

ये मन कभी-कभी अनजाने ही आप कुछ लोगों के बेहद करीब आ जाते हैं। खास जगह बन जाती है उनकी आपकी ज़िंदगी में। और कभी बस यूं ही किसी से इतने परेशान कि सामने आना दूर की बात, समय-असमय हुआ टकराव भी चुभने लगता है। किस पर मढ़ें दोष? उन […]

by February 9, 2017 Kuch Panne, My Published Work
खुशी

खुशी

ख़ुशी ये खुशी भी न बड़ी मनचली है। जितना इसे हासिल करने की कोशिश करो, उतनी ही तेज़ी से दौड़ जाती है। आपको हंसी की वजह देने के बजाय आप पर खिलखिलाती, मज़ाक उड़ाती सी नज़र आती है। जानती है न कि इंसान भोले मन से मज़बूर है दुखों की […]

by February 9, 2017 My Published Work