Articles by: Anu

कील

कील

आज एक नयी कहानी सुनायी उन्होंने.. किसी मंदिर की मान्यता के बारे में… कि कैसे एक औरत शादी के 30 साल बाद मां बनने का सुख पा सकी… और अपनी मुराद पूरी होने पर घुटनों पर बच्चों सी रिढ़ते हुये मन्दिर के द्वार पर माता का धन्यवाद देने गयी… मैं […]

by March 9, 2017 Fiction, Kuch Panne
छात्र संसद में

छात्र संसद में

आज छात्र संसद अखबार में प्रकाशित मेरी कविता

by March 8, 2017 My Published Work
Women’s Day

Women’s Day

“घर का काम नहीं करेगी, तो उसे लायी किसलिए हूँ?” तल्ख़ मिज़ाज़ी से उसने कहा.. हम सब थोड़ा सा अचकचाये, फिर कह ही दिया कि इस बात के लिये नहीं होती बेटे की शादी.. इस पर उनका दूसरा पत्ता, “जब मैं ब्याह कर आयी, मैं भी तो करती थी… और […]

by March 8, 2017 Articles, Events, Kuch Panne
जूते : लघुकथा

जूते : लघुकथा

जूतों की दुकान खुली पड़ी थी और जीजा, चाचा, फूफा अपनी पसंद और नाप के अनुसार चुन रहे थे। मुफ़्त का माल ही सही, क्वालिटी चैक कर लेने में जाता ही क्या है। जब से गोपाल ने ये दुकान खोली थी, रिश्तेदारों की पांचों ऊंगलियाँ घी में थीं। भोला-भाला आदमी, […]

by March 5, 2017 Fiction, My Published Work
ऊंचा आसमां

ऊंचा आसमां

आसमां यकायक बहुत ऊंचा हो गया है दूर कहीं फलक पर सूरज चमक रहा है। बादल भी छितरे से हैं कहीं गहरे नीले तो कहीं धुंधलाए से सफेद जैसे स्याही की शीशी उड़ेल दी हो किसी अनाड़ी ने। क्षितिज पर लिखे अक्षर मिट से गए हैं क्या मालूम कभी कुछ […]

by March 5, 2017 Hindi Poetry, My Published Work
सितारे

सितारे

आज हवा में हल्की सी नमी है। बादलों की टुकड़ियां हौले-हौले गश्त लगा रही हैं। नन्हे तारे शर्मीले बच्चों से आसमां में दुबके जा रहे हैं। छदमी चांद बदलियों के बीच हंसता-मुस्काता अंगड़ाईयां ले रहा है। धूसर सा है समां, होली से पहले अक्सर आंधियां चला ही करती हैं। पर […]

by March 5, 2017 Kuch Panne
सनम

सनम

हौले से मैना मुस्काई कोयल भी ज़रा सी शर्माई तितली भंवरे फूलों से कहें आ फागुन के गीत हम मिलके बुनें आमों की कच्ची कलियां चुनें सेमल की पत्तियों को हम गिनें वो उड़ती चीलें अलबेली वो डरती सहमी गिलहरी हाथों में हाथ जो थाम लें हम छोड़ें न साथ […]

by March 5, 2017 Hindi Poetry
Is Chaos Always Bad?

Is Chaos Always Bad?

Life is a journey and there are many pit stops. Often we get lost mid way, considering the momentary stop as the end. The red flag often appears at the wrong intersection and is able to bring the entire train to a screeching halt. As and when it happens, life […]

by March 1, 2017 Articles