Nano fiction

काली चट्टान

काली चट्टान

काली चट्टान के पीछे सफेद झरने के नीचे बुदबुदे होंठों कांपते हाथों से कई खत लिखे पर दिल की बात जु़बां पर आ न पाई आज एक अनोखा काम कर आई हूँ हर पत्ते पर बस तेरा नाम लिख आई हूँ ! Anupama ऐ थके हारे मानव! बारिश की बूंदों […]

by May 6, 2017 Nano fiction
पहली बारिश

पहली बारिश

सौंधी सौंधी सी खुशबू और ढेर सारी ब्यार लगता है जैसे बादलों को भी होने लगा प्यार तभी तो तेज़ धूप में भी बरस रहे हैं पहली बारिश की बूंदों से तपती धरती की मांग भर रहे हैं। Anupama I Had written it on 5th May 2014 when first rain […]

by May 5, 2017 Nano fiction
हिचकी

हिचकी

ये हिचकी क्या होती है? क्या वो झिझक जो दिल की बात गले में अटका देती है या वो तड़प जो किसी की याद में मन जला देती है जो भी हो बड़ी खतरनाक है हमारा हाल सारे जमाने को बताए देती है !! Anupama

by May 1, 2017 Nano fiction
नाव

नाव

मूर्तिकार के कुशल हाथों में अनगढ़ माटी की मूरत प्रेम पगी यादों केे साये में सुघड़ जीवंत सूरत तन कठोर, कोमल भाव लहर लहर, जीवन नाव Anupama

by April 8, 2017 Hindi Poetry, Nano fiction
बला

बला

“बला” भागते शहर का व्यस्त चौराहा और उसके बीचोंबीच बनी सीमेंट की तिकोनी पट्टी, कबूतरों का जमघट-सा लगा रहता दिनभर। पंछियों को चारा देने से आई बला टल जो जाती है। पर सांझ ढलते ही नज़ारा बदल जाता। मुन्नू चुपचाप झाड़ू ले, बिखरे दानों को समेट लाता। बला की कौन […]

by January 18, 2017 Nano fiction

Cobweb

Moving at rocket speed, I bump into many… comets, meteors fall, moon rises, sun sets… Trees sway, Birds sing, cat naps, lights blink… Smiles, Laughs, Discussions, like a hungry sponge, I take everything in… And then I sit back, staring at that cobwebbed window, feeling warmth of scattered rays, sparkling […]

by January 9, 2017 Fiction, Nano fiction
Ways of Life

Ways of Life

As I sit calmly, nodding, smiling, without any forced inputs, each one of them begins to talk about their unique problems, goals, achievements… their own, very own understanding of life… And then it boils down to one thing… We are puppets, doing our best, rest is in His hands… Yes, […]

by January 9, 2017 Fiction, Nano fiction
Abstract

Abstract

Poetry is beautiful in its abstractness……when inspiration is unknown….. reasons ambiguous…… impact increases manifolds…..every verse belongs to u and only u…..probably that’s why now I love reading Classic Poets minus the compulsory need to go into their life details…never enjoyed them while studying….. now am free to interpret their meaning […]

by January 2, 2017 Nano fiction