Fursat ke Pal

सृजन

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मत रोको विचारों के प्रवाह को, शब्दों की धार को, नदी के बहाव को। रूकते ही आक्रामक हो जाते हैं। सब बंधन तोड़ रिसावों से बहने लगते हैं। कुरेदने लगते हैं धरातल, खोखला हो जाता है रसातल और टूटने लगती हैं वो दीवारें, वो अवरोध जो बीच आ खड़े हुए। […]

by June 19, 2014 Fursat ke Pal
इंतज़ार की घड़ियां

इंतज़ार की घड़ियां

जब अंधकार हद से गुजर जाए सवेरा नज़दीक होता है। बड़े बूढ़ों ने कहा था। कभी आज़माया नहीं। उठ ही नहीं पाई कभी इतनी सुबह। चैन की नींद सोती रही न हमेशा। पर जब रात आंखों आंखों में गुज़रने लगे तो ऐसी सुनी सुनाई बातों पे ही विश्वास करने का […]

by April 24, 2014 Fursat ke Pal