Fiction

मिसिज़ जोशी

मिसिज़ जोशी

बातों का सिलसिला अक्सर लंबा खिंचता है… चाय की छोटी सी प्याली.. न न फूल-पत्ती वाली खूबसूरत नहीं.. बल्कि वही स्ट्राइप्स वाले थरमोफोर्म के कप में दो घूँट भूरा गर्म पानी और उस पर चिपकी गाढ़ी मलाई.. हाथ में लिए पन्द्रह मिनट हो चले… चाय जाने कैसे द्रौपदी के अक्षय […]

by September 10, 2016 Fiction
दो लड़ाके

दो लड़ाके

ये वक़्त भी न.. अजब पहेली है.. जाने कैसे इसे हमारी बेक़रारी की खबर हो जाती है… जिस दिन आप जल्दी में हों ठीक उसी दिन ये थम सा जाता है… घड़ी की सुइयां चिपक सी जाती हैं.. अक्खड़ बन सेकंड की सुई मिनट्स से भी धीमे चलती है.. और […]

by August 4, 2016 Fiction
खाके

खाके

जानते हो ये दुनिया अब अच्छी नहीं लगती मुझे.. अकेली हो गई हूँ.. थी तो पहले भी पर तब महसूस नहीं होता था… दबा दीं थी भावनाएं.. उन पर मुट्ठियाँ भर भर मिट्टी डाली थी… दफन कर दिया था जज़्बातों को.. ख़्वाबों का गला घोटकर संकरी शीशी में कैद कर […]

by July 17, 2016 Fiction
मेट्रो स्टेशन तक

मेट्रो स्टेशन तक

कीचड़ में सने पाँव भी कभी कभी महंगे परफ्यूम से कहीं ज़्यादा सुख देते हैं… जब मन मौसम छटपटा कर भीग जाना चाहे तो उमस की भभकती आग भी सुहानी लगने लगती है…एक उम्मीद साथ लाती है न … भीग जाने की…. इंतज़ार जब हद से गुज़र जाये तो वस्ल […]

by July 17, 2016 Fiction, Fursat ke Pal
पगली

पगली

हर तीसरे-चौथे दिन वो अस्पताल के गलियारे में दिख जाती। बेतरतीबी से लपेटी मैली-कुचैली साड़ी, उलझे बाल, टूटी चप्पल में समय से पहले ही बूढ़ी हो चुकी सूनी आंखों में अपना दर्द छुपाए, आते-जाते लोगों को निरीह भाव से ताकती रहती। नाम तो पता नहीं, सब पगली ही कहते थे […]

by July 4, 2016 Fiction
दफन

दफन

ज़मीन से कुछ फ़ीट नीचे दफन हैं साँसें… हर कोशिश मिट्टी के ढेले मुंह में भर जाती है… नासिका साथ छोड़ चुकी.. उसके पुटों में गहरे जाले हैं… हाथों में हरकत नहीं… पाँव बेड़ियों में उलझे.. सच पूछो तो तन, मन का आवरण है केवल… जब मन ही टूट जाए […]

by June 30, 2016 Articles, Fiction
किस्मत

किस्मत

महीने के दिन चढ़ने वाले थे। सरला के मन में रह-रह कर कौंध जाती सास की धमकी “अब की पेटसे न हुई तो वीरू का दूजा ब्याह करा दूंगी। कब तक बांझ को घर बिठाए रखूं। दस साल हो चले शादी को। लड़का जन्मना तो दूर, चूजा तक न उतरा […]

by June 12, 2016 Fiction
प्रतिमा

प्रतिमा

बहुत दिनों बाद सूरत देखी आज आईने में। निस्तेज चेहरा, आंखों के नीचे काले घेरे, फटे होंठ, रूखे बाल ! हैरां थी मैं उस अक्स को देखकर। क्या सचमुच ये हूँ मैं? वो हंसती-खिलखिलाती प्रीत कहां खो गई। याद है न तुम्हें, मेरा नाम ! तुम्हीं ने बिगाड़ा था या […]

by June 11, 2016 Fiction