Kuch Panne

काकभुशुण्डि और कर्म

काकभुशुण्डि और कर्म

कुछ प्रसंग पढ़ते समय जितने गहरे लगते हैं, उस से कहीं ज़्यादा गहरे हुआ करते है.. रामायण महाभारत और पुराण, ऐसे ही कई बहुआयामी प्रसंग खुद में समेटे है… कभी काकभुशुंडी की एक कथा पढ़ी थी.. काकभुशुंडी महाज्ञानी थे, परंतु अहंकार के चलते उन्हें श्राप मिला और वे कौवे की […]

by August 5, 2017 Kuch Panne
स्कूल

स्कूल

आज बरसों बाद सरकारी स्कूल में जाना हुआ… पुराने ब्लैक बोर्ड पर नया वाला पेस्ट कर रखा था… दीवारों पर पलस्तर उखड़े, पंखे ढुलमुल सी चाल चलते.. और खिड़कियों पर धूप और बारिश से बचाव के लिए टूटे शीशों पर मोटी प्लास्टिक शीट चढ़ी हुई… कुल मिलाकर लीपा पोती कर […]

by July 30, 2017 Kuch Panne
जाते जाते

जाते जाते

मन जब बहुत विचलित हो जाता है तो दूर तक देखने का प्रयास करती हूँ… इतनी दूर जहां तारों का जमघट, कंक्रीट के जंगल खत्म हो जाएं.. नज़र आएं तो केवल पेड़ों की फुगनियाँ… बित्ते भर की दूरी पर टहनियाँ टकराकर, मानो एक दूजे को आलिंगन में भरती हों… रूई […]

by July 12, 2017 Articles, Fiction, Kuch Panne
प्रगट सन्तोषी माता मंदिर

प्रगट सन्तोषी माता मंदिर

वे चुपके से आयीं और मेरी साथ की कुर्सी सरका कर बगल में बैठ गईं। अक्सर यूँ ही करतीं हैं। सूती साड़ी, माथे पर बिंदी, बालों में तेल; और मन में एक नयी कहानी। उनकी भाव भंगिमा देखकर समझ जाती हूँ कि आज फिर कुछ नया सुनने को मिलेगा मुझे। […]

by June 9, 2017 Articles, Kuch Panne
स्वागतम

स्वागतम

2 साल पहले, आज ही के दिन, आये भूकम्प के बाद लिखा था ये पन्ना… सुबह साढ़े पांच बजे नींद खुल गई। कानों में पंछियों की चहचहाट रस घोल रही थी। पर्दा खींच कर एक तरफ हटाया तो ठंडी सी हवा भी तन को छूने लगी। उचक कर दरवाजे के […]

by April 26, 2017 Fursat ke Pal, Kuch Panne
मार्कण्डेय

मार्कण्डेय

जब सवाल तमक कर उठते हैं, तब मन के किसी कोने में छुपे जवाब चुपचाप, गर्दन झुकाये, खुद को खोज लिये जाने का इंतज़ार करते हैं… आज सुबह मन में चिरंजीवी शब्द ने कौतूहल रचा था.. दिन भर इसी बारे में पढ़ती रही.. कितनी ही कथाएँ, किंवदन्तियाँ, धार्मिक आस्था के […]

by April 11, 2017 Kuch Panne

शब्द

“जब अंधकार हद से गुजर जाए सवेरा नज़दीक होता है। बड़े बूढ़ों ने कहा था। कभी आज़माया नहीं।” लगभग चार साल पहले लिखीं थीं ये पंक्तियां, किसी मुड़े तुड़े कागज़ के टुकड़े पर… शायद तब उजाले की उम्मीद में जीती थी.. नहीं जानती थी कि अंधकार भी उतना ही प्रेरक […]

by April 7, 2017 Kuch Panne
आस्था

आस्था

आज किसी से लंबी चौड़ी बात हुई, उनके धर्म और आस्था के बारे में… सहज उत्सुकता थी मन में, और उनके विश्वास और अभिव्यक्ति के प्रति सरल समर्थन भी.. पर अचानक वे मंदिरों और पूजा पाठ की सभी विधियों पर ऊँगली उठाने लगी.. जबकि हिन्दू धर्म के बारे में उनकी […]

by April 3, 2017 Kuch Panne