Hindi Poetry

परिभाषा

परिभाषा

ढेरों शब्द गूंजते हैं परिभाषाएं लोटपोट होने लगतीं हैं राह पर फिसलते संभलते यकायक ठहरती हूँ आँखें मूँद लेती हूँ दम साध जीवन का मौन हाथ थाम लेता है अब सब शांत है Anupama

by January 9, 2017 Hindi Poetry
तोड़ दो

तोड़ दो

तोड़ दो पंख उम्मीदों के खुशियों के होंठ गोंद से चिपका दो न सजने दो सपनों के महल खुली खिड़कियों पे काले पर्दे चढ़ा दो रोशनी बिखेरते उन तारों को अँधेरे का मतलब समझाओ गाढ़ दो उन जुगनुओं को मिट्टी में बेमतलब चमकने की सज़ा दिलवाओ नोंच दो उस खिले […]

by January 5, 2017 Hindi Poetry
शायर

शायर

पसीना बहा सफेद पन्नों पर नज़्में नहीं लिखी जातीं न किसी की खिल्ली उड़ा गज़लों में जान आती है जज़्ब करने पड़ते हैं आंसू खून जलाया जाता है नासूर से गलती हड्डियों से टपकता मवाद खूबसूरत परतों में सहेज लफ्ज़ों में सजाया जाता है तब उभरती है कागज़ की ज़मीन […]

by December 2, 2016 Hindi Poetry, My Published Work
छटपटाहट

छटपटाहट

अजब छटपटाहट है मन में पंख फड़फड़ाते हैं उड़ते नहीं कदम लड़खड़ाते हैं संभलते नहीं दम घुटता है सिसकियां थमतीं नहीं भरसक कोशिश के बावज़ूद बेचैन हूँ 10 बाय 10 के कमरे में 2 बाय 2 के रोशनदान से छँटकर आती किरणों को महसूस करती हूँ भागकर दरवाज़े तक जा […]

by November 29, 2016 Hindi Poetry
लाली

लाली

मैंने कहा सूरज गुलाबी, तुमने कहा नहीं सुनहला मैंने कहा झील पीली, तुमने कहा, न न, नीली मैंने कहा चाँद हरा, तुमने कहा, नहीं रे लाली!! मैंने आँखें तरेरी, होंठ दबा कर कहा, हवा रंगीली, इस बार तुम चुप थे… झोंकों में मेरा अक़्स ढूंढते… Anupama

by November 28, 2016 Hindi Poetry
सुकूँ

सुकूँ

शब्दों को उलट कर देखा बातों को पलट कर देखा सुकूँ न था न मिला हंसी के फव्वारे देखे जन्नत के नज़ारे देखे न न सुकूँ न मिला फूलों की ज़मीं पर तारों को बिछाकर देखा सूरज की कशिश में मन को पिघलाकर देखा फिर भी… न न न… यकायक […]

by November 28, 2016 Hindi Poetry
अलमस्त

अलमस्त

नहीं मानती नियमों को नहीं जानती क़ायदे लोक व्यवहार का ज्ञान नहीं नहीं मालूम फायदे पांव से कंकड़ उछाल दूं बेपर आसमां नाप दूं धूप की जरी घटा की कजरी चुनरी संग टांक लूँ मैं अलमस्त हवा पगली शरद सा श्रृंगार करूं Anupama

by October 5, 2016 Hindi Poetry
मज़दूरी

मज़दूरी

रात भर मज़दूरी कर सिखर दुपहरे सुस्त सा चाँद छज्जे से झूल रहा था अकडू सूरज को मस्ती सूझी अंटी से एक किरण उछाल दी जवानी के जोश में कूदती फांदती बिजली सी किरनिया बादल से जा टकराई दूधिया मेघा मौका पाकर ऊंघ रहा था रात भर पीपल से बतियाते […]

by September 18, 2016 Hindi Poetry