Kuch Panne

जाते जाते

जाते जाते

मन जब बहुत विचलित हो जाता है तो दूर तक देखने का प्रयास करती हूँ… इतनी दूर जहां तारों का जमघट, कंक्रीट के जंगल खत्म हो जाएं.. नज़र आएं तो केवल पेड़ों की फुगनियाँ… बित्ते भर की दूरी पर टहनियाँ टकराकर, मानो एक दूजे को आलिंगन में भरती हों… रूई […]

by July 12, 2017 Articles, Fiction, Kuch Panne
प्रगट सन्तोषी माता मंदिर

प्रगट सन्तोषी माता मंदिर

वे चुपके से आयीं और मेरी साथ की कुर्सी सरका कर बगल में बैठ गईं। अक्सर यूँ ही करतीं हैं। सूती साड़ी, माथे पर बिंदी, बालों में तेल; और मन में एक नयी कहानी। उनकी भाव भंगिमा देखकर समझ जाती हूँ कि आज फिर कुछ नया सुनने को मिलेगा मुझे। […]

by June 9, 2017 Articles, Kuch Panne
स्वागतम

स्वागतम

2 साल पहले, आज ही के दिन, आये भूकम्प के बाद लिखा था ये पन्ना… सुबह साढ़े पांच बजे नींद खुल गई। कानों में पंछियों की चहचहाट रस घोल रही थी। पर्दा खींच कर एक तरफ हटाया तो ठंडी सी हवा भी तन को छूने लगी। उचक कर दरवाजे के […]

by April 26, 2017 Fursat ke Pal, Kuch Panne
मार्कण्डेय

मार्कण्डेय

जब सवाल तमक कर उठते हैं, तब मन के किसी कोने में छुपे जवाब चुपचाप, गर्दन झुकाये, खुद को खोज लिये जाने का इंतज़ार करते हैं… आज सुबह मन में चिरंजीवी शब्द ने कौतूहल रचा था.. दिन भर इसी बारे में पढ़ती रही.. कितनी ही कथाएँ, किंवदन्तियाँ, धार्मिक आस्था के […]

by April 11, 2017 Kuch Panne

शब्द

“जब अंधकार हद से गुजर जाए सवेरा नज़दीक होता है। बड़े बूढ़ों ने कहा था। कभी आज़माया नहीं।” लगभग चार साल पहले लिखीं थीं ये पंक्तियां, किसी मुड़े तुड़े कागज़ के टुकड़े पर… शायद तब उजाले की उम्मीद में जीती थी.. नहीं जानती थी कि अंधकार भी उतना ही प्रेरक […]

by April 7, 2017 Kuch Panne
आस्था

आस्था

आज किसी से लंबी चौड़ी बात हुई, उनके धर्म और आस्था के बारे में… सहज उत्सुकता थी मन में, और उनके विश्वास और अभिव्यक्ति के प्रति सरल समर्थन भी.. पर अचानक वे मंदिरों और पूजा पाठ की सभी विधियों पर ऊँगली उठाने लगी.. जबकि हिन्दू धर्म के बारे में उनकी […]

by April 3, 2017 Kuch Panne
होली : फागुन का चांद

होली : फागुन का चांद

धीमे-धीमे गहराती शाम। थका-मांदा सूरज दिन भर की चमक-दमक के बाद अपनी आभा खुद में समेटे,अपनी प्रेयसी संध्या के कांधे पर हाथ डाले आकाश रथ से क्षितिज की ओर अग्रसर हो चला है। होली का दिन था न आज, मस्ती भरा। इंद्रधनुषी थी उसकी सुबह, लाल-पीले-नीले-जामुनी रंगों में चहकती सी। […]

by March 13, 2017 Kuch Panne
कील

कील

आज एक नयी कहानी सुनायी उन्होंने.. किसी मंदिर की मान्यता के बारे में… कि कैसे एक औरत शादी के 30 साल बाद मां बनने का सुख पा सकी… और अपनी मुराद पूरी होने पर घुटनों पर बच्चों सी रिढ़ते हुये मन्दिर के द्वार पर माता का धन्यवाद देने गयी… मैं […]

by March 9, 2017 Fiction, Kuch Panne