Hindi Poetry

एक नया दौर

यूं ही बेवजह चलती मेरी जिंदगी में
कुछ दिन पहले इक नया मोड़ आया
खुशियों की बरसात औ सफलता की
नयी सीढ़ी भी साथ लाया।

जिस पे बस मुझे आंखें बंद कर
इक कदम रखना था
बिना सोचे समझे छोटा सा संकलप लेना था।

आश्वासन थे कि ये इक नया दौर लाएगा
मेरे उदास जीवन को सुख से सराबोर कर जाएगा।

नियति की इस उदारता पर एकाएक विशवास न हुआ
खुद से खूब उलझी मैं औ कुछ भड़की भी ।
खुद को समझाने की अंजान पथ पर
न निकल जाने की गुहार भी की ।

पर अक्सर मुसीबत आने से पहले रास्ते
बहुत आसान हो जाते हैं ।
हर तीव्र मोड़ पर हमारी गति
बढ़ा जाते हैं ।

कुछ ऐसा ही किसा था ये
जिसमें न कोई अवरोध आया
न ही हुआ कोई प्रतिरोध ।
इक पल में ज़िन्दगी बदल गई औ
नया दौर शुरू हो गया ।

कहां तक ले जाएगा ये अनजान सफ़र
न है कोई खबर न ही फिक्र
पर अक्सर दिल से इक आवाज़ आती है
औ मुझे परेशान कर जाती है ।

क्या हर पल इक नया दौर नहीं?
क्या हर राह इक नया मोड़ नहीं?
फिर क्यों डरता है ये दिल?
क्यों हर पल कुछ खटकता है?

शायद ज़्यादा सोचा करती हूँ मैं
खुद को ही तानेबाने में उलझा देती हूँ मैं।

पर आज इस पल में जीने की ललक उठी है
नये दौर को हर नये मोड़ को पाने की तड़प उठी है।
यदि इस नये अहसास को अपना लूँ तो
जिँदगी बदल जाए वरना पछतावा तो उम्र भर का है।

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