Fursat ke Pal

ये मन

ये मन

कभी-कभी अनजाने ही आप कुछ लोगों के बेहद करीब आ जाते हैं। खास जगह बन जाती है उनकी आपकी ज़िंदगी में। और कभी बस यूं ही किसी से इतने परेशान कि सामने आना दूर की बात, समय-असमय हुआ टकराव भी चुभने लगता है। किस पर मढ़ें दोष? उन अदृश्य तरंगों […]

by May 8, 2016 Fursat ke Pal
वो कौन थी

वो कौन थी

आज फिर से उन्हीं गलियों से सामना हुआ। वही घूमती सड़कें, वही झूमते पेड़ और वही बूढ़ी अम्मां ! मेरा इस जगह से परिचय काफी पुराना है। एक समय था जब रोज़ यहाँ से गुज़रा करती थी। घंटे भर का सफ़र होता था घर से दफ्तर का। बस यूं ही […]

by May 4, 2016 Fiction, Fursat ke Pal
स्मृति

स्मृति

ये मन भी न अजीब है। गर्मियों की इस ऊबाऊ दोपहर में भी शीतल हवाओं से लबालब। याद आ रहा है मुझे वो भीगा सा मंजर जब पहली बार सागर की लहरों को महसूस किया था। सूरज सर पर था। धूप भी तेज। शायद वक्त भी अमूमन यही। पुरी का […]

by May 4, 2016 Fursat ke Pal
अंगड़ाई

अंगड़ाई

सुबह 6 बजे अंगड़ाई लेती उनींदी अँखियों में जब लिशकाते सूरज की किरणें काँटों सी चुभें तो मन करता है न बादलों की चादर सर पे ओढ़ लेने का ! रोम रोम पुकारने लगता है उस शरारती चाँद को जो अपनी ठंडक खुद में समेटे चुपचाप रात्रि के तीसरे पहर […]

by May 4, 2016 Fursat ke Pal
A Rainy Day

A Rainy Day

A Rainy Day तुम अक्सर कहते थे हमारी टाइमिंग मैच नहीं होती। सच भी है.. मैं पूरब हूँ तो तुम पश्चिम। न सोच एक सी न जीने का ढंग। एक जैसे होकर भी कितने जुदा हैं हम। और तो और ये मौसम भी साथ नहीं देता। गर्मी और लू में […]

by May 3, 2016 Fiction, Fursat ke Pal
उमंग

उमंग

सुबह सुबह बारिश की बूँदें झिलमिलाती सी आँगन में उतर आएं तो माहौल में एक अलग ही ताज़गी अनुभव होती है। धुले से पत्ते और पंख समेटे शाखों पे बैठे मासूम से पंछी, नवजीवन के स्वागत पटल पर झूमती रंग बिरंगी लड़ियों से लगते हैं मुझे। सच अजब हैं ये […]

by May 3, 2016 Fiction, Fursat ke Pal
Jpeg

फुर्सत के पल : 9

फिर खिले हैं सेमल.. ज्यों भूरी भूरी टहनियों पर लाल-पीले बल्ब टांग दिए हों किसी ने.. जानते हैं ये बहुत भाते हैं मुझे… परन्तु रंग-रूप, आकार-प्रकार के कारण नहीं.. बल्कि देखा जाये तो इनमें नैसर्गिक सौंदर्य न के बराबर है.. जब तक फूल न खिलें, इस पेड़ को पहचान भी […]

by March 14, 2016 Fiction, Fursat ke Pal
फुर्सत के पल : 8

फुर्सत के पल : 8

दूध की दो बूँद पानी में गिरते ही एक हल्का सा परिवर्तन ले आती हैं.. रंग, रूप, प्रकृति में… हाँ, दूध का स्वभाव है, आत्मसात हो जाना, इसलिये पूर्ण रूप से घुल जाता है, पानी के छोटे छोटे कणों में… अपनी चिकनाहट, श्वेत रंग, मधुर स्वाद को विलुप्त करता.. पर […]

by March 8, 2016 Fiction, Fursat ke Pal