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प्रेमचंद विशेषांक: खुशबू मेरे देश की

प्रेमचंद विशेषांक: खुशबू मेरे देश की

मुंशी प्रेमचंद की कहानियां लगभग १०० वर्ष बीत जाने पर भी उतनी ही प्रासंगिक लगतीं हैं जितनी कि प्रकाशित होते समय रही होंगी। शायद उनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण उनकी रचनाओं का किसी समय या परिस्थिति विशेष से परे, मानवीय संवेदनाओं और संबंधों से जुड़े होना ही है। कुछ […]

by July 24, 2017 Articles, Review
जाते जाते

जाते जाते

मन जब बहुत विचलित हो जाता है तो दूर तक देखने का प्रयास करती हूँ… इतनी दूर जहां तारों का जमघट, कंक्रीट के जंगल खत्म हो जाएं.. नज़र आएं तो केवल पेड़ों की फुगनियाँ… बित्ते भर की दूरी पर टहनियाँ टकराकर, मानो एक दूजे को आलिंगन में भरती हों… रूई […]

by July 12, 2017 Articles, Fiction, Kuch Panne
सुबह सुबह

सुबह सुबह

सुबह सुबह बारिश की बूँदें झिलमिलाती सी आँगन में उतर आएं तो माहौल में एक अलग ही ताज़गी अनुभव होती है। धुले से पत्ते और पंख समेटे शाखों पे बैठे मासूम से पंछी, नवजीवन के स्वागत पटल पर झूमती रंग बिरंगी लड़ियों से लगते हैं मुझे। सच अजब हैं ये […]

by July 9, 2017 Articles, Fursat ke Pal
Reign

Reign

राजा रानी, बचपन से ही अजब लगता था, इनकी कहानियां सुनना, एक ऐसे संसार की कल्पना करना, जहां सब कुछ आपकी मर्जी से हो, आप न कहें तो पत्ता तक न हिले.. नौकर चाकर चौबीसों घण्टे हुक्म बजाने को हाज़िर हों.. आपके खाने,पहननेे, मन बहलाने को सारी दुनिया कदमों तले.. […]

by July 9, 2017 Articles, Fursat ke Pal
प्रगट सन्तोषी माता मंदिर

प्रगट सन्तोषी माता मंदिर

वे चुपके से आयीं और मेरी साथ की कुर्सी सरका कर बगल में बैठ गईं। अक्सर यूँ ही करतीं हैं। सूती साड़ी, माथे पर बिंदी, बालों में तेल; और मन में एक नयी कहानी। उनकी भाव भंगिमा देखकर समझ जाती हूँ कि आज फिर कुछ नया सुनने को मिलेगा मुझे। […]

by June 9, 2017 Articles, Kuch Panne
रब तेरा शुक्राना

रब तेरा शुक्राना

“पटना के सरदार गुरमीत सिंह कपड़ों की अपनी पुश्तैनी दुकान संभालते हैं।लेकिन रात होते ही वे 90 साल पुराने और 1760 बेड वाले सरकारी पटना मेडिकल कॉलेज और हॉस्पीटल के मरीज़ों के लिए मसीहा बन जाते हैं। बीते 20 साल से गुरमीत सिंह हर रात लावारिस मरीज़ों को देखने के […]

by April 19, 2017 Articles
Women’s Day

Women’s Day

“घर का काम नहीं करेगी, तो उसे लायी किसलिए हूँ?” तल्ख़ मिज़ाज़ी से उसने कहा.. हम सब थोड़ा सा अचकचाये, फिर कह ही दिया कि इस बात के लिये नहीं होती बेटे की शादी.. इस पर उनका दूसरा पत्ता, “जब मैं ब्याह कर आयी, मैं भी तो करती थी… और […]

by March 8, 2017 Articles, Events, Kuch Panne
Is Chaos Always Bad?

Is Chaos Always Bad?

Life is a journey and there are many pit stops. Often we get lost mid way, considering the momentary stop as the end. The red flag often appears at the wrong intersection and is able to bring the entire train to a screeching halt. As and when it happens, life […]

by March 1, 2017 Articles