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सुमन

सुमन

अभेद्य प्रपंच है जीवन.. बेहद धीमी गति से रेंगता एक दुःस्वप्न.. वो हुलसकर बाहर आना चाहती है.. पर सघन तिमिर उसकी बांह खींच, वापिस ले जाता है… छोटे छोटे जुगनू, आशा की किरण से टिमटिमाते हैं और वो फिर फिर उन्हीं राहों पर लौट आती है.. चांदनी का ललचाता भ्रम […]

by April 15, 2017 Fiction
अर्पण

अर्पण

तेरा तुझको अर्पण करके भी मैं परेशान ऐसा तो हो नहीं सकता। शायद मेरे समर्पण में ही कोई कमी है। इसे पूर्ण करने की एक कोशिश और करूँ या छोड़ दूं इसे बीच राह में असमंजस तू ही सुलझा। चल एक बात तो मानी मेरे दुस्वप्न सच होते हैं। स्वप्नों […]

by April 15, 2017 Hindi Poetry
तन की थकन

तन की थकन

तन की थकन मन को दोहरा कर रही है दिमाग में ख्याल भरमाते हैं पर कलम की नोंक से कहीं दूर भाग जाते हैं मन हुंकार उठता है नहीं करना मुझे इन कागज़ों को काला-नीला नहीं भरना मुझे किसी कैनवस में रंग नहीं भागना मुझे रंगीली तितलियों के पीछे नहीं […]

by April 15, 2017 Hindi Poetry
पाखी

पाखी

नभ से जल तक अचल निश्छल मन से तन तक प्रेमिल स्नेहिल शब्द बने पाखी मचल मचल Anupama

by April 13, 2017 Hindi Poetry
मार्कण्डेय

मार्कण्डेय

जब सवाल तमक कर उठते हैं, तब मन के किसी कोने में छुपे जवाब चुपचाप, गर्दन झुकाये, खुद को खोज लिये जाने का इंतज़ार करते हैं… आज सुबह मन में चिरंजीवी शब्द ने कौतूहल रचा था.. दिन भर इसी बारे में पढ़ती रही.. कितनी ही कथाएँ, किंवदन्तियाँ, धार्मिक आस्था के […]

by April 11, 2017 Kuch Panne
बतिया

बतिया

कल रात आंगन में चहलकदमी करते, अचानक नज़र उस चांद से जा मिली.. नन्हे टिमटिमाते तारों के बीचोंबीच, चमकता दमकता सहज सलोना… पर जाने क्यों किसी कशमकश में लग रहा था… यहां वहां, गर्दन घुमाता, खुद से ही बतियाता… पल दो पल उसे देख मुस्कायी, फिर अचानक मुझे अमावस याद […]

by April 10, 2017 Fursat ke Pal
पंछियों

पंछियों

पंछियों का चहकना फूलों का महकना सूरज का कसमसाना बादलों का गुर्राना घास का लहकना डाली का चटकना धुप की गोलियों का पत्तियों पे फिसलना ओस की बूंदों का मोती सा चमकना और उस लम्बी सी पगडंडी पे इक गूंजती सी आवाज़! सुनो! दिन कितना खुबसूरत है न आज!! Anupama

by April 10, 2017 Hindi Poetry
नाव

नाव

मूर्तिकार के कुशल हाथों में अनगढ़ माटी की मूरत प्रेम पगी यादों केे साये में सुघड़ जीवंत सूरत तन कठोर, कोमल भाव लहर लहर, जीवन नाव Anupama

by April 8, 2017 Hindi Poetry, Nano fiction