Hindi Poetry

तुम और मैं

भीगे भीगे पलों में
सूखे सूखे लम्हों में
तुम चले आते हो

बारिश की बूंदों में
धूप की किरचों में
तुम ही गुनगुनाते हो

बगीचे में, दरीचे में
खिंचे खिंचे, भिंचे भिंचे
तुम ही नज़र आते हो

जाने कितने सावन बीते
पतझड़ कितने फना हुए
कितना चींख चींख रोए
कितना दिल को समझाए
और फिर पूनम की रात
अक्खड़ चांदनी से हम
तुम तक लौट आए….
Anupama

One Comment

  1. GST Courses Delhi says:

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