Fiction

कील

कील

आज एक नयी कहानी सुनायी उन्होंने.. किसी मंदिर की मान्यता के बारे में… कि कैसे एक औरत शादी के 30 साल बाद मां बनने का सुख पा सकी… और अपनी मुराद पूरी होने पर घुटनों पर बच्चों सी रिढ़ते हुये मन्दिर के द्वार पर माता का धन्यवाद देने गयी… मैं […]

by March 9, 2017 Fiction, Kuch Panne
जूते : लघुकथा

जूते : लघुकथा

जूतों की दुकान खुली पड़ी थी और जीजा, चाचा, फूफा अपनी पसंद और नाप के अनुसार चुन रहे थे। मुफ़्त का माल ही सही, क्वालिटी चैक कर लेने में जाता ही क्या है। जब से गोपाल ने ये दुकान खोली थी, रिश्तेदारों की पांचों ऊंगलियाँ घी में थीं। भोला-भाला आदमी, […]

by March 5, 2017 Fiction, My Published Work
Once Upon A Time in February

Once Upon A Time in February

In February, the weather does a somersault. Old leaves are shed; most of the trees adorn a bare look, while small plants bear seasonal flowers. The wind blows dust and pollens, and the entire atmosphere acquires a mysterious look, covering the green lands with a subtle layer of amber dust. […]

by February 27, 2017 Articles, Fiction

Cobweb

Moving at rocket speed, I bump into many… comets, meteors fall, moon rises, sun sets… Trees sway, Birds sing, cat naps, lights blink… Smiles, Laughs, Discussions, like a hungry sponge, I take everything in… And then I sit back, staring at that cobwebbed window, feeling warmth of scattered rays, sparkling […]

by January 9, 2017 Fiction, Nano fiction
Ways of Life

Ways of Life

As I sit calmly, nodding, smiling, without any forced inputs, each one of them begins to talk about their unique problems, goals, achievements… their own, very own understanding of life… And then it boils down to one thing… We are puppets, doing our best, rest is in His hands… Yes, […]

by January 9, 2017 Fiction, Nano fiction
वो खिड़की

वो खिड़की

लाल ईंटों की दीवार, टूटा-फूटा कूलर, बाल्कनी में धूल चाटता पुराना फर्नीचर। किसी आम मध्यम वर्गीय परिवार का ही लगता था वो घर। पर नहीं, कुछ तो खास था उसमें। आते-जाते लोगों की नज़र अक्सर उलझ जाती थी। गली का सबसे अनोखा मकान था वो, जामनी घर के नाम से […]

by January 5, 2017 Fiction
मूर्तिकार

मूर्तिकार

गज़ब का मूर्तिकार था राघव। छैनी की सधी ठकठक और हथौड़े की हल्की चोट से निर्जीव पाषाण में कुछ यूं जान फूंकता कि मूर्ति बरबस मुंह से बोल पड़ती। जीवंत हो उठतीं वे मूक प्रतिमाएं जो कभी केवल मील का पत्थर हुआ करती थीं। लोग कहते थे कोई जादूगर था। […]

by January 4, 2017 Fiction
मकड़ी

मकड़ी

बात कुछ पुरानी है पर उतनी भी नहीं कि भुलाई जा सके.. कहानी की नायिका एक मकड़ी… ऐसी-वैसी नहीं, गज़ब की जादू भरी… हाँ, दूसरों से अलग थी, खुद में खोयी, औरों से दूरी बनाए, जाने क्या-क्या सोचा करती.. इंसान होती तो दार्शनिक या कलाकार कहलाती.. पर वो थी बेचारी […]

by September 29, 2016 Fiction