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सुरेश चंद्रा : कवि

सुरेश चंद्रा : कवि

कहते हैं शब्दों में बहुत ताकत है.. हौले से गुनगुनाये जाएं तो दिल में उतर आते हैं.. जोश से गुने जाएं तो क्रांतिकारी बना देते हैं.. और जब एक एक शब्द चुन, मन की सलाईयों पर बुन कवि के अपने अलहदा अंदाज़ में पेश किए जाएं, तो अमिट छाप छोड़ […]

by August 15, 2017 Articles
Lord Krishna

Lord Krishna

When I look at this painting by Raja Ravi Verma, I am swayed by many emotions… He was a pioneer of poster making and responsible for allowing household and common people, to keep and pray to beautiful portraits of their revered God’s and Goddesses at their homes .. How art […]

by August 15, 2017 Articles
अनहोनी

अनहोनी

बहुत कोशिश करती हूं कि नेगटिविटी दूर रख पाऊं… दुख दर्द इतना है संसार में… गर हावी होने दिया तो मुस्कुराहट ढूंढे न मिलेगी किसी चेहरे पर.. टीवी नहीं देखती, अखबार भी नहीं पढ़ती, व्ट्सएप पर आने वाले संदेश फोरवड भी नहीं करती… क्योंकि ज़्यादातर अफवाह और नेगेटिव बातों से […]

by August 13, 2017 Articles, Kuch Panne
सुबह का सूरज

सुबह का सूरज

सुबह का सूरज उम्मीद के पंख लिए आता है… रात की कालिमा को भोर की लालिमा से हरता… पंछियों के गुंजन से सुप्त चेतना को धीमे से जागृत कर.. बदलियों की टुकड़ियों के ठीक पीछे, हौले से मुस्काता.. हल्दी का टीका, माथे पर धर, बांका सूरज… चला है रात रानी […]

by August 10, 2017 Articles, Fursat ke Pal, Kuch Panne
प्रेमचंद विशेषांक: खुशबू मेरे देश की

प्रेमचंद विशेषांक: खुशबू मेरे देश की

मुंशी प्रेमचंद की कहानियां लगभग १०० वर्ष बीत जाने पर भी उतनी ही प्रासंगिक लगतीं हैं जितनी कि प्रकाशित होते समय रही होंगी। शायद उनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण उनकी रचनाओं का किसी समय या परिस्थिति विशेष से परे, मानवीय संवेदनाओं और संबंधों से जुड़े होना ही है। कुछ […]

by July 24, 2017 Articles, Review
जाते जाते

जाते जाते

मन जब बहुत विचलित हो जाता है तो दूर तक देखने का प्रयास करती हूँ… इतनी दूर जहां तारों का जमघट, कंक्रीट के जंगल खत्म हो जाएं.. नज़र आएं तो केवल पेड़ों की फुगनियाँ… बित्ते भर की दूरी पर टहनियाँ टकराकर, मानो एक दूजे को आलिंगन में भरती हों… रूई […]

by July 12, 2017 Articles, Fiction, Kuch Panne
सुबह सुबह

सुबह सुबह

सुबह सुबह बारिश की बूँदें झिलमिलाती सी आँगन में उतर आएं तो माहौल में एक अलग ही ताज़गी अनुभव होती है। धुले से पत्ते और पंख समेटे शाखों पे बैठे मासूम से पंछी, नवजीवन के स्वागत पटल पर झूमती रंग बिरंगी लड़ियों से लगते हैं मुझे। सच अजब हैं ये […]

by July 9, 2017 Articles, Fursat ke Pal
Reign

Reign

राजा रानी, बचपन से ही अजब लगता था, इनकी कहानियां सुनना, एक ऐसे संसार की कल्पना करना, जहां सब कुछ आपकी मर्जी से हो, आप न कहें तो पत्ता तक न हिले.. नौकर चाकर चौबीसों घण्टे हुक्म बजाने को हाज़िर हों.. आपके खाने,पहननेे, मन बहलाने को सारी दुनिया कदमों तले.. […]

by July 9, 2017 Articles, Fursat ke Pal