Hindi Poetry

बारिश

बारिश

बादल छाए हैं धुएं का आवरण आसमां को पहनाए हल्की हल्की बारिश की बूंदों से लहकती धरती अपनी बरसों की तृष्णा को तृप्त करने की पुरजोर कोशिश करती। एक तरफ असीम आकाश दूसरी तरफ अथाह पृथ्वी। और इन दो दिग्गजों के बीच विस्मित सी खड़ी मैं निरीह बालक सी परिस्थितियों […]

by April 17, 2014 Hindi Poetry

अंजलि

तेरा तुझको अर्पण करके भी मैं परेशान ऐसा तो हो नहीं सकता। शायद मेरे समर्पण में ही कोई कमी है। इसे पूर्ण करने की एक कोशिश और करूँ या छोड़ दूं इसे बीच राह में असमंजस तू ही सुलझा। चल एक बात तो मानी मेरे दुस्वप्न सच होते हैं। स्वप्नों […]

by April 15, 2014 Hindi Poetry
रचना

रचना

निराशा की गलियों में आशा का पता ढूंढती मेरी बेबस मूक चेतना! आंसुओं के सैलाब में खुशियों का तख्त तलाशती मेरी आहत आत्मिक वेदना! अपाहिजों के संसार में स्वस्थ मन सहेजती मेरी निर्बल लाचार प्रेरणा! कमज़ोर बेल सी मज़बूत पेड़ से लिपटती मेरी ये निशस्त्र मूढ़ रचना!

by April 12, 2014 Hindi Poetry
निद्रा

निद्रा

आंखें मूंदकर नींद का इंतज़ार करना भी एक अजीब सज़ा है। दिमाग सौ की रफ्तार से भाग रहा है दिल जाने किन यादों में डूबे जा रहा है और दिलोदिमाग की इस कशमकश का पूरा फायदा निंदिया रानी उठा रही हैं। जैसे कोई शिशु आनंदित हो इस बात से कि […]

by April 11, 2014 Hindi Poetry
दर्द

दर्द

दर्द श्वेत है दर्द श्याम है बच्चन की रोबीली आवाज़ में ये बात जितनी मार्मिक लगती थी दरअसल उतनी है नहीं। जब कल मेरे पांव में मोच आई तो अहसास हुआ दर्द तो बेरंग है और फिलहाल जल्दबाजी का फल है इसके आगे मूव और झंडु बाम भी फेल हैं। […]

by April 10, 2014 Hindi Poetry
प्रतिबिम्ब

प्रतिबिम्ब

कहते हैं आईना कभी झूठ नहीं बोलता खोल देता है राज़ सारे छुपा के रखे हों जो ज़ख़्म करारे। हम भी बैठ गए इस बात को आजमाने खुद को अपने ही प्रतिबिम्ब से मिलाने। कुछ पल दर्पण में ध्यान से देखा बाल बनाए संवारी चेहरे की रूपरेखा। और फिर झांकना […]

by April 9, 2014 Hindi Poetry
अधजले कागज़ के टुकड़े

अधजले कागज़ के टुकड़े

बिखरे थे अनजान गली के मोड़ पर अधजले कागज़ के कुछ टुकड़े मुड़े तुड़े कुछ काले कुछ उजले। थे शायद किसी टूटे दिल की दर्द भरी सिसकियां प्रेम से संजोई गुस्से में जलाई आखिरी पातियां। या थे किसी बेरोज़गार के नामंज़ूर हुए आवेदनों की वेदना बार बार की विफलता से […]

by April 4, 2014 Hindi Poetry
सेमल के फूल

सेमल के फूल

सेमल के फूल देख आज आप बहुत याद आए देख लाल पुष्प मानस पटल पर कई चित्र उभर आए। याद आया वो गुज़रा ज़माना जब ये फूल हमारी सैर का हिस्सा होते थे उनका आकार प्रकार एक नया किस्सा होते थे। पूछते थे लोग अक्सर क्यों धूप में यों भटकती […]

by April 2, 2014 Hindi Poetry