Kuch Panne

प्यार या परवाह

प्यार या परवाह

कुछ समय पहले Forrest Gump देखी थी, टॉम हैंक्स जो भी किरदार निभाते हैं, इतनी शिद्दत से उसे स्क्रीन पर उतारते हैं कि आप कहानी को सच समझ बैठें, और उस किरदार के साथ आने वाली परेशानियों और खुशियों में शामिल हो जाएं.. बस यही हाल मेरा था, जब जब […]

by January 16, 2018 Fursat ke Pal, Kuch Panne
दर्पण

दर्पण

तुम कभी इस कदर फूट फूट कर रोए कि अंतड़ियों में बल पड़ जाएं… मुंह फाड़कर, बिन आवाज़ किए, इतनी ज़ोर से चींखे कि आत्मा के कानों में पस पड़ जाए… अपनी ही धड़कनों का धोंकनी सा धधकना महसूसा कभी.. हाथ जोड़, सर पटक, मर जाने की गुज़ारिश की कभी… […]

by January 2, 2018 Fiction, Kuch Panne
सितारों की पालकी

सितारों की पालकी

काश किसी रोज़ बादलों की मखमली चादर ओढे़ देर तक सोती रहती। सूरज अपनी चिलमिलाती धूप को बरगद की छांव में छिपा कर, दबे पांव किरणों का इंद्रधनुष अपनी हथेलियों में समेटे, मेरे करीब आता। गुलाब की पंखुडियां नशीली हवा में झूमती, हौले से पांवों में गुदगुदी करतीं। ओस की […]

by December 10, 2017 Fursat ke Pal, Kuch Panne

आवरण

10 बाय 10 के कमरे में दो फुट के रोशनदान से आती रोशनी देखकर गढ़ लेती हूं, गुनगुने ख़्वाब… हाथ बढ़ाकर, खुली आंखों से छू लेती हूं, जगमग आग का गोला… मन की खिन्नता, उंगलियां जला देती है.. पल भर की खुशी, दिल गुदगुदा जाती है… ठन्डे फर्श पर पांव […]

by November 26, 2017 Kuch Panne

सड़न

उत्सव, खुशी, जीवन, उमंग… सकारात्मक ऊर्जा बहती है इनमें… मन भावविभोर हो, डोलता है… तन में स्फूर्ति और सोंदर्य स्वयमेव प्रकट हो जाते हैं… जैसे कोई सोता फूट पड़ा हो… चट्टानों को भेेदता, ऊंचाइयों को रोंदता.. धरातल से मिलन को आतुर प्रेयस सा अधीर… आह! पल पल मधुर गान, सुमन […]

by October 2, 2017 Kuch Panne
अनहोनी

अनहोनी

बहुत कोशिश करती हूं कि नेगटिविटी दूर रख पाऊं… दुख दर्द इतना है संसार में… गर हावी होने दिया तो मुस्कुराहट ढूंढे न मिलेगी किसी चेहरे पर.. टीवी नहीं देखती, अखबार भी नहीं पढ़ती, व्ट्सएप पर आने वाले संदेश फोरवड भी नहीं करती… क्योंकि ज़्यादातर अफवाह और नेगेटिव बातों से […]

by August 13, 2017 Articles, Kuch Panne
सुबह का सूरज

सुबह का सूरज

सुबह का सूरज उम्मीद के पंख लिए आता है… रात की कालिमा को भोर की लालिमा से हरता… पंछियों के गुंजन से सुप्त चेतना को धीमे से जागृत कर.. बदलियों की टुकड़ियों के ठीक पीछे, हौले से मुस्काता.. हल्दी का टीका, माथे पर धर, बांका सूरज… चला है रात रानी […]

by August 10, 2017 Articles, Fursat ke Pal, Kuch Panne
काकभुशुण्डि और कर्म

काकभुशुण्डि और कर्म

कुछ प्रसंग पढ़ते समय जितने गहरे लगते हैं, उस से कहीं ज़्यादा गहरे हुआ करते है.. रामायण महाभारत और पुराण, ऐसे ही कई बहुआयामी प्रसंग खुद में समेटे है… कभी काकभुशुंडी की एक कथा पढ़ी थी.. काकभुशुंडी महाज्ञानी थे, परंतु अहंकार के चलते उन्हें श्राप मिला और वे कौवे की […]

by August 5, 2017 Kuch Panne