Nano fiction

हैप्पी हिंदी दिवस

हैप्पी हिंदी दिवस

कार्यालय में आदेश आया कि 14 सितम्बर को हिंदी में ही कार्य करें व अपने सहकर्मियों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करें… मेरी सहज हृदया पटु वक्ता चंचल चपल सखी ने झट प्रश्न दागा.. File को कैसे लिखूं सर… नाक पर चश्मा टिकाते, धीर गम्भीर अधिकारी तपाक से […]

by September 14, 2017 Events, Nano fiction
स्पेलिंग

स्पेलिंग

जब जैसा लिखने लगो, वही भाने लगता है… पहले स्पेल्लिंगस को लेकर बहुत सजग थी.. पर अब by डिफ़ॉल्ट you का u ही लिखती हूँ… बेचारे दो अल्फाबेट्स क़ुर्बान हो गये.. कभी पढा था कि जब अंग्रेज़ी को लिखा जाना शुरू किया गया तो स्पेल्लिंगस को लेकर बहुत confusion होता […]

by June 11, 2017 Nano fiction
काली चट्टान

काली चट्टान

काली चट्टान के पीछे सफेद झरने के नीचे बुदबुदे होंठों कांपते हाथों से कई खत लिखे पर दिल की बात जु़बां पर आ न पाई आज एक अनोखा काम कर आई हूँ हर पत्ते पर बस तेरा नाम लिख आई हूँ ! Anupama ऐ थके हारे मानव! बारिश की बूंदों […]

by May 6, 2017 Nano fiction
पहली बारिश

पहली बारिश

सौंधी सौंधी सी खुशबू और ढेर सारी ब्यार लगता है जैसे बादलों को भी होने लगा प्यार तभी तो तेज़ धूप में भी बरस रहे हैं पहली बारिश की बूंदों से तपती धरती की मांग भर रहे हैं। Anupama I Had written it on 5th May 2014 when first rain […]

by May 5, 2017 Nano fiction
हिचकी

हिचकी

ये हिचकी क्या होती है? क्या वो झिझक जो दिल की बात गले में अटका देती है या वो तड़प जो किसी की याद में मन जला देती है जो भी हो बड़ी खतरनाक है हमारा हाल सारे जमाने को बताए देती है !! Anupama

by May 1, 2017 Nano fiction
नाव

नाव

मूर्तिकार के कुशल हाथों में अनगढ़ माटी की मूरत प्रेम पगी यादों केे साये में सुघड़ जीवंत सूरत तन कठोर, कोमल भाव लहर लहर, जीवन नाव Anupama

by April 8, 2017 Hindi Poetry, Nano fiction
बला

बला

“बला” भागते शहर का व्यस्त चौराहा और उसके बीचोंबीच बनी सीमेंट की तिकोनी पट्टी, कबूतरों का जमघट-सा लगा रहता दिनभर। पंछियों को चारा देने से आई बला टल जो जाती है। पर सांझ ढलते ही नज़ारा बदल जाता। मुन्नू चुपचाप झाड़ू ले, बिखरे दानों को समेट लाता। बला की कौन […]

by January 18, 2017 Nano fiction

Cobweb

Moving at rocket speed, I bump into many… comets, meteors fall, moon rises, sun sets… Trees sway, Birds sing, cat naps, lights blink… Smiles, Laughs, Discussions, like a hungry sponge, I take everything in… And then I sit back, staring at that cobwebbed window, feeling warmth of scattered rays, sparkling […]

by January 9, 2017 Fiction, Nano fiction