Hindi Poetry

अर्पण

अर्पण

तेरा तुझको अर्पण करके भी मैं परेशान ऐसा तो हो नहीं सकता। शायद मेरे समर्पण में ही कोई कमी है। इसे पूर्ण करने की एक कोशिश और करूँ या छोड़ दूं इसे बीच राह में असमंजस तू ही सुलझा। चल एक बात तो मानी मेरे दुस्वप्न सच होते हैं। स्वप्नों […]

by April 15, 2017 Hindi Poetry
तन की थकन

तन की थकन

तन की थकन मन को दोहरा कर रही है दिमाग में ख्याल भरमाते हैं पर कलम की नोंक से कहीं दूर भाग जाते हैं मन हुंकार उठता है नहीं करना मुझे इन कागज़ों को काला-नीला नहीं भरना मुझे किसी कैनवस में रंग नहीं भागना मुझे रंगीली तितलियों के पीछे नहीं […]

by April 15, 2017 Hindi Poetry
पाखी

पाखी

नभ से जल तक अचल निश्छल मन से तन तक प्रेमिल स्नेहिल शब्द बने पाखी मचल मचल Anupama

by April 13, 2017 Hindi Poetry
पंछियों

पंछियों

पंछियों का चहकना फूलों का महकना सूरज का कसमसाना बादलों का गुर्राना घास का लहकना डाली का चटकना धुप की गोलियों का पत्तियों पे फिसलना ओस की बूंदों का मोती सा चमकना और उस लम्बी सी पगडंडी पे इक गूंजती सी आवाज़! सुनो! दिन कितना खुबसूरत है न आज!! Anupama

by April 10, 2017 Hindi Poetry
नाव

नाव

मूर्तिकार के कुशल हाथों में अनगढ़ माटी की मूरत प्रेम पगी यादों केे साये में सुघड़ जीवंत सूरत तन कठोर, कोमल भाव लहर लहर, जीवन नाव Anupama

by April 8, 2017 Hindi Poetry, Nano fiction
गृह प्रवेश

गृह प्रवेश

मृदंग की थाप नैवैद्य का थाल अगर की महक चन्दन की लहक प्रेम उन्मादित स्वर घंटिकाएं स्नेह आच्छादित स्वर्ण लतिकाएं गमकते केश महकते पुष्प दहकते नेत्र ममत्व स्वरूप अद्वितीय अनुभूति अलौकिक स्पर्श चिर प्रतीक्षित माँ सुमंगल गृह प्रवेश ! Anupama आप सबको अष्टमी पूजन व रामनवमी की शुभकामनाएं 🙂

by April 4, 2017 Hindi Poetry
अमरबेल

अमरबेल

I had written this poem two years ago, however, saw this scene again today. The Amarbel had enveloped not only a tree, but had also entangled a nearby building.. आज देखा मैंने एक अनोखा दृश्य पीला जाल सा था लिपटा पेड़ पर पहली नज़र में लगा खूबसूरत प्यार की बयार […]

by March 19, 2017 Hindi Poetry
सवाल

सवाल

सवालों के बवंडर मन को खंडहर बना दें तो… रेतीले तूफ़ान कोरों की नमी उड़ा दें तो.. रेशमी ख्वाब पोरों की नरमी भुला दें तो… ख़ामोश सहर दिल पर कहर बरपा दे तो…. तो… तो… कौन जाने सवाल ही सवाल हैं सारे जवाब तो खो गये सारे… Anupama

by March 16, 2017 Hindi Poetry