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काकभुशुण्डि और कर्म

काकभुशुण्डि और कर्म

कुछ प्रसंग पढ़ते समय जितने गहरे लगते हैं, उस से कहीं ज़्यादा गहरे हुआ करते है.. रामायण महाभारत और पुराण, ऐसे ही कई बहुआयामी प्रसंग खुद में समेटे है… कभी काकभुशुंडी की एक कथा पढ़ी थी.. काकभुशुंडी महाज्ञानी थे, परंतु अहंकार के चलते उन्हें श्राप मिला और वे कौवे की […]

by August 5, 2017 Kuch Panne
विधाता

विधाता

कठपुतलियां देखीं हैं कभी अक्सर कहते सुना, हम भी हैं वैसे ही भाग्य के भरोसे, सांस लेते गुड्डे पर उधेड़ो ज़रा उस मन को धीमी सी चरमराहट होगी और राज़ खुल जायेगा विधाता बहुत ज्ञानी रे हमारी डोर हमारे हाथ थमा दर्शक दीर्घा में मुस्कुरा रहे…. Anupama

by August 5, 2017 Hindi Poetry
Translated poem of Jibananda Das

Translated poem of Jibananda Das

मैं ट्राम पटरी के साथ साथ चलता हूं रात गहरा चुकी है मुझे बीती ज़िंदगी की तल्ख आवाज़ सुनाई देती है ‘तुम टूटी हुई ट्राम के जैसे हो- तुम्हारा कोई विश्राम स्थल नहीं, तुम्हें पारिश्रमिक की ज़रूरत नहीं ओह! ऐसा कब हो गया’ वो पुरानी ज़िंदगी कहीं पीछे गुम है […]

by August 3, 2017 Translations
स्कूल

स्कूल

आज बरसों बाद सरकारी स्कूल में जाना हुआ… पुराने ब्लैक बोर्ड पर नया वाला पेस्ट कर रखा था… दीवारों पर पलस्तर उखड़े, पंखे ढुलमुल सी चाल चलते.. और खिड़कियों पर धूप और बारिश से बचाव के लिए टूटे शीशों पर मोटी प्लास्टिक शीट चढ़ी हुई… कुल मिलाकर लीपा पोती कर […]

by July 30, 2017 Kuch Panne
ब्लैक होल

ब्लैक होल

पढ़ा था कभी किताबों में धूल के बादलों का लहराते हुए आना इक दूजे में समाना और सितारा हो जाना हाइड्रोजन का लिपटना, हीलियम बन जाना अंतहीन ऊर्जा, अनंत प्रकाश और अनायास इक चमकीले तारे का अंतरिक्ष में मुस्कुराना हां, पढ़ा था कभी किताबों में, मैंने सितारों का सूरज हो […]

by July 29, 2017 Hindi Poetry
समझ

समझ

इस वीकेंड में दो डाक्यूमेंट्रीस देखीं.. She Wolves और King Henry VIII पर…मन खिन्न था कि राजा रानी के मायावी संसार किस कदर खोखले होते हैं, और मानव कितने क्रूर और नृशंस.. Matilda का क्वीन बनते बनते रह जाना, Eleanor का अपने ही पति के खिलाफ बगावत कर जाना, Henry […]

by July 25, 2017 Fursat ke Pal
प्रेमचंद विशेषांक: खुशबू मेरे देश की

प्रेमचंद विशेषांक: खुशबू मेरे देश की

मुंशी प्रेमचंद की कहानियां लगभग १०० वर्ष बीत जाने पर भी उतनी ही प्रासंगिक लगतीं हैं जितनी कि प्रकाशित होते समय रही होंगी। शायद उनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण उनकी रचनाओं का किसी समय या परिस्थिति विशेष से परे, मानवीय संवेदनाओं और संबंधों से जुड़े होना ही है। कुछ […]

by July 24, 2017 Articles, Review
Promises of a Firefly by Anupam Patra

Promises of a Firefly by Anupam Patra

Just finished reading Promises of a Firefly by Anupam Patra and I am still recovering from the after effects of being subjected to emotionally intense, tear jerking, depth defying tales of love and longing, for the entire journey of 209 pages. Phew! What a feat by a debutant writer. I […]

by July 21, 2017 Review