Fursat ke Pal

सुबह सुबह

सुबह सुबह

सुबह सुबह बारिश की बूँदें झिलमिलाती सी आँगन में उतर आएं तो माहौल में एक अलग ही ताज़गी अनुभव होती है। धुले से पत्ते और पंख समेटे शाखों पे बैठे मासूम से पंछी, नवजीवन के स्वागत पटल पर झूमती रंग बिरंगी लड़ियों से लगते हैं मुझे। सच अजब हैं ये […]

by July 9, 2017 Articles, Fursat ke Pal
Reign

Reign

राजा रानी, बचपन से ही अजब लगता था, इनकी कहानियां सुनना, एक ऐसे संसार की कल्पना करना, जहां सब कुछ आपकी मर्जी से हो, आप न कहें तो पत्ता तक न हिले.. नौकर चाकर चौबीसों घण्टे हुक्म बजाने को हाज़िर हों.. आपके खाने,पहननेे, मन बहलाने को सारी दुनिया कदमों तले.. […]

by July 9, 2017 Articles, Fursat ke Pal
आज मौसम

आज मौसम

आज मौसम बड़ा बेईमान है…. आज मौसम… झमाझम बारिश, मीठी आंच पर तड़तड़ाते मकई के दाने.. उड़ती ज़ुल्फें, झुकी पलकें, बूंदों संग अठखेलियां करती पांव की पायल और खुद से गाते गुनगुनाते कंगना.. उफ्फ़! आज मौसम… कारे बदरा, दमकती दामिनी, अमृत वर्षा…और.. और बस ये ज़रा सा मन… चुगलखोर हवा […]

by June 16, 2017 Fursat ke Pal
अनुभव

अनुभव

हर बिंदु एक सम्पूर्ण वर्तुल है… कहती रही, मानती रही.. पर फिर भी ये केवल आकार नहीं वरन प्रकार में भी एक परिपथ हो सकता है, जिसमें धारा प्रवाह विद्युत बहती है, ऐसा कभी सोचा नहीं… जीवन पथ पर ठहरकर, किसी बिंदु पर ध्यान केंद्रित करें, तो अनायास ही कई […]

by June 5, 2017 Fursat ke Pal
जंगल बैबलर्स

जंगल बैबलर्स

“दो कानों में एक सर कर देना है तेरा” वो आंखें दिखाकर कहतीं और मैं फ्राक का सिरा मुंह में डाल चुपचाप बैठ जाती, टुकुर टुकुर दीदी को देखती और उनके होंठों पर मुस्कान की झलक देख जोर से खिलखिला उठती। मामीजी भी उस हंसी में हमारे साथ शामिल हो […]

by May 2, 2017 Fursat ke Pal
स्वागतम

स्वागतम

2 साल पहले, आज ही के दिन, आये भूकम्प के बाद लिखा था ये पन्ना… सुबह साढ़े पांच बजे नींद खुल गई। कानों में पंछियों की चहचहाट रस घोल रही थी। पर्दा खींच कर एक तरफ हटाया तो ठंडी सी हवा भी तन को छूने लगी। उचक कर दरवाजे के […]

by April 26, 2017 Fursat ke Pal, Kuch Panne
बतिया

बतिया

कल रात आंगन में चहलकदमी करते, अचानक नज़र उस चांद से जा मिली.. नन्हे टिमटिमाते तारों के बीचोंबीच, चमकता दमकता सहज सलोना… पर जाने क्यों किसी कशमकश में लग रहा था… यहां वहां, गर्दन घुमाता, खुद से ही बतियाता… पल दो पल उसे देख मुस्कायी, फिर अचानक मुझे अमावस याद […]

by April 10, 2017 Fursat ke Pal
अंबर

अंबर

थकी हारी, दिन भर की ऊहापोह से जूझती, उनींदी अँखियाँ, पल भर ताकती हैं आसमां…. मेघ विहीन अंबर, दम साधे… चन्द्रमा की प्रतीक्षा में, स्वयं को तारों से सुसज्जित किये बैठा है.. पांच-सात नहीं, अनगिनत… प्रथम दृष्टा, कम दिखते हैं… पर एक बार टकटकी बंधे, तो जाने कहाँ से कितने […]

by March 14, 2017 Fursat ke Pal