Hindi Poetry

पागल चिड़िया

पागल चिड़िया

हल्का नीला आसमां तेज़ी से बढ़ती सुफेद स्याह बदलियाँ कबूतरों की उड़ती पंक्तियाँ पतंगों की उलझती डोरियाँ वेग से झपटती चीलें चलीं छूने ऊंचाईयाँ। शायद बारिश आने वाली है खंभे पर बैठी वो पागल चिड़िया पंख फुला चोंच कटकटा यही चिल्ला रही है या उसे किसी की याद सता रही […]

by July 6, 2014 Hindi Poetry
भीगा

भीगा

भीगा भीगा सा दिन, भागा भागा सा मन ढका ढका आसमां, चले महकी पवन! वो दौड़ा गिल्लू, दिल करे छू लूँ छुपी छुपी मैना, तरसे मेरे नैना भीगा भीगा सा दिन, भागा भागा सा मन! छाए काले मेघा, बिखरे स्वर्णिम छटा छिपा सूरज उनमें, बरसे ये घटा उड़े उड़े बादल, […]

by June 26, 2014 Hindi Poetry
फूलों का पुल

फूलों का पुल

अमलतास के पीलों से जकरंदे के नीलों तक एक पुल बनाना चाहती हूँ गुलमोहर के आगों से सेमल के लालों का रिश्ता साधना चाहती हूँ। गूंथना चाहती हूँ इनकी चोटियां देखना चाहती हूँ इनकी यारियां। सोचो न, यूं ही किसी रोज़ सेमल के फूलों को गुलमोहर के पत्तों का साथ […]

by June 24, 2014 Hindi Poetry
मोम और पत्थर

मोम और पत्थर

जानते हो, मोम और पत्थर में क्या अंतर होता है? पत्थर टूटके बिखर जाता है और मोम पिघल के भी जुड़ जाता है! तो मोम सा रखो ये ‘मन’ टूटा नहीं, पिघला करो!!

by June 15, 2014 Hindi Poetry
ये मन मौसम

ये मन मौसम

सर्दी में तरसे, सूरज की झलक पाने को गर्मी में करे हाहाकार, धूप से निजात पाने को बरसात में फूंक फूंक रखे कदम कीचड़ से छुटकारा पाने को तो सूखे में पथरे ये आंखें बादल की एक झलक पाने को हाय रे मन बावरा! मौसम सा ही है शायद न […]

by June 15, 2014 Hindi Poetry
शब्दों का मकड़जाल

शब्दों का मकड़जाल

उलझ जाती हूँ इन शब्दों के मकड़जाल में। असीमित वाक्य अनकहेे स्वर विरामों में छुपे नए तथ्य। अब तो इन शब्दों की गर्दन दबोचना चाहती हूँ बांहें मरोड़ना पांव तोड़ना चाहती हूँ अर्क निकाल देना चाहती हूँ भाषा के इन प्रहरियों का शायद कुछ नए अर्थ समझ पाऊँ!

by June 15, 2014 Hindi Poetry
बादल

बादल

देखा यूं ही ध्यान से अभी वो आसमां न चांद दिखा न तारे कि छितरे काले मेघा झूमते पेड़ दिखे, गाती वायु घंटियाँ पल पल जीने को आतुर उन्मुक्त बदलियाँ हवा की सरसराहट भी थी उनमें पत्तों की फड़फड़ाहट भी आ रही है धीमे धीमे जीने की आहट भी!

by June 15, 2014 Hindi Poetry
शनि

शनि

Noticed the planet Saturn in sky tonight and couldn’t stop myself from writing this poem “आज पहली बार हुआ कि चांद देखा पर नज़र इक तारे पे अटक गई चांद में कमी न थी वो तो है ही हसीन पर उस तारे में कुछ बात थी न अपनी चमक को […]

by May 9, 2014 Hindi Poetry