Articles by: Anu

पाखी

पाखी

नभ से जल तक अचल निश्छल मन से तन तक प्रेमिल स्नेहिल शब्द बने पाखी मचल मचल Anupama

by April 13, 2017 Hindi Poetry
मार्कण्डेय

मार्कण्डेय

जब सवाल तमक कर उठते हैं, तब मन के किसी कोने में छुपे जवाब चुपचाप, गर्दन झुकाये, खुद को खोज लिये जाने का इंतज़ार करते हैं… आज सुबह मन में चिरंजीवी शब्द ने कौतूहल रचा था.. दिन भर इसी बारे में पढ़ती रही.. कितनी ही कथाएँ, किंवदन्तियाँ, धार्मिक आस्था के […]

by April 11, 2017 Kuch Panne
बतिया

बतिया

कल रात आंगन में चहलकदमी करते, अचानक नज़र उस चांद से जा मिली.. नन्हे टिमटिमाते तारों के बीचोंबीच, चमकता दमकता सहज सलोना… पर जाने क्यों किसी कशमकश में लग रहा था… यहां वहां, गर्दन घुमाता, खुद से ही बतियाता… पल दो पल उसे देख मुस्कायी, फिर अचानक मुझे अमावस याद […]

by April 10, 2017 Fursat ke Pal
पंछियों

पंछियों

पंछियों का चहकना फूलों का महकना सूरज का कसमसाना बादलों का गुर्राना घास का लहकना डाली का चटकना धुप की गोलियों का पत्तियों पे फिसलना ओस की बूंदों का मोती सा चमकना और उस लम्बी सी पगडंडी पे इक गूंजती सी आवाज़! सुनो! दिन कितना खुबसूरत है न आज!! Anupama

by April 10, 2017 Hindi Poetry
नाव

नाव

मूर्तिकार के कुशल हाथों में अनगढ़ माटी की मूरत प्रेम पगी यादों केे साये में सुघड़ जीवंत सूरत तन कठोर, कोमल भाव लहर लहर, जीवन नाव Anupama

by April 8, 2017 Hindi Poetry, Nano fiction

शब्द

“जब अंधकार हद से गुजर जाए सवेरा नज़दीक होता है। बड़े बूढ़ों ने कहा था। कभी आज़माया नहीं।” लगभग चार साल पहले लिखीं थीं ये पंक्तियां, किसी मुड़े तुड़े कागज़ के टुकड़े पर… शायद तब उजाले की उम्मीद में जीती थी.. नहीं जानती थी कि अंधकार भी उतना ही प्रेरक […]

by April 7, 2017 Kuch Panne
गृह प्रवेश

गृह प्रवेश

मृदंग की थाप नैवैद्य का थाल अगर की महक चन्दन की लहक प्रेम उन्मादित स्वर घंटिकाएं स्नेह आच्छादित स्वर्ण लतिकाएं गमकते केश महकते पुष्प दहकते नेत्र ममत्व स्वरूप अद्वितीय अनुभूति अलौकिक स्पर्श चिर प्रतीक्षित माँ सुमंगल गृह प्रवेश ! Anupama आप सबको अष्टमी पूजन व रामनवमी की शुभकामनाएं 🙂

by April 4, 2017 Hindi Poetry
My Five Poems on INVC

My Five Poems on INVC

by April 3, 2017 My Published Work