Fiction

फुर्सत के पल

फुर्सत के पल

जब भी पैदल चलती हूँ, ये नज़र पेड़ों, लोगों, पत्थरों, इमारतों, जानवर, पंछी, चबूतरों, दीवारों में उलझने लगती है। जो मज़ा धीमी गति से टहलते हुए, आसपास के नज़ारों को महसूस करने में है, वो किसी तेज़ भागती बस, ट्रेन या गाड़ी में बैठे हुए कहाँ। हालाँकि थोड़ी सी आलसी […]

by January 27, 2016 Fiction, Fursat ke Pal
गुलाबी सुबह

गुलाबी सुबह

उस ऊंची पहाड़ी की चोटी पर बाहें फैलाए खड़ी हूँ। तेज़ हवाओं से मेरे कदम लड़खड़ा रहे हैं। खुले बाल चेहरे से आंखमिचौली खेल रहे हैं। दुपट्टा गले में उलझ, किसी परिंदे सा आज़ाद होने को फ़ड़फ़ड़ा रहा है। दूर कहीं बन्दरों का कोई झुण्ड आपस की नोंक झोंक में […]

by January 20, 2016 Fiction
एक दोपहर

एक दोपहर

मई की तपती दोपहर, गरम हवा के थपेड़ों से जूझती, पल-पल माथे पर उमड़ती पसीने की बूंदों को आंचल से पोंछती, निर्विकार खड़ी थी वो। उस लंबी सी लाईन में लगभग सबसे पीछे, दो घंटे हो चले थे। बड़े डॉक्टर को दिखाने का लालच उसकी सभी परेशानियों पर भारी जो […]

by January 18, 2016 Fiction
पतंगबाज़

पतंगबाज़

आसमान में उड़ती रंग बिरंगी पतंगें बहुत भाती हैं मुझे.. लगता है जैसे कागज़ को पंख मिल गए… जड़ खड़े पेड़ों का बादलोँ को छूने का अरमान पूरा हो गया… हवा संग डोलतीं.. नई ऊंचाइयां छूतीं.. इतरातीं… बलखातीं ये कोरी तितलियाँ बिलकुल आज़ाद नज़र आती हैं.. पर ध्यान से देखूँ […]

by November 24, 2015 Fiction, Fursat ke Pal
पूर्णाहुति

पूर्णाहुति

अ से अनार, आ से आम, इ से इमली, ई से ईख : क्यों, याद आई न वो रंगबिरंगी किताब जिससे अक्षर पढ़ने व लिखने सीखे थे कभी। बोलना तो बहुत पहले आ गया था। आखिर मम्मी-पापा, दादी-दादा से गुड्डे-गुड़ियों, कुत्ते-बिल्लियों के नाम सीख लेने के बाद ही तो जाते […]

by October 27, 2014 Fiction, Fursat ke Pal
The Traffic Signal

The Traffic Signal

A cloudy day with a slight hint of Sun slithering beneath the dense grey cover, is a common sight in August in Delhi. It is the season of Monsoon, with South Western wind flying over the skies, bringing with them a respite from harsh summer days. For Delhiites, it is […]

by October 2, 2012 Fiction
Curiosity almost killed the Rat-II

Curiosity almost killed the Rat-II

Gunnu was anxious to watch the live party. He began to keep an eye on the hotel entrance. He tried to ascertain the inside activities with his limited knowledge and vast creative imagination. As evening approached, he saw a large group of people entering the hotel. All of them were […]

by March 11, 2012 Fiction
Curiosity almost killed the Rat – I

Curiosity almost killed the Rat – I

Gunnu was jumping on the parapet, peeping into the bin, looking for Deepu, his cousin and best friend. All of a sudden, he noticed a cat, hiding behind the wall. Gunnu shouted “Deepu! Deepu!! Run. The big cat is here” and saying so, he ran and hid in a hole […]

by March 27, 2011 Fiction