Articles by: Anupama Sarkar

सर्दियों की इक सुबह

सर्दियों की इक सुबह

सर्दियों की सुबह, धुंध का घूंघट औढ़े, शर्माती नवयौवना सी, धीमे धीमे मेरे आंगन में उतर आती है.. हवा में हल्की ठंडक है.. शाल को कसकर लपेट लेती हूं.. मुंह से धुआं छोड़ने का प्रयास अभी कामयाब होता नहीं दिखता.. पर बाहों पर उभरते रोंगटे अहसास दिलाते हैं कि गुलाबी […]

by November 21, 2017 Fursat ke Pal
धूर्त

धूर्त

कर्म, मर्यादा, कर्त्तव्य खोखले शब्द समाज का एकमात्र हथियार “अधिकार” स्नेह, करुणा, सहृदयता “अवगुण” व्यक्ति का सर्वोत्तम स्वरूप शठ, चंट, धूर्त….

by November 20, 2017 Hindi Poetry
Collision of Asteroids: Bane or Boon

Collision of Asteroids: Bane or Boon

Space is full of surprises. It may seem blank and vast, but many secrets are hidden beneath those layers. For years, I have been gazing at sky, hypnotized by the twinkling stars, shooting metorites, seldom visible planets like Jupiter and Saturn and totally mesmerized by the punctuality of Sun and […]

by November 17, 2017 Articles
निमिष

निमिष

शाम के शानों पर उसे ढुलकते देख, मन पुलकित हो उठता है… जब वो नकचढ़ा सूरज, थका मांदा, धीमे धीमे घर को निकलता है… मैं मंत्रमुग्ध सी उसके साथ हो लेती हूं.. ढूंढ़ ढूंढ़ लाती हूं चंदन की बाती… मधुर मुस्कान अधरों पर सजाए, बालती हूं, संध्या की प्रीत… सुरभित […]

by November 15, 2017 Fursat ke Pal
Can Volcanoes be Ice Cold?

Can Volcanoes be Ice Cold?

Most of us associate Volcanoes with red hot lava, erupting violently out of Earth, splashing and scalding the surroundings. But seldom do we stop and acknowledge that the Volcanoes are actually responsible for birth of life on Earth, they make atmospheric changes by adding core material and create new structures. […]

by November 8, 2017 Articles
Gazal: Adam Gondvi

Gazal: Adam Gondvi

Hindi Gazal: Adam Gondvi हिंदी गज़ल: अदम गोंडवी अदम गोंडवी साहब हिंदी गज़ल के जाने पहचाने नाम हैं.. उनकी रचनाएं मिट्टी से जुड़ी हैं, ग्रामीण परिवेश और वहां की मुश्किलों को सामने लाती.. उनकी एक बेहतरीन विशेषता है कटाक्ष और व्यंग्य का सृजनात्मक प्रयोग.. पेश हैं उनकी ऐसी ही दो […]

by November 6, 2017 Recital
काश

काश

आज, बहुत दिनों बाद सूरत देखी आईने में। निस्तेज चेहरा, आंखों के नीचे काले घेरे, फटे होंठ, रूखे बाल ! हैरां हूँ मैं उस अक्स को देखकर। क्या सचमुच ये हूँ मैं? वो हंसती-खिलखिलाती प्रीत कहां खो गई। याद है न तुम्हें, मेरा नाम ! तुम्हीं ने बिगाड़ा था या […]

by November 5, 2017 Fiction
स्टापू

स्टापू

by November 3, 2017 Hindi Poetry