Hindi Poetry

सूरज कुछ आधा सा

सूरज कुछ आधा सा

चांद तो सबने देखा होगा आज मैंने सूरज देखा कुछ आधा सा काले बादलों के आगोश में समाता सा। अपनी लालिमा को समेटता मेघ की कालिमा बटोरता नये आशिक की तरह कभी ऐंठता कभी शर्माता सा। सहसा ख्याल आया ये कैसा मिलन? प्रकृति के प्रतिकूल नियमों का उल्लंघन! भिन्न भिन्न […]

by March 30, 2014 Hindi Poetry
सजीव निर्जीव

सजीव निर्जीव

बचपन में कभी सजीव निर्जीव का अंतर समझा था। सजीव वो जो चलता है बोलता है सांस लेता है सोचता है निर्जी व वो जो,है इससे बिल्कुल उलट दिखने में सुंदर पर असल में मरघट! कुछ बड़ी हुई तो इस अंतर पर गौर करने लगी अपनी तुलना पेड़ पौधों पंछियों […]

by March 27, 2014 Hindi Poetry
ज़हर

ज़हर

यहां की ज़मीं, यहां का आसमां यहां की हवा, यहां का पानी सब में बस ज़हर ही ज़हर भरा है। हर आदमी खुद से परेशान, दूसरों पर झुंझलाता यूं ही गुस्सा दिखाता। सबसे आगे निकल जाने की धुन में गिरता पड़ता ठोकरें खाता। एक अजीब सा माहौल है यहाँ, मेरी […]

by March 25, 2014 Hindi Poetry
ख्वाबों की कलम

ख्वाबों की कलम

ख्वाबों की कलम ले निकली मैं एक नया इतिहास रचने जहाँ हर पल एक नया अहसास हो जीवन की सच्चाइयों से साक्षात्कार हो। जज़बातों की सयाही में डुबो ये अनोखी कलम देखे मैंने कई सपने कुछ अनोखे कुछ वही अपने जहां थी शांति सुकून से भरी जहां थी हर घड़ी […]

by March 24, 2014 Hindi Poetry
मेट्रो

मेट्रो

बिजली की रफ्तार से भागती मेट्रो में बैठी थी मैं चुपचाप भीड़ का हिस्सा फिर भी अकेली कुछ कुछ उदास। नज़र घुमाइ मैंने इक बार जानने को औरों का हाल हर चेहरे पर पाई वही शून्यता खालीपन का अहसास। यूं तो हर पल सूकुन ढूंढते हैं हम तथाकथित भोगी दास […]

by March 22, 2014 Hindi Poetry
एक नया दौर

एक नया दौर

यूं ही बेवजह चलती मेरी जिंदगी में कुछ दिन पहले इक नया मोड़ आया खुशियों की बरसात औ सफलता की नयी सीढ़ी भी साथ लाया। जिस पे बस मुझे आंखें बंद कर इक कदम रखना था बिना सोचे समझे छोटा सा संकलप लेना था। आश्वासन थे कि ये इक नया […]

by March 1, 2014 Hindi Poetry