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आस्था

आस्था

आज किसी से लंबी चौड़ी बात हुई, उनके धर्म और आस्था के बारे में… सहज उत्सुकता थी मन में, और उनके विश्वास और अभिव्यक्ति के प्रति सरल समर्थन भी.. पर अचानक वे मंदिरों और पूजा पाठ की सभी विधियों पर ऊँगली उठाने लगी.. जबकि हिन्दू धर्म के बारे में उनकी […]

by April 3, 2017 Kuch Panne
Poems in Madhurakshar

Poems in Madhurakshar

मधुराक्षर के अप्रैल-जून 2017 अंक में प्रकाशित मेरी दो कविताएँ 🙂

by April 3, 2017 My Published Work
The Riddle Solved by Tagore

The Riddle Solved by Tagore

Short stories by Rabindranath Tagore are pithy, engrossing and appealing gems that expose various facets of society and humanity in a very subtle manner. Almost all his stories leave a deep impression on mind, the names of characters may slip but the basic plot remains etched on the psyche for […]

by March 24, 2017 Review
अमरबेल

अमरबेल

I had written this poem two years ago, however, saw this scene again today. The Amarbel had enveloped not only a tree, but had also entangled a nearby building.. आज देखा मैंने एक अनोखा दृश्य पीला जाल सा था लिपटा पेड़ पर पहली नज़र में लगा खूबसूरत प्यार की बयार […]

by March 19, 2017 Hindi Poetry
सवाल

सवाल

सवालों के बवंडर मन को खंडहर बना दें तो… रेतीले तूफ़ान कोरों की नमी उड़ा दें तो.. रेशमी ख्वाब पोरों की नरमी भुला दें तो… ख़ामोश सहर दिल पर कहर बरपा दे तो…. तो… तो… कौन जाने सवाल ही सवाल हैं सारे जवाब तो खो गये सारे… Anupama

by March 16, 2017 Hindi Poetry
Published in Madhurakshar

Published in Madhurakshar

उलझ जाती हूँ इन शब्दों के मकड़जाल में। असीमित वाक्य अनकहेे स्वर विरामों में छुपे नए तथ्य। अब तो इन शब्दों की गर्दन दबोचना चाहती हूँ बांहें मरोड़ना पांव तोड़ना चाहती हूँ अर्क निकाल देना चाहती हूँ भाषा के इन प्रहरियों का शायद कुछ नए अर्थ समझ पाऊँ! Anupama (Published […]

by March 15, 2017 My Published Work
अंबर

अंबर

थकी हारी, दिन भर की ऊहापोह से जूझती, उनींदी अँखियाँ, पल भर ताकती हैं आसमां…. मेघ विहीन अंबर, दम साधे… चन्द्रमा की प्रतीक्षा में, स्वयं को तारों से सुसज्जित किये बैठा है.. पांच-सात नहीं, अनगिनत… प्रथम दृष्टा, कम दिखते हैं… पर एक बार टकटकी बंधे, तो जाने कहाँ से कितने […]

by March 14, 2017 Fursat ke Pal
होली : फागुन का चांद

होली : फागुन का चांद

धीमे-धीमे गहराती शाम। थका-मांदा सूरज दिन भर की चमक-दमक के बाद अपनी आभा खुद में समेटे,अपनी प्रेयसी संध्या के कांधे पर हाथ डाले आकाश रथ से क्षितिज की ओर अग्रसर हो चला है। होली का दिन था न आज, मस्ती भरा। इंद्रधनुषी थी उसकी सुबह, लाल-पीले-नीले-जामुनी रंगों में चहकती सी। […]

by March 13, 2017 Kuch Panne