Hindi Poetry

आंसू

आंसू

कभी कभी अच्छा लगता है फूट फूट कर रो देना गरम आंसुओं का गालों पर ढुलकना होंठों को छू जाना चखे हैं मैंने खारे नहीं होते… Anupama

by March 9, 2017 Hindi Poetry
ऊंचा आसमां

ऊंचा आसमां

आसमां यकायक बहुत ऊंचा हो गया है दूर कहीं फलक पर सूरज चमक रहा है। बादल भी छितरे से हैं कहीं गहरे नीले तो कहीं धुंधलाए से सफेद जैसे स्याही की शीशी उड़ेल दी हो किसी अनाड़ी ने। क्षितिज पर लिखे अक्षर मिट से गए हैं क्या मालूम कभी कुछ […]

by March 5, 2017 Hindi Poetry, My Published Work
सनम

सनम

हौले से मैना मुस्काई कोयल भी ज़रा सी शर्माई तितली भंवरे फूलों से कहें आ फागुन के गीत हम मिलके बुनें आमों की कच्ची कलियां चुनें सेमल की पत्तियों को हम गिनें वो उड़ती चीलें अलबेली वो डरती सहमी गिलहरी हाथों में हाथ जो थाम लें हम छोड़ें न साथ […]

by March 5, 2017 Hindi Poetry
स्मृति चिन्ह

स्मृति चिन्ह

स्मृति चिन्ह हमेशा मीठे होते हैं कड़वी यादों के पल भी हल्की सी चीनी तो घोल ही जाते हैं रिश्तों में। याद कराते हैं न कि कैसे उन पलों को जिया था जब ज़िंदगी रूठी सी लगती थी अंधेरा छंटने का नाम ही न लेता था वो गुफा खाई की […]

by February 25, 2017 Hindi Poetry
जल

जल

बहता दरिया घुमड़ते बादल पिघलते ग्लेशियर नभ से भूतल तक तैरता, उड़ता, फिसलता केवल जल ! पथरीली राहों में काली घटाओं में संकरी गुफाओं में आंखों से सांसों तक सहता, रिसता, चिहुंकता केवल जल ! तरसती निगाहों में बहकती सांसों में, दहकती आहों में कोरों से होंठों तक टपकता, महकता, […]

by February 21, 2017 Hindi Poetry
बेड़ियां

बेड़ियां

कितनी बेड़ियों में जकड़े हैं किससे कब कितना कहना कहाँ कब कैसे सिमट लेना कितनी हदें, कितनी बंदिशें अनगिनत ख़्वाब, बेहिसाब ख्याल और एक अजानी सी चुप जाने ये बुलबुले टूटते कैसे नहीं Anupama

by February 18, 2017 Hindi Poetry
बाकी

बाकी

न जीने की जुस्तजू न मरने का इरादा बाकी है रक़्स ओ अक़्स हुए फना रस्म ए कफ़न बाकी है ख्यालोंं के अलाव में, मासूम हर्फ़ राख हुए टुकड़ों का होश नहीं, मुठ्ठी भर रूह बाकी है ज़लज़ले के खेल में, ख्वाब सारे गर्त हुए ज़ख्मों का मालूम नहीं, चोटों […]

by February 12, 2017 Hindi Poetry
कजली

कजली

कजली आँखें, गाल गुलाबी पायल छनके जाए गुपचुप देखे अपना कान्हा बावरी भटकी जाए ठुमक ठुमक चले जो प्यारी बगिया महकी जाए बंसी, गोपी, गाँव की गोरी सारी छोड़ के आए नन्हे कान्हा बेरी समेटे पीछे भागे अाए जैसे ही दिखे सांवरा भृकुटि तनी दिखाए खट्टी इमली भाती मुझको काहे […]

by February 10, 2017 Hindi Poetry