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Rajnigandha Movie

Rajnigandha Movie

सोचा था आज सुबह से बहुत बोल चुकी, अब ज़रा दोस्तों को आराम करने दूं.. पर कुछ देर पहले रजनीगंधा देखी.. और अभी अभी Sanjay जी की लिखी रोबोट और इंसान की प्रेम कहानी पढ़ी.. दोनों बातें जुड़ी सी महसूस हुईं, मानो एक्शन और रिएक्शन.. पहले बात करते हैं रजनीगंधा […]

by March 12, 2018 Articles, Review
मुबारकबाद

मुबारकबाद

तुमने रंगीनियों को चाहा शीशों से इमारतों को सजा दिया मैंने रंगों को चाहा तितलियों को हथेली पर बिठा लिया तुमने संगीत को चाहा सुरों को राग ताल में साध लिया मैंने सुरों को चाहा बुलबुल के गीतों में खुद को भुला दिया तुमने अमीर होना चाहा सिक्कों की खनक […]

by March 11, 2018 Hindi Poetry
नसों में नमक

नसों में नमक

by March 10, 2018 Hindi Poetry
गया और फल्गु नदी

गया और फल्गु नदी

गया का नाम बहुत सुना था पर आज मालूम पड़ी एक गज़ब बात… यहां फल्गु, नाम की एक ऐसी नदी है, जो सतह पर सिर्फ और सिर्फ बालू का ढेर है और ज़मीन से कुछ फीट नीचे, पानी से लबालब.. छ्ठ में इस सूखे रिवर बेड में छोटे छोटे कुंड […]

by March 9, 2018 Articles
प्रेम या देह

प्रेम या देह

प्रेम प्रेम प्रेम रटने वाले देह देह देह चखने वाले रचेंगें शब्द बेचेंगें भाव और फिर आंखें मूंद, मौन धर दर्शन की पीठ चढ़ लेंगे एक और कश खीसें निपोर कहेंगे स्त्री तुम महान हो हमारा सम्मान हो यूं ही बेवकूफ बनती रहना….. Anupama Sarkar

by March 8, 2018 Hindi Poetry
हाथी दांत पर उकेरे बुद्ध के जीवन दृश्य

हाथी दांत

कुछ समय पहले National Museum गई थी… वहां हाथी दांत (Ivory) की बनी चीज़ों का अच्छा खासा कलेक्शन दिखा.. एक पूरा कमरा, सिर्फ और सिर्फ हाथी दांत से बनी कलाकृतियों को समर्पित… ज्वैलरी बॉक्स, पादुका, छोटी छोटी मूर्तियों से लेकर मन्दिर और सिंहासन के पाये तक… उन पर की हुई […]

by March 5, 2018 Articles
प्रमाद

प्रमाद

पक्ष विपक्ष तर्क वितर्क के तराजू में भाव हल्के पड़ते जाते हैं जर्जर होते तन और क्षीण पड़ते मन के उद्गार कंठ में सिमटे रह जाते हैं मंथर बुद्धि क्षिथिल धड़कन कांपते हाथ फिसलते पांव बढ़ती आयु के ही परिचायक नहीं कहीं भीतर, गहरे, बहुत गहरे रिसते घावों की टीस […]

by March 4, 2018 Hindi Poetry
बगूला

बगूला

यादों का बगूला अक्सर मन को बहा ले जाता है… स्मृतियों की संकरी गलियों में सूरज कभी डूबता भी तो नहीं… हर मोड़ पर इक लम्हा ठहरा मिलता है, उसी जगमग, उसी कश्मकश, उसी उदासी, उसी खुशी में सराबोर… जैसे जीवन वहीं थमा है अब भी, वहीं उसी मोड़ पर.. […]

by March 3, 2018 Fursat ke Pal