Fursat ke Pal

प्रतीक्षा

प्रतीक्षा

प्रतीक्षारत होना सुख या दुख का शेष हो जाना है.. धरती का मुखर मौन बादलों की गड़गड़ाहट के सामने शांत नज़र आता है, परन्तु होता नहीं.. उद्वेलित होती है वो भी.. आंदोलित हो तड़पती भी है.. पर उसमें कोई परिवर्तन प्रत्यक्ष रूप में दिखता नहीं… गर्भगृह में होती हलचल से […]

by December 30, 2016 Fursat ke Pal
मुलाक़ात

मुलाक़ात

रातरानी की कलियों और गुलाब की पंखुरियों के बीचोंबीच, चहलकदमी करते, मेरी मुलाक़ात अक्सर खुद से हो जाती है.. वो मैं, जो दिन भर फाइलों के ढेर, कागज़ के टुकड़ों, कंप्यूटर स्क्रीन पर दौड़ते भागते शब्दों के पीछे, कहीं छुपी रहती हूँ.. दम लेने को उठती हूँ, सहकर्मियों से बतियाती […]

by December 9, 2016 Fursat ke Pal
बुनाई

बुनाई

कविताएँ मन के हथकरघे पर हौले-हौले आकार लेतीं हैं.. ज़मीन का सौंधापन, दिल की धड़कन, अहसासों के रंग साथ लिए आतीं हैं.. निपुण बुनकर अपनी उँगलियों पर थिरकते शब्दों को ताने-बाने में उलझाता नहीं… न ही वर्तनी को लंगड़ी कर अर्थ का अनर्थ करवाता है… उसे नहीं चाहिए क्षणिक उत्तेजना, […]

by November 30, 2016 Fursat ke Pal
जिये जा

जिये जा

तनावग्रस्त माहौल में हल्की फुल्की बातें अक्सर मर्म छू जातीं हैं.. आज कुछ ऐसा ही हुआ.. जहां एक और दफ्तर में ज़्यादातर लोग पैसे की किल्लत को लेकर परेशान थे, सरकार के फैसले और जनता की दिक्कतों का पुलिंदा खोला बन्द किया जा रहा था, वहीं एक सज्जन अपनी ठेठ […]

by November 28, 2016 Fursat ke Pal
स्मृति

स्मृति

अनमोल यादों का मोल क्या चुकाया जा सकता है…..बेमोल मिल जाएं तो ही सहेजी जा सकती हैं स्मृतियां ….वर्तमान के तराजू में गुज़रे कल के चिन्ह और आने वाले कल के मीठे पलों को अक्सर होड़ लगाये देखा है…..जीत-हार के लिए नहीं…. इस मन पर एकाधिकार जमाने को……पर भूतकाल भारी […]

by November 28, 2016 Fursat ke Pal
उधेड़बुन

उधेड़बुन

जीवन में कुछ भी निश्चित नहीं….हरेक पल नई चुनौती सा मुंह बाए खड़ा रहता है…स्वप्न लोक में बुनी अभिलाषाएं जाग्रित होते ही हवा में छूमंतर हो जाती हैँ…..बंद आंखों की किवाड़ों में सेंध लगाती किस्मत की परछाई से हर घड़ी जूझना होता है….क्षणभंगुर कहलाने वाले इस मृत्प्राय शरीर को अनथक […]

by November 28, 2016 Fursat ke Pal
हसीन ख़्वाब

हसीन ख़्वाब

चारों ओर फैला गहरा धुंआ… आँखों में किनमिन, सांसों में किरकिर.. शहर का हाल अजब.. दिन में सूरज फीका.. रात में चाँद सितारे नदारद.. फिज़ा सर्द है पर हवा लापता.. शायरी तो छोड़िये, कलाम भी मानो हड़ताल पर बैठ गया.. पर फिर भी ये मन, इस पर ज़ोर कहाँ… जाने […]

by November 6, 2016 Fursat ke Pal
शामियाना

शामियाना

घर लौटते वक्त बड़ा सा शामियाना दिखा मुझे। चार पांच Micky Mouse झूल रहे थे गेट पर और विशाल Mary Go Round चमकीले बल्बों की रोशनी बिखेरता घूम रहा था अपनी धुरी पर। शायद बच्चे का जन्मदिन मनाया जा रहा था। खुशियों के रंग खूबसूरत रंगरलियों के संग। कितना मधुर […]

by October 5, 2016 Fursat ke Pal