Nano fiction

विस्थापन

मैडमजी कमिसन तो आ गया, एरियल कब मिलेगा? भाषा का कचूमर बनाती, आवाज़ सुन, याद आ गए मुझे माली काका। कैंडेलबा, देहेलबा, बूग्नबा की पुकार लगाते। मैं पेट पकड़कर हंसती, जब वो केसवा बिस्किट संग लिप्टनवा चाह की चुस्कियां लेते। पर आज सूझा। विस्थापित भाषा हो या इंसान, दूसरों के […]

by November 27, 2015 Nano fiction