Translations

You will remember by Pablo Neruda

You will remember by Pablo Neruda

You will remember – Pablo Neruda तुम याद करोगे वो उच्छृंखल नदी जहां मधुर सुगंध उठती और कंपित होती थी और कभी-कभी एक पक्षी, पहने पानी की पैरहन और सुस्त, सर्दीले उसके पंख तुम याद करोगे धरती के वो उपहार अमिट खुशबू, सुनहरी मिट्टी, झाड़ियों के खर-पतवार और उन्मत्त जड़ें […]

by May 6, 2017 Translations
You will remember – Pablo Neruda (Hindi Translation)

You will remember – Pablo Neruda (Hindi Translation)

You will remember – Pablo Neruda तुम याद करोगे वो उच्छृंखल नदी जहां मधुर सुगंध उठती और कंपित होती थी और कभी-कभी एक पक्षी, पहने पानी की पैरहन और सुस्त, सर्दीले उसके पंख तुम याद करोगे धरती के वो उपहार अमिट खुशबू, सुनहरी मिट्टी, झाड़ियों के खर-पतवार और उन्मत्त जड़ें […]

by June 11, 2016 Translations
I Like For You To Be Still by Pablo Neruda (Translated)

I Like For You To Be Still by Pablo Neruda (Translated)

मैं चाहता हूँ कि तुम स्थिर रहो : जैसे तुम अनुपस्थित हो यहाँ तुम मुझे दूर से सुन पाओ और मेरी आवाज़ तुम्हें छू भी न सके। ऐसा लगे कि तुम्हारी आंखें प्रवाहित हो चुकीं और एक चुंबन ने तुम्हारे मुख पर ताला जड़ दिया है। चूंकि सभी वस्तुएं मेरी […]

by May 15, 2016 Translations
Tonight I Can Write by Pablo Neruda (Translated)

Tonight I Can Write by Pablo Neruda (Translated)

आज रात मैं लिख सकता हूँ सबसे उदास पंक्तियाँ जैसे कि लिख सकता हूँ “ये रात तारों भरी है और सितारे नीले रंग के हैं और कहीं दूर कांप से रहे हैं” रात की हवा आसमान में झूमती है और गाती है। आज रात मैं लिख सकता हूँ सबसे उदास […]

by May 13, 2016 Translations
In My Sky At Twilight by Pablo Neruda (Translated)

In My Sky At Twilight by Pablo Neruda (Translated)

मेरे आकाश की संध्या में तुम एक मेघ की तरह हो और तुम्हारा रूप-रंग, बिल्कुल वैसे, जैसे भाते हैं मुझे। तुम मेरी हो, मेरी, मधुर अधरों वाली प्रेयसी और तुम्हारे जीवन में मेरे अनंत स्वप्न जीते हैं। मेरा आत्म-दीप तुम्हारे चरणों का श्रृंगार है मेरी तीक्ष्ण सुरा तुम्हारे होंठों पर […]

by May 12, 2016 Translations
Every Day You Play by Pablo Neruda (translated)

Every Day You Play by Pablo Neruda (translated)

हर रोज़ तुम अंतरिक्ष के प्रकाश से खेलती हो कुशाग्र अतिथि सी, तुम पुष्प व जल में प्रकट होती हो। तुम इस श्वेत शीर्ष से कहीं बढ़कर हो, जिसे मैं मज़बूती से थामे बैठा हूँ जो हर दिन, फूलों के गुच्छों सा, मेरे हाथों में रहता है। जब से मैं […]

by May 10, 2016 Translations
Poem by Chandrashekara

Poem by Chandrashekara

एक समय की बात है मेरे मित्रों ये आकाश कोई सीमा नहीं जानता था और ये पृथ्वी कोई परिधि। तुम जो भी चिल्लाते थे वह एक गीत बन जाता था पर उसे कोई सुनता नहीं था। तुम्हारे कदम जहां भी ले जाते थे एक पथ बन जाता था पर कोई […]

by May 9, 2016 Translations

Don’t go far off by Pablo Neruda

दूर मत जाओ, एक दिन के लिए भी नहीं, क्योंकि क्योंकि मैं नहीं जानता कैसे कहूँ, एक दिन बहुत लंबा है और मैं तुम्हारा इंतज़ार करता रहूँगा जैसे एक खाली स्टेशन, जहाँ रेलगाड़ियां कहीं दूर सो रही हैं ! मुझे मत छोड़ो, एक घंटे के लिए भी, क्योंकि चिंता की […]

by May 2, 2016 Translations