Fursat ke Pal

मैरी-गो राऊंड

मैरी-गो राऊंड

एक बिंदु पर तटस्थ है जीवन। धुरी पर हौले-हौले घूम रही हूँ। दुनिया से बेखबर खुद को एक आवरण में समेटे, निश्चिंत भाव से किस्मत पर यकीन करते हुए। जो भाग्य में है, मुझसे छिन नहीं सकता, जो नहीं है, कोई दे नहीं सकता, इसी फिलोसफी को आधार बना, खुशी […]

by January 11, 2017 Fursat ke Pal
फोटोज़

फोटोज़

अपना नाम और चेहरा किसे नहीं भाता… हमारा व्यक्तित्व दरअसल बहुत हद तक इसी बात से प्रभावित होता है कि हम खुद को कितना पसंद करते हैं… आज के सेल्फी युग ने चेहरे का महत्व और बढ़ा दिया है… जब मन चाहा, जहां चाहा, कैमरे में सूरत निहारी और खुद […]

by January 7, 2017 Fursat ke Pal
जुगनू

जुगनू

फेसबुक रोज़ पूछता है What’s on your mind? सोचा आज बता ही दें.. क्या है न दिमाग मैग्नेट है.. कील से लेकर एरोप्लेन तक खींचकर अपने सूक्ष्म तंतुओं में क़ैद कर लेने में पूर्णतया समर्थ.. जैसा सोचो, वैसा होता जाये.. फिल्म कुछ प्ले ही ऐसे होती है.. अभी अभी कहीं […]

by January 6, 2017 Fursat ke Pal
प्रतीक्षा

प्रतीक्षा

प्रतीक्षारत होना सुख या दुख का शेष हो जाना है.. धरती का मुखर मौन बादलों की गड़गड़ाहट के सामने शांत नज़र आता है, परन्तु होता नहीं.. उद्वेलित होती है वो भी.. आंदोलित हो तड़पती भी है.. पर उसमें कोई परिवर्तन प्रत्यक्ष रूप में दिखता नहीं… गर्भगृह में होती हलचल से […]

by December 30, 2016 Fursat ke Pal
मुलाक़ात

मुलाक़ात

रातरानी की कलियों और गुलाब की पंखुरियों के बीचोंबीच, चहलकदमी करते, मेरी मुलाक़ात अक्सर खुद से हो जाती है.. वो मैं, जो दिन भर फाइलों के ढेर, कागज़ के टुकड़ों, कंप्यूटर स्क्रीन पर दौड़ते भागते शब्दों के पीछे, कहीं छुपी रहती हूँ.. दम लेने को उठती हूँ, सहकर्मियों से बतियाती […]

by December 9, 2016 Fursat ke Pal
बुनाई

बुनाई

कविताएँ मन के हथकरघे पर हौले-हौले आकार लेतीं हैं.. ज़मीन का सौंधापन, दिल की धड़कन, अहसासों के रंग साथ लिए आतीं हैं.. निपुण बुनकर अपनी उँगलियों पर थिरकते शब्दों को ताने-बाने में उलझाता नहीं… न ही वर्तनी को लंगड़ी कर अर्थ का अनर्थ करवाता है… उसे नहीं चाहिए क्षणिक उत्तेजना, […]

by November 30, 2016 Fursat ke Pal
जिये जा

जिये जा

तनावग्रस्त माहौल में हल्की फुल्की बातें अक्सर मर्म छू जातीं हैं.. आज कुछ ऐसा ही हुआ.. जहां एक और दफ्तर में ज़्यादातर लोग पैसे की किल्लत को लेकर परेशान थे, सरकार के फैसले और जनता की दिक्कतों का पुलिंदा खोला बन्द किया जा रहा था, वहीं एक सज्जन अपनी ठेठ […]

by November 28, 2016 Fursat ke Pal
स्मृति

स्मृति

अनमोल यादों का मोल क्या चुकाया जा सकता है…..बेमोल मिल जाएं तो ही सहेजी जा सकती हैं स्मृतियां ….वर्तमान के तराजू में गुज़रे कल के चिन्ह और आने वाले कल के मीठे पलों को अक्सर होड़ लगाये देखा है…..जीत-हार के लिए नहीं…. इस मन पर एकाधिकार जमाने को……पर भूतकाल भारी […]

by November 28, 2016 Fursat ke Pal