My Published Work

जूते : लघुकथा

जूते : लघुकथा

जूतों की दुकान खुली पड़ी थी और जीजा, चाचा, फूफा अपनी पसंद और नाप के अनुसार चुन रहे थे। मुफ़्त का माल ही सही, क्वालिटी चैक कर लेने में जाता ही क्या है। जब से गोपाल ने ये दुकान खोली थी, रिश्तेदारों की पांचों ऊंगलियाँ घी में थीं। भोला-भाला आदमी, […]

by March 5, 2017 Fiction, My Published Work
ऊंचा आसमां

ऊंचा आसमां

आसमां यकायक बहुत ऊंचा हो गया है दूर कहीं फलक पर सूरज चमक रहा है। बादल भी छितरे से हैं कहीं गहरे नीले तो कहीं धुंधलाए से सफेद जैसे स्याही की शीशी उड़ेल दी हो किसी अनाड़ी ने। क्षितिज पर लिखे अक्षर मिट से गए हैं क्या मालूम कभी कुछ […]

by March 5, 2017 Hindi Poetry, My Published Work
Mashaal : Anthology

Mashaal : Anthology

by February 22, 2017 My Published Work
Sargam Tuned

Sargam Tuned

No matter, how many poems I compose or stories I write, as a creator, it gives me immense pleasure to see my work in printed form. Books make me nostalgic, they drive me down memory lanes and when they happen to have my own work, the magic doubles. On July […]

by February 19, 2017 Events, My Published Work
ये मन

ये मन

ये मन कभी-कभी अनजाने ही आप कुछ लोगों के बेहद करीब आ जाते हैं। खास जगह बन जाती है उनकी आपकी ज़िंदगी में। और कभी बस यूं ही किसी से इतने परेशान कि सामने आना दूर की बात, समय-असमय हुआ टकराव भी चुभने लगता है। किस पर मढ़ें दोष? उन […]

by February 9, 2017 Kuch Panne, My Published Work
खुशी

खुशी

ख़ुशी ये खुशी भी न बड़ी मनचली है। जितना इसे हासिल करने की कोशिश करो, उतनी ही तेज़ी से दौड़ जाती है। आपको हंसी की वजह देने के बजाय आप पर खिलखिलाती, मज़ाक उड़ाती सी नज़र आती है। जानती है न कि इंसान भोले मन से मज़बूर है दुखों की […]

by February 9, 2017 My Published Work
शायर

शायर

पसीना बहा सफेद पन्नों पर नज़्में नहीं लिखी जातीं न किसी की खिल्ली उड़ा गज़लों में जान आती है जज़्ब करने पड़ते हैं आंसू खून जलाया जाता है नासूर से गलती हड्डियों से टपकता मवाद खूबसूरत परतों में सहेज लफ्ज़ों में सजाया जाता है तब उभरती है कागज़ की ज़मीन […]

by December 2, 2016 Hindi Poetry, My Published Work
परमार्थी

परमार्थी

कड़कड़ाती बिजली गड़गड़ाते बादल झमाझम बरसता निर्मल जल और कहीं लुका-छिपा सा सूरज खूबसूरत है दिन आज! इन मेघों को खूब कोसा है मैंने उलाहने भी दिए हज़ार आते जाते जाने कितनी बार देखा मुड़कर किया इंतज़ार पर क्षितिज को छूने की शिखर पर चढ़ने की ललक में अनदेखा भी […]

by September 7, 2016 Hindi Poetry, My Published Work