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Mona Lisa

Mona Lisa

How do you make something popular.. Simple.. embroil it in a controversy… Just saw another episode of Museum Secrets.. apparently Mona Lisa wasn’t too popular till a repairman (slightly soft in head, as discovered later) decided to take it from Louvre Museum and simply walk away ! The theft was […]

by August 26, 2017 Articles
Michelangelo in Sistine Chapel

Michelangelo in Sistine Chapel

Just watched a documentary on Michelangelo’s Frescoes in Sistine Chapel.. and I am amazed at the sheer brilliance and magnitude of work done by the phenomenal artist. Despite not being a painter but a sculpture artist, commissioned on a whim by Warrior Pope Julius, Angelo painted over 300 figures on […]

by August 23, 2017 Articles
सुरेश चंद्रा : कवि

सुरेश चंद्रा : कवि

कहते हैं शब्दों में बहुत ताकत है.. हौले से गुनगुनाये जाएं तो दिल में उतर आते हैं.. जोश से गुने जाएं तो क्रांतिकारी बना देते हैं.. और जब एक एक शब्द चुन, मन की सलाईयों पर बुन कवि के अपने अलहदा अंदाज़ में पेश किए जाएं, तो अमिट छाप छोड़ […]

by August 15, 2017 Articles
Lord Krishna

Lord Krishna

When I look at this painting by Raja Ravi Verma, I am swayed by many emotions… He was a pioneer of poster making and responsible for allowing household and common people, to keep and pray to beautiful portraits of their revered God’s and Goddesses at their homes .. How art […]

by August 15, 2017 Articles
अनहोनी

अनहोनी

बहुत कोशिश करती हूं कि नेगटिविटी दूर रख पाऊं… दुख दर्द इतना है संसार में… गर हावी होने दिया तो मुस्कुराहट ढूंढे न मिलेगी किसी चेहरे पर.. टीवी नहीं देखती, अखबार भी नहीं पढ़ती, व्ट्सएप पर आने वाले संदेश फोरवड भी नहीं करती… क्योंकि ज़्यादातर अफवाह और नेगेटिव बातों से […]

by August 13, 2017 Articles, Kuch Panne
सुबह का सूरज

सुबह का सूरज

सुबह का सूरज उम्मीद के पंख लिए आता है… रात की कालिमा को भोर की लालिमा से हरता… पंछियों के गुंजन से सुप्त चेतना को धीमे से जागृत कर.. बदलियों की टुकड़ियों के ठीक पीछे, हौले से मुस्काता.. हल्दी का टीका, माथे पर धर, बांका सूरज… चला है रात रानी […]

by August 10, 2017 Articles, Fursat ke Pal, Kuch Panne
प्रेमचंद विशेषांक: खुशबू मेरे देश की

प्रेमचंद विशेषांक: खुशबू मेरे देश की

मुंशी प्रेमचंद की कहानियां लगभग १०० वर्ष बीत जाने पर भी उतनी ही प्रासंगिक लगतीं हैं जितनी कि प्रकाशित होते समय रही होंगी। शायद उनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण उनकी रचनाओं का किसी समय या परिस्थिति विशेष से परे, मानवीय संवेदनाओं और संबंधों से जुड़े होना ही है। कुछ […]

by July 24, 2017 Articles, Review
जाते जाते

जाते जाते

मन जब बहुत विचलित हो जाता है तो दूर तक देखने का प्रयास करती हूँ… इतनी दूर जहां तारों का जमघट, कंक्रीट के जंगल खत्म हो जाएं.. नज़र आएं तो केवल पेड़ों की फुगनियाँ… बित्ते भर की दूरी पर टहनियाँ टकराकर, मानो एक दूजे को आलिंगन में भरती हों… रूई […]

by July 12, 2017 Articles, Fiction, Kuch Panne